{"_id":"6aeef89528de6209af0555f0","slug":"diwali-celebration-around-the-world-from-india-to-us-discover-unique-traditions-from-across-globe-explainer-2026-11-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक्सप्लेनर: दुनिया भर में कैसे मनाते हैं दिवाली? भारत से लेकर अमेरिका तक, जानिए दुनिया भर की खास परंपराएं","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
एक्सप्लेनर: दुनिया भर में कैसे मनाते हैं दिवाली? भारत से लेकर अमेरिका तक, जानिए दुनिया भर की खास परंपराएं
Sun, 08 Nov 2026 06:05 AM IST
अमन तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 08 Nov 2026 06:05 AM IST
सार
दिवाली का त्योहार केवल भारत तक सीमित नहीं है। नेपाल, मॉरीशस, सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के कई देशों में इसे अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं पांच दिवसीय तिहार उत्सव होता है, तो कहीं भव्य सांस्कृतिक आयोजन भारतीय विरासत की झलक दिखाते हैं। आइए उन देशों के बारे में विस्तार से जानते हैं जहां विशेष रूप से दिवाली का उत्सव मनाया जाता है...
विज्ञापन
दुनिया में कहां कहां मनाई जाती है दिवाली?
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रोशनी का पर्व दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। दिवाली के मौके पर हर जगह दीपों की जगमगाहट और इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स की चमक नजर आती है। वैसे तो हर त्योहार खुशियों और उत्साह का होता है, लेकिन दिवाली में यह उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। दिवाली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यहां इसे बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। लेकिन दिवाली की रौनक सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में भी यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। कई देशों में मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों को रोशनी से सजाया जाता है, तो कहीं भारतीय मूल के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सामूहिक आयोजन करते हैं।
नेपाल, श्रीलंका, मलयेशिया, सिंगापुर, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में दिवाली की अलग-अलग चमक देखने मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि हर देश में इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व एक जैसा नहीं है। कहीं यह भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी से जुड़ी है, कहीं मां लक्ष्मी की पूजा से, तो कहीं यह सिख और जैन समुदायों के लिए भी विशेष धार्मिक महत्व रखती है। आइए जानते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों में दिवाली कहां और किस तरह मनाई जाती है...
विज्ञापन
नेपाल, श्रीलंका, मलयेशिया, सिंगापुर, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में दिवाली की अलग-अलग चमक देखने मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि हर देश में इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व एक जैसा नहीं है। कहीं यह भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी से जुड़ी है, कहीं मां लक्ष्मी की पूजा से, तो कहीं यह सिख और जैन समुदायों के लिए भी विशेष धार्मिक महत्व रखती है। आइए जानते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों में दिवाली कहां और किस तरह मनाई जाती है...
विज्ञापन
Trending Videos
नेपाल: पांच दिनों तक चलता है दिवाली का उत्सव
भारत का पड़ोसी देश नेपाल दिवाली मनाने वाले देशों में सबसे खास है। यहां इस त्योहार को 'तिहार' कहा जाता है। यह पांच दिनों तक मनाया जाता है और इसकी परंपराएं भारत की दिवाली से कुछ अलग हैं। नेपाल में इस दौरान केवल देवी-देवताओं की ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों की भी पूजा की जाती है।
नेपाल में दिवाली के पहले दिन कौओं की पूजा होती है। इसे 'काग तिहार' कहते हैं। मान्यता है कि कौआ यमराज का संदेशवाहक है। दूसरे दिन कुत्ते की पूजा की जाती है, जिसे 'कुकुर तिहार' कहते हैं। इस दिन कुत्तों को फूलों की माला पहनाई जाती है, माथे पर टीका लगाया जाता है और उन्हें खाना भी खिलाया जाता है।
तीसरे दिन गाय की पूजा और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। गाय को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। शाम को घरों में दीपक जलाए जाते हैं और लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। चौथे दिन बैल की पूजा होती है। नेपाल के नेवार समुदाय में इसी दिन 'म्हा पूजा' की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसमें व्यक्ति स्वयं की पूजा करता है। पांचवें और आखिरी दिन भाई दूज की तरह 'भाई टीका' मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों के माथे पर सात रंगों का टीका लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।
श्रीलंका में कैसे मनाया जाता है दीपावली त्योहार?
