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'होर्मुज बंद किया तो नहीं बचेगा ईरान': ट्रंप की नई धमकी, कहा-अमेरिका खुद वसूलेगा टोल; तेल पर होगा कब्जा
Sun, 21 Jun 2026 07:27 PM IST
राकेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 21 Jun 2026 07:27 PM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी पर ईरान को मिटाने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका जलमार्ग पर नियंत्रण कर टोल वसूलेगा और 'गार्जियन एंजेल' बनकर 20% तेल पर कब्जा करेगा। ट्रंप ने और क्या-क्या कहा है? जानिए...
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
शांति वार्ता के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की जुर्रत की, तो उसका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। ट्रंप ने कहा, 'आप इसे बंद करेंगे और आपके पास कोई देश नहीं बचेगा। आप अपने देश वापस भी नहीं जा पाएंगे।'
अमेरिका ले सकता है जलमार्ग का नियंत्रण: ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर पूरी तरह नियंत्रण कर सकता है। उन्होंने एक कैबिनेट बैठक के दौरान कहा, 'अगर हमें जरूरत पड़ी, तो हम होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करेंगे। अगर वे कोई समझौता नहीं करते हैं, तो हम खुद वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलेंगे।' ट्रंप की धमकी से पहले ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात कही थी।
ट्रंप बोले-यूएस बनेगा गार्जियन एंजेल
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका को एक नए अंदाज में पेश किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का 'गार्जियन एंजेल' यानी रक्षक बन सकता है। इसके बदले में अमेरिका वहां से निकलने वाले कुल तेल का 20 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखेगा। ट्रंप ने साफ किया कि अगर वैश्विक व्यापार को बाधित करने की कोशिश की गई, तो अमेरिकी सेना चुप नहीं बैठेगी। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति को सुरक्षित रखना अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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ट्रंप की सीधे 'प्रॉक्सी वॉर' रोकने की चेतावनी
इतना ही नहीं, ट्रंप ने इस बार लेबनान और वहां सक्रिय चरमपंथी संगठनों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने बिना किसी लाग-लपेट के ईरान को चेतावनी दी है कि वह लेबनान में जारी अपनी हरकतों को तुरंत बंद करे। ट्रंप ने कहा कि ईरान लेबनान में मोटी रकम पाने वाले अपने 'प्रॉक्सिस' को तुरंत उपद्रव मचाने से रोके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान ने लेबनान में अपने इन लड़ाकों को काबू नहीं किया, तो अमेरिका तेहरान पर फिर से वैसा ही भीषण सैन्य हमला करेगा जैसा पिछले हफ्ते किया था, बल्कि इस बार का प्रहार उससे भी ज्यादा जोरदार होगा।
यह भी पढ़ें: Explainer: मेलोनी ही नहीं, UK-फ्रांस-भारत जैसे करीबियों पर भी बयानबाजी कर चुके ट्रंप; जानें कब-कैसा मिला जवाब
बातचीत की मेज पर धमकी
यह पूरी कहानी और इसके पीछे का सियासी गणित बेहद दिलचस्प है। ट्रंप की यह धमकी ठीक उस वक्त आई है, जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारी टेबल पर बैठकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों ने इसी महीने एक समझौते पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और सीजफायर जैसे बड़े मुद्दों पर 60 दिनों की वार्ता चल रही है। लेकिन, इस नाजुक मोड़ पर भी ट्रंप ने डिप्लोमेसी के बजाय अपने सख्त तेवर दिखाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान लेबनान में मोटी रकम पाने वाले अपने चरमपंथी संगठनों को तुरंत नहीं रोकता, तो अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा भीषण सैन्य हमला करने में देर नहीं करेगा।
'साम-दाम-दंड-भेद' की रणनीति और शांति की उम्मीद
