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ट्रंप ने अभी तक नहीं छोड़ी हैं राष्ट्रपति बने रहने की कोशिशें, हर विकल्प पर कर रहे हैं विचार

Tue, 22 Dec 2020 04:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Dec 2020 04:04 PM IST
सार

पिछले हफ्ते अमेरिकी मीडिया में ये खबर छपी थी कि व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक में मार्शल लॉ लगाने का सुझाव दिया गया था। अब ये चर्चा भी है कि नए साल पर ट्रंप छुट्टी मनाने के लिए मार-ए-लागो रिजॉर्ट पर होंगे, जहां वे अपने कट्टर समर्थकों से घिरे होंगे...

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Donald Trump advisors Proposed Coup plan, he hired again attorney Sidney Powell as special counsel
President Donald Trump - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा पलटने और व्हाइट हाउस में बने रहने की अपनी कोशिश में डोनाल्ड ट्रंप अब अति दक्षिणपंथी ताकतों से राय-मशविरा कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों में ट्रंप की इस कोशिश को बेहद चिंताजनक बताया गया है। टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा- ‘कोई नहीं जानता की चीजें कहां जा रही हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी वे एक और महीने तक देश के राष्ट्रपति हैं।’

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ऐसी खबरों से देश में अनिश्चय का माहौल बना हुआ है। पिछले दिनों ट्रंप ने जिन लोगों से राय-मशविरा किया, उनमें कॉन्सपिरेसी थ्योरी (षड्यंत्र के सिद्धांत) गढ़ने वाली वकील सिडनी पॉवेल, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फिन, एक समय में ट्रंप के रणनीतिकार रहे स्टीव बेनन, उग्रवादी व्यापार नीतियों के पैरोकार पीटर नवारो आदि शामिल हैं। इनमें ट्रंप ने कुछ को व्हाइट हाउस बुलाया और कुछ से फोन पर बात की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन सभी ने एक स्वर से ट्रंप को सलाह दी है कि चुनाव नतीजे को पलटवाने की उन्हें एक और आखिरी कोशिश जरूर करनी चाहिए।
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इन सबके अलावा ट्रंप के निजी वकील रूडी जुइलियानी लगातार राष्ट्रपति के साथ बने हुए हैं। चुनावी धांधली की कई कहानियां पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने गढ़ी और प्रचारित की हैं। सोमवार को जुइलियानी और सिडनी पॉवेल एक साथ व्हाइट हाउस में देखे गए। इस बीच बताया गया है कि ट्रंप ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपने संबंध लगभग बिल्कुल काट लिए हैं। उन्होंने रोजमर्रा के सरकारी कामकाज में भाग लेना भी लगभग छोड़ दिया है। पिछले हफ्ते उन्होंने कैबिनेट की बैठक की थी। लेकिन इसमें ज्यादा समय वे यही बताते रहे कि चुनाव कितने संदिग्ध ढंग से हुआ और उसमें कितनी धांधली हुई। जानकारों का कहना है कि हाल के दिनों में ट्रंप का पूरा ध्यान कथित चुनावी धांधली पर केंद्रित रहा है।
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सोमवार को उन्होंने अपने समर्थक कार्यकर्ता चार्ली किर्क से कहा, हमने चुनाव में भारी जीत हासिल की। किर्क ने इस बातचीत का अपने माइक्रोफोन के जरिए फ्लोरिडा में पाम बीच पर इकट्ठे हुए रिपब्लिकन समर्थकों के बीच सीधा प्रसारण किया। ट्रंप ने कहा कि हमें एक ऐसी पार्टी की जरूरत है, जो लड़े। हमारे पास कांग्रेस (संसद) सदस्य हैं, जो ये लड़ाई बखूबी लड़ रहे हैं। लेकिन हमें न्याय मंत्रालय और अन्य लोगों के समर्थन की भी जरूरत है।

सीएनएन के मुताबिक सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि सिडनी पॉवेल क्या सलाह देती हैं। कुछ ही हफ्ते पहले उन्हें ट्रंप की लीगल टीम से हटा दिया गया था। लेकिन अब वे वापस आ गई हैं। आशंका यह है कि वे कोई भी असंवैधानिक कदम उठाने के लिए ट्रंप को समझा सकती हैं। पिछले हफ्ते अमेरिकी मीडिया में ये खबर छपी थी कि व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक में मार्शल लॉ लगाने का सुझाव दिया गया था। अब ये चर्चा भी है कि नए साल पर ट्रंप छुट्टी मनाने के लिए मार-ए-लागो रिजॉर्ट पर होंगे, जहां वे अपने कट्टर समर्थकों से घिरे होंगे। मुमकिन है कि ये लोग उन्हें ये समझाने में सफल रहें कि व्हाइट हाउस में बने रहने के लिए हर संभव लड़ाई उन्हें लड़नी चाहिए।

ऐसी भी चर्चा है कि छह जनवरी को नव निर्वाचित कांग्रेस की बैठक शुरू होने पर कई रिपब्लिकन सांसद जो बाइडन के निर्वाचन को सदन में चुनौती देंगे। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के मो ब्रुक्स ऐसा करने का इरादा जता चुके हैं। सोमवार को ट्रंप ने ब्रुक्स और कई दूसरे कंजरवेटिव सांसदों से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। सीएनएन के मुताबिक इस बैठक में ये कहा गया कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति पद को चुरा लिया है। साथ ही ट्रंप को भरोसा दिलाया गया है कि हाउस और सीनेट दोनों सदनों में पर्याप्त संख्या में ऐसे रिपब्लिकन सदस्य हैं, जो छह जनवरी को चुनाव में हुई धांधली पर बहस में भाग लेंगे। ये बहस अगले दिन भी जारी रह सकती है।


हालांकि अभी ज्यादातर लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि ट्रंप सचमुच मार्शल लॉ लगाने की कोशिश करेंगे या 20 जनवरी को व्हाइट हाउस छोड़ने से इनकार कर देंगे, लेकिन मीडिया में चल रही चर्चाओं से अनिश्चय का माहौल बना हुआ है। साथ ही चुनाव की साख लगातार प्रभावित हो रही है।

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