श्रीलंका में दिवाली को 'दीपावली' कहा जाता है। यहां खासतौर पर तमिल हिंदू समुदाय के लोग इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं। उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका के तमिल बहुल इलाकों के साथ राजधानी कोलंबो में भी दीपावली की रौनक देखने को मिलती है।
इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर तेल लगाकर स्नान करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। घरों में तेल के दीये जलाए जाते हैं और दरवाजों के सामने रंग-बिरंगी कोलम बनाई जाती है। कोलम दक्षिण भारतीय रंगोली कला का एक रूप है, जिसमें चावल के आटे और रंगों से सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं। परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां और उपहार देते हैं। मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दीपावली के दौरान घरों और धार्मिक स्थलों पर रोशनी की विशेष सजावट की जाती है।
भारत का पड़ोसी देश नेपाल दिवाली मनाने वाले देशों में सबसे खास है। यहां इस त्योहार को 'तिहार' कहा जाता है। यह पांच दिनों तक मनाया जाता है और इसकी परंपराएं भारत की दिवाली से कुछ अलग हैं। नेपाल में इस दौरान केवल देवी-देवताओं की ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों की भी पूजा की जाती है।
नेपाल में दिवाली के पहले दिन कौओं की पूजा होती है। इसे 'काग तिहार' कहते हैं। मान्यता है कि कौआ यमराज का संदेशवाहक है। दूसरे दिन कुत्ते की पूजा की जाती है, जिसे 'कुकुर तिहार' कहते हैं। इस दिन कुत्तों को फूलों की माला पहनाई जाती है, माथे पर टीका लगाया जाता है और उन्हें खाना भी खिलाया जाता है।
तीसरे दिन गाय की पूजा और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। गाय को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। शाम को घरों में दीपक जलाए जाते हैं और लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। चौथे दिन बैल की पूजा होती है। नेपाल के नेवार समुदाय में इसी दिन 'म्हा पूजा' की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसमें व्यक्ति स्वयं की पूजा करता है। पांचवें और आखिरी दिन भाई दूज की तरह 'भाई टीका' मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों के माथे पर सात रंगों का टीका लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।
श्रीलंका में कैसे मनाया जाता है दीपावली त्योहार?
श्रीलंका में दिवाली को 'दीपावली' कहा जाता है। यहां खासतौर पर तमिल हिंदू समुदाय के लोग इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं। उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका के तमिल बहुल इलाकों के साथ राजधानी कोलंबो में भी दीपावली की रौनक देखने को मिलती है।
इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर तेल लगाकर स्नान करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। घरों में तेल के दीये जलाए जाते हैं और दरवाजों के सामने रंग-बिरंगी कोलम बनाई जाती है। कोलम दक्षिण भारतीय रंगोली कला का एक रूप है, जिसमें चावल के आटे और रंगों से सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं। परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां और उपहार देते हैं। मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दीपावली के दौरान घरों और धार्मिक स्थलों पर रोशनी की विशेष सजावट की जाती है।
विज्ञापन
विदेशों में दिवाली का उत्सव
- फोटो : एएनआई
सिंगापुर: लिटिल इंडिया की सड़कों पर उतर आता है रोशनी का त्योहार
सिंगापुर में दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी के कारण यह त्योहार विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का 'लिटिल इंडिया' इलाका है। दीपावली से कई सप्ताह पहले ही इस क्षेत्र की सड़कें रंगीन रोशनी और आकर्षक सजावट से जगमगाने लगती हैं।
