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अमेरिकी स्कूलों पर बड़ा संकट: ट्रंप ने छह अरब डॉलर की शिक्षा फंडिंग पर लगाई रोक; विरोध में 20 से ज्यादा राज्य

Sat, 19 Jul 2025 02:24 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sat, 19 Jul 2025 02:24 PM IST
सार

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने नया सत्र शुरू होने से पहले छह अरब डॉलर की स्कूल फंडिंग रोक दी है। इससे गरीब, ग्रामीण और विशेष जरूरतों वाले छात्रों के लिए जरूरी कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। 20 से ज्यादा राज्यों ने इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दी है।

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Donald Trump administration stopped 6 billion dollar funding public schools budget department reviewing
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से ठीक पहले पब्लिक स्कूलों के लिए तय छह अरब डॉलर की फंडिंग रोक दी है। यह फंडिंग खासकर उन स्कूल कार्यक्रमों के लिए होती है, जो पिछड़े, ग्रामीण, कम-आय वाले या विशेष जरूरतों वाले छात्रों की मदद करते हैं। इसमें आफ्टर-स्कूल प्रोग्राम, शिक्षक प्रशिक्षण, इंग्लिश-लर्निंग और स्टूडेंट सपोर्ट जैसी योजनाएं आती हैं। इन फंड्स की समीक्षा अब बजट विभाग कर रहा है।
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यह पैसा राज्य सरकारों के सामान्य शिक्षा बजट का हिस्सा नहीं होता, बल्कि विशेष फेडरल अनुदान होता है जिससे लोकल स्कूल जिले अपने जरूरी कार्यक्रम चलाते हैं। जून 30 को जारी एक सख्त मेमो में कहा गया कि जब तक समीक्षा पूरी नहीं होती, कोई अनुदान जारी नहीं किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब स्कूलों में पढ़ाई दोबारा शुरू होने वाली है। इससे स्कूलों को अपने बजट में भारी बदलाव करने की आशंका है।
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20 से ज्यादा राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ अब 20 से ज्यादा राज्यों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। कैलिफोर्निया और कनेक्टिकट जैसे राज्यों ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। सिर्फ कनेक्टिकट को 2025-26 शैक्षणिक वर्ष में 53.6 मिलियन डॉलर की क्षति का अनुमान है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एजुकेशन डिपार्टमेंट के 1,400 कर्मचारियों की कटौती को भी मंजूरी दे दी थी।
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बच्चों के सपोर्ट प्रोग्राम पर सबसे ज्यादा असर
रुके हुए फंड्स में 21वीं सदी के लर्निंग सेंटर, अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण, वयस्क साक्षरता और शिक्षकों की ट्रेनिंग जैसे कई अहम कार्यक्रम शामिल हैं। इनमें से 1.4 अरब डॉलर की राशि तो जारी कर दी गई है, लेकिन अब भी पांच अरब डॉलर से ज्यादा रोक दी गई है। इससे शिक्षकों की कमी, विशेष शिक्षा सेवाओं में कटौती और कक्षाओं में भीड़ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


गंभीर असमानता की आशंका
शिक्षाविदों और नागरिक अधिकार समूहों ने चेताया है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों, अंग्रेज़ी सीखने वाले छात्रों और विकलांग विद्यार्थियों पर पड़ेगा। शिक्षक संघों ने इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए ‘चांटा’ बताया है। शिक्षकों का कहना है कि संसाधनों की कमी से पढ़ाई की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा।

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क्या डेमोक्रेट शासित राज्यों को निशाना बनाया गया?
हालांकि ट्रंप प्रशासन का आदेश पूरे देश के लिए है, लेकिन जिन राज्यों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है, वे अधिकांश डेमोक्रेटिक हैं। जैसे कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और इलिनॉय। आलोचकों का मानना है कि यह फैसला राजनीतिक रूप से विरोधी राज्यों को दंडित करने की एक रणनीति हो सकती है। हालांकि इस संबंध में प्रशासन ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। बचपन की शिक्षा, शिक्षक सहायता और स्कूली समर्थन प्रणाली पर इस रोक के गंभीर असर पड़ सकते हैं। जब तक कांग्रेस या कोर्ट कोई दखल नहीं देता, तब तक यह साफ नहीं है कि बाकी 5 अरब डॉलर जारी होंगे या नहीं।



 
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