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अमेरिका में ‘बिना साक्ष्य' चैनल को चुनावी धांधली की खबरें दिखाना पड़ा महंगा, वोटिंग मशीन बनाने वाली कंपनी ने ठोका केस
Sat, 27 Mar 2021 04:34 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 27 Mar 2021 04:34 PM IST
सार
मीडिया विश्लेषकों के मुताबिक असल समस्या देश की मीडिया का दो राजनीतिक खेमों में बंट जाना है। फॉक्स जैसे चैनल जहां रिपब्लिकन पार्टी का मुखपत्र बने हुए हैं, वहीं लिबरल मीडिया कहे जाने वाले मीडिया घराने डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में गोलबंद होते गए हैं...
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USA voting
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
अमेरिका के दक्षिणपंथी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज को पिछले राष्ट्रपति चुनाव के समय ‘बिना साक्ष्य' के खबर दिखाना महंगा पड़ सकता है। चुनाव के ठीक बाद इस चैनल ने लगातार ऐसी खबरें चलाईं, जिनमें कहा गया कि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन को जिताने के लिए धांधली की गईं। फॉक्स न्यूज पर मुकदमा अमेरिका में वोटिंग मशीन मुहैया कराने वाली कंपनी डोमिनियन वोटिंग सिस्टम ने थोपा है। इसमें इल्जाम लगाया गया है कि इस चैनल ने लापरवाह तरीके से इस कंपनी के लिए ऐसी अपमान खबरें चलाईं, जिससे कंपनी को गहरा और अपूरणीय आर्थिक नुकसान हुआ है। इसके एवज में कंपनी ने फॉक्स न्यूज से 1.6 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है।
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मुकदमा डेलावेयर राज्य की एक अदालत में दर्ज कराया गया है। मुकदमा दायर करने के बाद डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स ने एक बयान में कहा कि फॉक्स अमेरिका की सबसे शक्तिशाली मीडिया कंपनियों में एक है। उसने चुनावी धोखाधड़ी की गढ़ी हुई खबरें दिखाईं। इन खबरों में डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स को खलनायक के रूप में पेश किया गया।
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गौरतलब यह है कि कंपनी ने मुकदमे में फॉक्स न्यूज चैनल पर आए गेस्ट्स को भी लपेट लिया है। इनमें टकर कार्लसन, मारिया बार्टिरोमो, लाउ डॉब्स, सीन हनिटी और जीनाइन पीरो शामिल हैं। इन गेस्ट्स ने भी चैनल पर हुई चर्चाओं में चुनाव धोखाधड़ी की बात की थी। डॉमिनियन वोटिंग सिस्टम्स ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वकीलों सिडनी पॉवेल और रूडी गुइलियानी पर अलग से मुकदमा ठोका है। उन लोगों ने भी चुनाव में धांधली और डॉमिनियन की वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इसके पहले सॉफ्टवेयर कंपनी स्मार्टमैटिक भी फॉक्स, पॉवेल और गुइलियानी पर मानहानि के आरोप में मुकदमा दायर कर चुकी हैं। इस कंपनी ने वोटिंग मशीनों के लिए सॉफ्टवेयर मुहैया कराए थे।
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जानकारों का कहना है कि फॉक्स न्यूज या ट्रंप के वकीलों पर दायर हुए मुकदमे अमेरिका में लगातार बढ़ रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण का परिणाम है। जब ट्रंप राष्ट्रपति थे, तो उनकी टीम ने टीवी चैनल सीएनएन, और अखबारों न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट पर मुकदमे ठोके थे। इन मीडिया घरानों पर ऐसी झूठी खबरें दिखाने का आरोप लगाया गया था, जिनमें कहा गया कि ट्रंप की रूसी सरकार से मिलीभगत है। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन के खिलाफ मुकदमे कोर्ट में खारिज हो गए। वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ मुकदमा अभी भी चल रहा है।
मीडिया विश्लेषकों के मुताबिक असल समस्या देश की मीडिया का दो राजनीतिक खेमों में बंट जाना है। फॉक्स जैसे चैनल जहां रिपब्लिकन पार्टी का मुखपत्र बने हुए हैं, वहीं लिबरल मीडिया कहे जाने वाले मीडिया घराने डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में गोलबंद होते गए हैं। ऐसे में दोनों तरफ की खबरों की साख घटी है। इसके बीच यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि टीवी चैनल या अखबार गलत खबर दिखा या छाप कर बचे ना रह सकें। उम्मीद है कि ताजा मुकदमे से इस दिशा में प्रगति होगी।
डोमिनियन के मुकदमे में कहा गया है कि फॉक्स न्यूज ने चुनाव में धांधली के सिर्फ आम आरोप नहीं लगाए। बल्कि एक स्टोरी में यह भी कहा गया कि डोमिनियन ने वोटिंग मशीनें सप्लाई करने का ठेका पाने के लिए सरकारी अफसरों को घूस दी थी। इसके अलावा ये इल्जाम भी लगाया गया कि डोमिनियन की मालिक एक ऐसी कंपनी है, जिसकी स्थापना वेनेजुएला में हुई थी और जिसने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज के हक में चुनाव में धांधली की थी। डोमिनियन ने दावा किया है कि फॉक्स न्यूज को यह मालूम था कि ऐसे तमाम आरोप झूठे हैं। उसे इस बारे में नोटिस देकर तथ्य भी बताए गए। इसके बावजूद उसने निराधार खबरें दिखाना जारी रखा।
फॉक्स न्यूज ने कहा है कि उस पर बेबुनियाद मुकदमा ठोका गया है। इसके खिलाफ वह पुरजोर तरीके से वह अपना बचाव करेगा। फॉक्स ने दावा किया है कि वह अमेरिकी पत्रकारिता के सर्वोच्च मानदंडों का पालन करता है।