दीपावली के दौरान लिटिल इंडिया में बाजार सजते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और पारंपरिक भारतीय पकवानों की दुकानें लगती हैं। यहां लोग साड़ी, आभूषण, फूलों की माला, मिठाइयां और त्योहार से जुड़ी दूसरी चीजें खरीदते हैं। इसके साथ ही सिंगापुर के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों जैसे श्री वीरमाकलियम्मन मंदिर और श्री श्रीनिवास पेरुमल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। यहां पूजा-पाठ के साथ धार्मिक जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
मलयेशिया: दीपावली के अनोखे रंगों में रंग जाता है देश
मलयेशिया में दीपावली का त्योहार भारतीय मूल के लोगों, खासकर तमिल हिंदू समुदाय के बीच बहुत लोकप्रिय है। मलयेशिया के कुआलालंपुर, पेनांग और अन्य शहरों में दीपावली के दौरान बाजारों और मंदिरों में विशेष रौनक रहती है। दीपावली से पहले लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और उन्हें फूलों, दीपकों तथा रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं। यहां एक खास परंपरा तेल से स्नान करने की भी है। त्योहार की सुबह कई परिवार पारंपरिक तरीके से तेल लगाकर स्नान करते हैं और फिर मंदिरों में पूजा करने जाते हैं।
मलयेशिया में रंगीन चावल और फूलों से बनाई जाने वाली 'कोलम' सजावट का भी विशेष महत्व है। मॉल, होटल और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी-बड़ी कोलम बनाई जाती हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और घरों में पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं।
सिंगापुर में दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी के कारण यह त्योहार विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का 'लिटिल इंडिया' इलाका है। दीपावली से कई सप्ताह पहले ही इस क्षेत्र की सड़कें रंगीन रोशनी और आकर्षक सजावट से जगमगाने लगती हैं।
दीपावली के दौरान लिटिल इंडिया में बाजार सजते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और पारंपरिक भारतीय पकवानों की दुकानें लगती हैं। यहां लोग साड़ी, आभूषण, फूलों की माला, मिठाइयां और त्योहार से जुड़ी दूसरी चीजें खरीदते हैं। इसके साथ ही सिंगापुर के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों जैसे श्री वीरमाकलियम्मन मंदिर और श्री श्रीनिवास पेरुमल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। यहां पूजा-पाठ के साथ धार्मिक जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
मलयेशिया: दीपावली के अनोखे रंगों में रंग जाता है देश
मलयेशिया में दीपावली का त्योहार भारतीय मूल के लोगों, खासकर तमिल हिंदू समुदाय के बीच बहुत लोकप्रिय है। मलयेशिया के कुआलालंपुर, पेनांग और अन्य शहरों में दीपावली के दौरान बाजारों और मंदिरों में विशेष रौनक रहती है। दीपावली से पहले लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और उन्हें फूलों, दीपकों तथा रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं। यहां एक खास परंपरा तेल से स्नान करने की भी है। त्योहार की सुबह कई परिवार पारंपरिक तरीके से तेल लगाकर स्नान करते हैं और फिर मंदिरों में पूजा करने जाते हैं।
मलयेशिया में रंगीन चावल और फूलों से बनाई जाने वाली 'कोलम' सजावट का भी विशेष महत्व है। मॉल, होटल और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी-बड़ी कोलम बनाई जाती हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और घरों में पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं।
मॉरीशस: कैसे मनाई जाती है दीपावली?
हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस में दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है और हिंदू समुदाय के लिए यह साल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। मॉरीशस में दीपावली की सबसे खूबसूरत परंपरा घरों को रोशनी से सजाना है। लोग अपने घरों के बाहर मिट्टी के दीये और बिजली की लाइटें लगाते हैं। रात के समय पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठता है। दीपावली के दौरान देश में सार्वजनिक अवकाश भी रहता है। यहां पारंपरिक रूप से घरों के सामने मिट्टी के तेल वाले दीपक रखे जाते थे, अब कई जगहों पर उनकी जगह सजावटी बिजली की रोशनी ने ले ली है। इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों के साथ मिठाइयां बांटते हैं। घरों में तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही रात में आतिशबाजी भी की जाती है।
फिजी: भारतीय परंपराओं के साथ राष्ट्रीय उत्सव
प्रशांत महासागर में स्थित फिजी में भी दिवाली बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। फिजी में दिवाली के दिन घरों को दीयों और बिजली की झालरों से सजाया जाता है। मंदिरों में पूजा होती है और परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां तथा उपहार देते हैं। स्कूलों और सामुदायिक संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही रात में आतिशबाजी भी की जाती है।
इस त्योहार की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ हिंदू समुदाय के लोग ही शामिल नहीं होते, बल्कि दूसरे धर्मों के लोग भी एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। कई जगहों पर सामूहिक आयोजन होते हैं, जिनमें भारतीय संगीत, नृत्य और खानपान की झलक देखने को मिलती है।
हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस में दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है और हिंदू समुदाय के लिए यह साल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। मॉरीशस में दीपावली की सबसे खूबसूरत परंपरा घरों को रोशनी से सजाना है। लोग अपने घरों के बाहर मिट्टी के दीये और बिजली की लाइटें लगाते हैं। रात के समय पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठता है। दीपावली के दौरान देश में सार्वजनिक अवकाश भी रहता है। यहां पारंपरिक रूप से घरों के सामने मिट्टी के तेल वाले दीपक रखे जाते थे, अब कई जगहों पर उनकी जगह सजावटी बिजली की रोशनी ने ले ली है। इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों के साथ मिठाइयां बांटते हैं। घरों में तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही रात में आतिशबाजी भी की जाती है।
फिजी: भारतीय परंपराओं के साथ राष्ट्रीय उत्सव
प्रशांत महासागर में स्थित फिजी में भी दिवाली बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। फिजी में दिवाली के दिन घरों को दीयों और बिजली की झालरों से सजाया जाता है। मंदिरों में पूजा होती है और परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां तथा उपहार देते हैं। स्कूलों और सामुदायिक संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही रात में आतिशबाजी भी की जाती है।
इस त्योहार की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ हिंदू समुदाय के लोग ही शामिल नहीं होते, बल्कि दूसरे धर्मों के लोग भी एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। कई जगहों पर सामूहिक आयोजन होते हैं, जिनमें भारतीय संगीत, नृत्य और खानपान की झलक देखने को मिलती है।
त्रिनिदाद और टोबैगो: दीवाली के मौके पर दिखती है भारतीय संस्कृति की झलक
कैरेबियाई क्षेत्र के द्वीपीय देश त्रिनिदाद और टोबैगो में भी दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है। यहां दिवाली की सबसे खास पहचान 'दिवाली नगर' है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, धर्म, संगीत और खानपान को एक मंच पर लाता है। इसमें धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रदर्शनियां, बाजार और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। यहां दिवाली से पहले कई समुदायों में नौ दिनों तक रामलीला का आयोजन किया जाता है। इसमें रामायण की घटनाओं का मंचन होता है और अंत में रावण दहन भी किया जाता है।
दिवाली के दिन परिवार घरों की सफाई करते हैं, पूजा करते हैं और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इसके बाद घरों को मिट्टी के दीयों से सजाया जाता है। लोग मिठाइयां और प्रसाद बांटते हैं। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। इस देश में दिवाली का इतिहास भारतीय प्रवासियों से जुड़ा है, जो 19वीं सदी में मजदूरों के रूप में यहां पहुंचे थे।
गुयाना: दिवाली के जरिए सामाजिक एकता का संदेश
दक्षिण अमेरिका के इस देश में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। भारतीय प्रवासियों के साथ पहुंची धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी यहां जीवित हैं। गुयाना में दिवाली के अवसर पर लोग घरों में दीये जलाते हैं और लक्ष्मी पूजा करते हैं। परिवार के लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं। कई इलाकों में सार्वजनिक रूप से रोशनी की सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
कैरेबियाई क्षेत्र के द्वीपीय देश त्रिनिदाद और टोबैगो में भी दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है। यहां दिवाली की सबसे खास पहचान 'दिवाली नगर' है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, धर्म, संगीत और खानपान को एक मंच पर लाता है। इसमें धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रदर्शनियां, बाजार और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। यहां दिवाली से पहले कई समुदायों में नौ दिनों तक रामलीला का आयोजन किया जाता है। इसमें रामायण की घटनाओं का मंचन होता है और अंत में रावण दहन भी किया जाता है।
दिवाली के दिन परिवार घरों की सफाई करते हैं, पूजा करते हैं और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इसके बाद घरों को मिट्टी के दीयों से सजाया जाता है। लोग मिठाइयां और प्रसाद बांटते हैं। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। इस देश में दिवाली का इतिहास भारतीय प्रवासियों से जुड़ा है, जो 19वीं सदी में मजदूरों के रूप में यहां पहुंचे थे।
गुयाना: दिवाली के जरिए सामाजिक एकता का संदेश
दक्षिण अमेरिका के इस देश में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। भारतीय प्रवासियों के साथ पहुंची धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी यहां जीवित हैं। गुयाना में दिवाली के अवसर पर लोग घरों में दीये जलाते हैं और लक्ष्मी पूजा करते हैं। परिवार के लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं। कई इलाकों में सार्वजनिक रूप से रोशनी की सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
विदेशों में दिवाली का उत्सव
- फोटो : एएनआई
ब्रिटेन: लीस्टर से लंदन तक धूमधाम से मनाई जाती है दिवाली
ब्रिटेन में दिवाली मनाने की परंपरा भारतीय मूल के लोगों के साथ पहुंची। आज यहां दिवाली सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो चुकी है। खासतौर पर लीस्टर और लंदन में इस त्योहार की भव्यता देखने लायक होती है।
लीस्टर को भारत के बाहर दिवाली के सबसे बड़े आयोजनों वाले शहरों में गिना जाता है। दिवाली के मौके पर शहर में संगीत, नृत्य, कला, सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, बच्चों के कार्यक्रम और खानपान से जुड़े आयोजन होते हैं। लंदन में भी दिवाली का बड़ा आयोजन होता रहा है। इसमें हिंदू, सिख और जैन समुदायों के लोग हिस्सा लेते हैं। इस दौरान संगीत, शास्त्रीय और आधुनिक नृत्य, योग, ध्यान, कठपुतली शो और भारतीय खानपान इस आयोजन का हिस्सा होते हैं।
अमेरिका: व्हाइट हाउस से न्यूयॉर्क तक मनाई जाती है दिवाली
अमेरिका में भी दिवाली का उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है, क्योंकि यहां भारतीय मूल के लाखों लोग रहते हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया, टेक्सास और वॉशिंगटन डीसी जैसे इलाकों में दिवाली के अवसर पर बड़े आयोजन होते हैं। अमेरिका में दिवाली के दौरान भारतीय समुदाय के लोग घरों में पूजा करते हैं, दीये जलाते हैं और परिवार तथा दोस्तों के साथ यह त्योहार मनाते हैं। कई शहरों में सामुदायिक मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य और भारतीय व्यंजनों के आयोजन होते हैं।
इस त्योहार की एक खास पहचान व्हाइट हाउस में होने वाले दिवाली समारोह भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर दिवाली के अवसर पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय को शुभकामनाएं देते हैं। न्यूयॉर्क समेत अमेरिका के कई शहरों में भी दिवाली के अवसर पर भारतीय समुदाय के बड़े आयोजन होते हैं। यहां सार्वजनिक स्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों पर त्योहार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ब्रिटेन में दिवाली मनाने की परंपरा भारतीय मूल के लोगों के साथ पहुंची। आज यहां दिवाली सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो चुकी है। खासतौर पर लीस्टर और लंदन में इस त्योहार की भव्यता देखने लायक होती है।
लीस्टर को भारत के बाहर दिवाली के सबसे बड़े आयोजनों वाले शहरों में गिना जाता है। दिवाली के मौके पर शहर में संगीत, नृत्य, कला, सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, बच्चों के कार्यक्रम और खानपान से जुड़े आयोजन होते हैं। लंदन में भी दिवाली का बड़ा आयोजन होता रहा है। इसमें हिंदू, सिख और जैन समुदायों के लोग हिस्सा लेते हैं। इस दौरान संगीत, शास्त्रीय और आधुनिक नृत्य, योग, ध्यान, कठपुतली शो और भारतीय खानपान इस आयोजन का हिस्सा होते हैं।
अमेरिका: व्हाइट हाउस से न्यूयॉर्क तक मनाई जाती है दिवाली
अमेरिका में भी दिवाली का उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है, क्योंकि यहां भारतीय मूल के लाखों लोग रहते हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया, टेक्सास और वॉशिंगटन डीसी जैसे इलाकों में दिवाली के अवसर पर बड़े आयोजन होते हैं। अमेरिका में दिवाली के दौरान भारतीय समुदाय के लोग घरों में पूजा करते हैं, दीये जलाते हैं और परिवार तथा दोस्तों के साथ यह त्योहार मनाते हैं। कई शहरों में सामुदायिक मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य और भारतीय व्यंजनों के आयोजन होते हैं।
इस त्योहार की एक खास पहचान व्हाइट हाउस में होने वाले दिवाली समारोह भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर दिवाली के अवसर पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय को शुभकामनाएं देते हैं। न्यूयॉर्क समेत अमेरिका के कई शहरों में भी दिवाली के अवसर पर भारतीय समुदाय के बड़े आयोजन होते हैं। यहां सार्वजनिक स्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों पर त्योहार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विदेशों में दिवाली का उत्सव
- फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)
ऑस्ट्रेलिया: दिवाली मेलों में दिखती है भारतीय संस्कृति की विविधता
ऑस्ट्रेलिया में दिवाली भारतीय समुदाय के सबसे लोकप्रिय सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। मेलबर्न, सिडनी, ब्रिस्बेन, पर्थ और एडिलेड जैसे शहरों में दिवाली के अवसर पर बड़े-बड़े मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य, बॉलीवुड संगीत, भजन, योग और ध्यान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। खाने-पीने के स्टॉल और भारतीय हस्तशिल्प के बाजार भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात: प्रवासी भारतीयों के बीच दिवाली का उत्साह
इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात में भी दिवाली का त्योहार भारतीय समुदाय के बीच मनाया जाता है। इंडोनेशिया के बाली और मेदान जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के परिवार तथा हिंदू समुदाय के लोग दीपावली के मौके पर पूजा-पाठ और पारिवारिक आयोजन करते हैं।
वहीं संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और अबू धाबी में भारतीय समुदाय की बड़ी आबादी है। दिवाली के दौरान यहां के मंदिरों, बाजारों और शॉपिंग मॉल में विशेष सजावट की जाती है। दुबई में स्थित हिंदू मंदिरों में श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं। भारतीय रेस्तरां और बाजारों में भी त्योहार का माहौल रहता है।
ऑस्ट्रेलिया में दिवाली भारतीय समुदाय के सबसे लोकप्रिय सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। मेलबर्न, सिडनी, ब्रिस्बेन, पर्थ और एडिलेड जैसे शहरों में दिवाली के अवसर पर बड़े-बड़े मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य, बॉलीवुड संगीत, भजन, योग और ध्यान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। खाने-पीने के स्टॉल और भारतीय हस्तशिल्प के बाजार भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात: प्रवासी भारतीयों के बीच दिवाली का उत्साह
इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात में भी दिवाली का त्योहार भारतीय समुदाय के बीच मनाया जाता है। इंडोनेशिया के बाली और मेदान जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के परिवार तथा हिंदू समुदाय के लोग दीपावली के मौके पर पूजा-पाठ और पारिवारिक आयोजन करते हैं।
वहीं संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और अबू धाबी में भारतीय समुदाय की बड़ी आबादी है। दिवाली के दौरान यहां के मंदिरों, बाजारों और शॉपिंग मॉल में विशेष सजावट की जाती है। दुबई में स्थित हिंदू मंदिरों में श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं। भारतीय रेस्तरां और बाजारों में भी त्योहार का माहौल रहता है।
दिवाली अलग-अलग धर्मों के लिए भी रखती है खास महत्व
दिवाली को आमतौर पर हिंदू धर्म का त्योहार माना जाता है, लेकिन इसका महत्व केवल हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है। सिख और जैन धर्म में भी यह दिन विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है।
सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस: सिख समुदाय दिवाली के दिन 'बंदी छोड़ दिवस' मनाता है। यह दिन छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई और उनके साथ 52 राजाओं की मुक्ति की स्मृति से जुड़ा है। इस अवसर पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को रोशनी से सजाया जाता है। गुरुद्वारों में कीर्तन, अरदास और लंगर आयोजित होते हैं।
जैन धर्म में महावीर निर्वाण दिवस: जैन समुदाय के लिए भी दीपावली का विशेष महत्व है। जैन परंपरा के अनुसार, इसी दिन भगवान महावीर को पावापुरी में निर्वाण प्राप्त हुआ था। जैन समुदाय इसे महावीर निर्वाण दिवस के रूप में मनाता है। इस अवसर पर धार्मिक पाठ, प्रार्थना और दीप प्रज्ज्वलन किया जाता है। दीपक जलाने की परंपरा भगवान महावीर के ज्ञान और उनके उपदेशों की रोशनी को आगे बढ़ाने का प्रतीक मानी जाती है।
आखिर कैसे भारत से पूरी दुनिया तक पहुंचा दिवाली का त्योहार?
दिवाली का दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचना मुख्य रूप से भारतीय प्रवास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़ा है। 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बड़ी संख्या में भारतीयों को मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना तथा दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में काम करने के लिए ले जाया गया था। इन भारतीय मजदूरों ने अपने साथ भाषा, खानपान, धार्मिक मान्यताओं और त्योहारों को भी आगे बढ़ाया। समय के साथ इन देशों में भारतीय समुदायों ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखा। दिवाली भी इन्हीं परंपराओं के जरिए इन देशों के समाज में अपनी जगह बनाती चली गई।
वहीं बाद के दशकों में शिक्षा, रोजगार और कारोबार के लिए भारतीयों का अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में जाना बढ़ा। इसके साथ ही दिवाली के आयोजन भी इन देशों में लोकप्रिय होते गए। आज कई देशों में दिवाली केवल भारतीय मूल के लोगों का त्योहार नहीं रह गया है, बल्कि दूसरे समुदायों के लोग भी इसमें शामिल होते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी की सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन इस त्योहार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दे रहे हैं।
दिवाली को आमतौर पर हिंदू धर्म का त्योहार माना जाता है, लेकिन इसका महत्व केवल हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है। सिख और जैन धर्म में भी यह दिन विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है।
सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस: सिख समुदाय दिवाली के दिन 'बंदी छोड़ दिवस' मनाता है। यह दिन छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई और उनके साथ 52 राजाओं की मुक्ति की स्मृति से जुड़ा है। इस अवसर पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को रोशनी से सजाया जाता है। गुरुद्वारों में कीर्तन, अरदास और लंगर आयोजित होते हैं।
जैन धर्म में महावीर निर्वाण दिवस: जैन समुदाय के लिए भी दीपावली का विशेष महत्व है। जैन परंपरा के अनुसार, इसी दिन भगवान महावीर को पावापुरी में निर्वाण प्राप्त हुआ था। जैन समुदाय इसे महावीर निर्वाण दिवस के रूप में मनाता है। इस अवसर पर धार्मिक पाठ, प्रार्थना और दीप प्रज्ज्वलन किया जाता है। दीपक जलाने की परंपरा भगवान महावीर के ज्ञान और उनके उपदेशों की रोशनी को आगे बढ़ाने का प्रतीक मानी जाती है।
आखिर कैसे भारत से पूरी दुनिया तक पहुंचा दिवाली का त्योहार?
दिवाली का दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचना मुख्य रूप से भारतीय प्रवास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़ा है। 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बड़ी संख्या में भारतीयों को मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना तथा दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में काम करने के लिए ले जाया गया था। इन भारतीय मजदूरों ने अपने साथ भाषा, खानपान, धार्मिक मान्यताओं और त्योहारों को भी आगे बढ़ाया। समय के साथ इन देशों में भारतीय समुदायों ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखा। दिवाली भी इन्हीं परंपराओं के जरिए इन देशों के समाज में अपनी जगह बनाती चली गई।
वहीं बाद के दशकों में शिक्षा, रोजगार और कारोबार के लिए भारतीयों का अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में जाना बढ़ा। इसके साथ ही दिवाली के आयोजन भी इन देशों में लोकप्रिय होते गए। आज कई देशों में दिवाली केवल भारतीय मूल के लोगों का त्योहार नहीं रह गया है, बल्कि दूसरे समुदायों के लोग भी इसमें शामिल होते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी की सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन इस त्योहार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दे रहे हैं।