ट्रंप के इस तल्ख रुख के बावजूद, बैकस्टेज से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। स्विट्जरलैंड में चल रही इस वार्ता के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बयान दिया है कि ट्रंप प्रशासन लेबनान में युद्धविराम को बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा है और पिछले कुछ दिनों में इस दिशा में काफी अच्छी प्रगति भी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस तरह के युद्धविराम के जमीनी हालात हमेशा थोड़े पेचीदा और संवेदनशील होते हैं। साफ है कि अमेरिका इस बार 'साम-दाम-दंड-भेद' की नीति पर चल रहा है, एक तरफ टेबल पर डिप्लोमेसी चल रही है, तो दूसरी तरफ ट्रंप सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर तेहरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखना चाहते हैं।
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अमेरिका ले सकता है जलमार्ग का नियंत्रण: ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर पूरी तरह नियंत्रण कर सकता है। उन्होंने एक कैबिनेट बैठक के दौरान कहा, 'अगर हमें जरूरत पड़ी, तो हम होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करेंगे। अगर वे कोई समझौता नहीं करते हैं, तो हम खुद वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलेंगे।' ट्रंप की धमकी से पहले ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात कही थी।
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ट्रंप बोले-यूएस बनेगा गार्जियन एंजेल
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका को एक नए अंदाज में पेश किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का 'गार्जियन एंजेल' यानी रक्षक बन सकता है। इसके बदले में अमेरिका वहां से निकलने वाले कुल तेल का 20 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखेगा। ट्रंप ने साफ किया कि अगर वैश्विक व्यापार को बाधित करने की कोशिश की गई, तो अमेरिकी सेना चुप नहीं बैठेगी। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति को सुरक्षित रखना अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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ट्रंप की सीधे 'प्रॉक्सी वॉर' रोकने की चेतावनी
इतना ही नहीं, ट्रंप ने इस बार लेबनान और वहां सक्रिय चरमपंथी संगठनों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने बिना किसी लाग-लपेट के ईरान को चेतावनी दी है कि वह लेबनान में जारी अपनी हरकतों को तुरंत बंद करे। ट्रंप ने कहा कि ईरान लेबनान में मोटी रकम पाने वाले अपने 'प्रॉक्सिस' को तुरंत उपद्रव मचाने से रोके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान ने लेबनान में अपने इन लड़ाकों को काबू नहीं किया, तो अमेरिका तेहरान पर फिर से वैसा ही भीषण सैन्य हमला करेगा जैसा पिछले हफ्ते किया था, बल्कि इस बार का प्रहार उससे भी ज्यादा जोरदार होगा।
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बातचीत की मेज पर धमकी
यह पूरी कहानी और इसके पीछे का सियासी गणित बेहद दिलचस्प है। ट्रंप की यह धमकी ठीक उस वक्त आई है, जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारी टेबल पर बैठकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों ने इसी महीने एक समझौते पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और सीजफायर जैसे बड़े मुद्दों पर 60 दिनों की वार्ता चल रही है। लेकिन, इस नाजुक मोड़ पर भी ट्रंप ने डिप्लोमेसी के बजाय अपने सख्त तेवर दिखाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान लेबनान में मोटी रकम पाने वाले अपने चरमपंथी संगठनों को तुरंत नहीं रोकता, तो अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा भीषण सैन्य हमला करने में देर नहीं करेगा।
'साम-दाम-दंड-भेद' की रणनीति और शांति की उम्मीद
ट्रंप के इस तल्ख रुख के बावजूद, बैकस्टेज से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। स्विट्जरलैंड में चल रही इस वार्ता के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बयान दिया है कि ट्रंप प्रशासन लेबनान में युद्धविराम को बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा है और पिछले कुछ दिनों में इस दिशा में काफी अच्छी प्रगति भी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस तरह के युद्धविराम के जमीनी हालात हमेशा थोड़े पेचीदा और संवेदनशील होते हैं। साफ है कि अमेरिका इस बार 'साम-दाम-दंड-भेद' की नीति पर चल रहा है, एक तरफ टेबल पर डिप्लोमेसी चल रही है, तो दूसरी तरफ ट्रंप सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर तेहरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखना चाहते हैं।