{"_id":"673c064dbf7f5e7a96072acb","slug":"donald-trump-cabinet-ministers-has-anti-pakistan-government-army-views-terrorism-china-2024-11-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pakistan: ट्रंप की कैबिनेट से पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ी, सेना और आईएसआई खासतौर पर परेशान","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Pakistan: ट्रंप की कैबिनेट से पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ी, सेना और आईएसआई खासतौर पर परेशान
Tue, 19 Nov 2024 09:13 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 19 Nov 2024 09:13 AM IST
सार
माइक वाल्ट्ज ने एक बार अपने बयान में पाकिस्तान पर अपनी विदेश नीति में आतंकवाद का सहारा लेने का आरोप लगाया था और कहा था कि 'आतंकवाद विदेश नीति का साधन नहीं हो सकता। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और पाकिस्तान की सरकार, पाकिस्तानी सेना और इसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को इससे आगे बढ़ना होगा।'
विज्ञापन
पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद अपनी कैबिनेट के कई सहयोगियों का चुनाव कर चुके हैं। खासकर रणनीतिक तौर पर अहम पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं। इन नियुक्तियों को लेकर अमेरिका में जितना उत्साह शायद न हो उससे ज्यादा दुख और चिंता पाकिस्तान की सरकार को हो रही होगी। इसकी वजह ये है कि ट्रंप की कैबिनेट में अधिकतर नेता वो हैं, जो पाकिस्तान के प्रति अच्छे विचार नहीं रखते। यही वजह है कि आर्थिक तौर पर संकट में घिरी पाकिस्तान की सरकार को अमेरिका से जो उम्मीदें थीं, उन्हें झटका लगना तय है।
डोनाल्ड ट्रंप के नए विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, खुफिया विभाग की निदेशक सभी लोग पाकिस्तान के प्रति आलोचनात्मक विचार रखते हैं और इनका भारत के प्रति रवैया काफी सकारात्मक है। इससे साफ है कि अमेरिका की विदेश नीति में पाकिस्तान को अहम जगह मिलने की उम्मीद कम ही है। ऐसे में पाकिस्तानी सेना, खुफिया एजेंसी आईएसआई के शीर्ष अधिकारी अमेरिका की संबंधों को लेकर रणनीति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो
अमेरिका के नए विदेश मंत्री मार्को रुबियो पाकिस्तान के आलोचक माने जाते हैं। बतौर सीनेटर मार्को रुबियो ने पिछली सरकार में संसद में एक विधेयक पेश किया था, जिसने पाकिस्तानी सेना के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी। दरअसल इस विधेयक में मार्को रुबियो ने पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ राज्य प्रायोजित प्रॉक्सी समूहों द्वारा आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया था। इस विधेयक में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता बंद करने की सलाह दी गई थी। इसके अलावा रुबियो ने अमेरिकी सीनेट में एक अन्य विधेयक पेश किया था, जिसमें चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की वकालत की थी।
विज्ञापन
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज
मार्को रुबियो की तरह ही डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रशासन में एक और प्रमुख व्यक्ति हैं माइक वाल्ट्ज- जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया है। माइक वाल्ट्ज भी पाकिस्तान के कट्टर आलोचक हैं। माइक वाल्ट्ज ने एक बार अपने बयान में पाकिस्तान पर अपनी विदेश नीति में आतंकवाद का सहारा लेने का आरोप लगाया था और कहा था कि 'आतंकवाद विदेश नीति का साधन नहीं हो सकता। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और पाकिस्तान की सरकार, पाकिस्तानी सेना और इसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को इससे आगे बढ़ना होगा।'
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड
तुलसी गबार्ड, जो ट्रंप प्रशासन में खुफिया निदेशक बनने वाली हैं, वे भी पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख का पूरी तरह से समर्थन करती हैं। गबार्ड ने 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ नई दिल्ली को अपना पूरा समर्थन दिया था। उन्होंने कई मौकों पर पाकिस्तान पर तत्कालीन अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को शरण देने के लिए भी हमला किया, जिसे साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी नौसेना के जवानों के मार गिराया था।
सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ
अगले सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ चीन और ईरान के प्रति अपने आक्रामक दृष्टिकोण के लिए भी जाने जाते हैं और यकीनन उनकी निगाहें इस्लामाबाद की गतिविधियों पर भी रहेंगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे ट्रंप कैबिनेट बन रही है, उससे पाकिस्तान की सरकार और खासकर पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई की रातों की नींद उड़ रही है क्योंकि इससे संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान अमेरिका की प्राथमिकता सूची में शायद ही रहे और उसके भारत के साथ संबंधों में और ज्यादा प्रगाढ़ता आ सकती है।
संबंधित वीडियो
विज्ञापन
डोनाल्ड ट्रंप के नए विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, खुफिया विभाग की निदेशक सभी लोग पाकिस्तान के प्रति आलोचनात्मक विचार रखते हैं और इनका भारत के प्रति रवैया काफी सकारात्मक है। इससे साफ है कि अमेरिका की विदेश नीति में पाकिस्तान को अहम जगह मिलने की उम्मीद कम ही है। ऐसे में पाकिस्तानी सेना, खुफिया एजेंसी आईएसआई के शीर्ष अधिकारी अमेरिका की संबंधों को लेकर रणनीति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विदेश मंत्री मार्को रुबियो
अमेरिका के नए विदेश मंत्री मार्को रुबियो पाकिस्तान के आलोचक माने जाते हैं। बतौर सीनेटर मार्को रुबियो ने पिछली सरकार में संसद में एक विधेयक पेश किया था, जिसने पाकिस्तानी सेना के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी। दरअसल इस विधेयक में मार्को रुबियो ने पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ राज्य प्रायोजित प्रॉक्सी समूहों द्वारा आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया था। इस विधेयक में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता बंद करने की सलाह दी गई थी। इसके अलावा रुबियो ने अमेरिकी सीनेट में एक अन्य विधेयक पेश किया था, जिसमें चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की वकालत की थी।
विज्ञापन
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज
मार्को रुबियो की तरह ही डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रशासन में एक और प्रमुख व्यक्ति हैं माइक वाल्ट्ज- जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया है। माइक वाल्ट्ज भी पाकिस्तान के कट्टर आलोचक हैं। माइक वाल्ट्ज ने एक बार अपने बयान में पाकिस्तान पर अपनी विदेश नीति में आतंकवाद का सहारा लेने का आरोप लगाया था और कहा था कि 'आतंकवाद विदेश नीति का साधन नहीं हो सकता। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और पाकिस्तान की सरकार, पाकिस्तानी सेना और इसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को इससे आगे बढ़ना होगा।'
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड
तुलसी गबार्ड, जो ट्रंप प्रशासन में खुफिया निदेशक बनने वाली हैं, वे भी पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख का पूरी तरह से समर्थन करती हैं। गबार्ड ने 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ नई दिल्ली को अपना पूरा समर्थन दिया था। उन्होंने कई मौकों पर पाकिस्तान पर तत्कालीन अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को शरण देने के लिए भी हमला किया, जिसे साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी नौसेना के जवानों के मार गिराया था।
सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ
अगले सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ चीन और ईरान के प्रति अपने आक्रामक दृष्टिकोण के लिए भी जाने जाते हैं और यकीनन उनकी निगाहें इस्लामाबाद की गतिविधियों पर भी रहेंगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे ट्रंप कैबिनेट बन रही है, उससे पाकिस्तान की सरकार और खासकर पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई की रातों की नींद उड़ रही है क्योंकि इससे संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान अमेरिका की प्राथमिकता सूची में शायद ही रहे और उसके भारत के साथ संबंधों में और ज्यादा प्रगाढ़ता आ सकती है।
संबंधित वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन