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Nepal: राजनयिकों की ज्यादा दिलचस्पी यह जानने में, कौन बनेगा नेपाल का अगला राष्ट्रपति?
Sun, 11 Dec 2022 02:45 PM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 11 Dec 2022 02:45 PM IST
सार
नेपाल में चुनाव नतीजे आने के बाद विभिन्न देशों के राजनयिकों की अलग-अलग पार्टियों के नेताओं का साथ लगातार मुलाकात चल रही है। इस दौरान राजनयिकों ने नेताओं से जानना चाहा है कि देश का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा।
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नेपाल का झंडा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नेपाल में नई सरकार बनने की चल रही हलचल के बीच यहां मौजूदा विदेशी राजनयिकों की एक खास दिलचस्पी यह जानने में है कि अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा। नेपाल के राजनीतिक दलों के बीच नई सरकार बनाने की चल रही गतिविधियों के बीच राष्ट्रपति पद के सवाल पर भी चर्चा चल रही है। किसी एक दल या गठबंधन को पूर्ण बहुमत ना मिलने के कारण यह तय है कि अगली सरकार कई दलों के समर्थन से बनेगी। उनके बीच पदों का जो बंटवारा होगा, उसमें राष्ट्रपति किस दल को मिलता है, इसको लेकर यहां सियासी हलकों में अटकलों का दौर चल रहा है।
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नेपाल के संसदीय आम चुनाव में नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 275 सदस्यों के सदन में 136 सीटें मिली हैं। इस तरह अगर ये गठबंधन एकजुट बना रहा, तब भी उसे सरकार बनाने और अपना राष्ट्रपति चुनवाने के लिए कुछ छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। नेपाल के संविधान के मुताबिक हालांकि राष्ट्रपति सिर्फ देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, इसके बावजूद उन्हें स्वविवेक से निर्णय लेने के कई महत्त्वपूर्ण अधिकार मिले हुए हैं। यहां राजनयिक हलकों में चर्चा है कि राजनीतिक अस्थिरता की परंपरा वाले नेपाल में संसद के कार्यकाल के अंदर ही सरकारें बदलती रहती हैं। इसके बीच राष्ट्रपति ही एक ऐसे अधिकारी होते हैं, जिनके बारे में यह मान कर चला जाता है कि वे पांच साल अपने पद पर रहेंगे। इस तरह अस्थिरता के बीच उन्हें उन्हें एक स्थिरता के पहलू के रूप में देखा जाता है।
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चुनाव नतीजे आने के बाद यहां विभिन्न देशों के राजनयिकों की अलग-अलग पार्टियों के नेताओं का साथ लगातार मुलाकात चल रही है। इस दौरान राजनयिकों ने नेताओं से जानना चाहा है कि देश का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला के करीबी एक नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘राष्ट्रपति का पांच साल का तय कार्यकाल है। इसलिए राजनयिक यह जानना चाहते हैं कि नया राष्ट्रपति कौन होगा। बातचीत के दौरान राजनयिकों ने सलाह दी है कि यह पद वैसे नेता को मिलना चाहिए, जिसे संविधान की गहरी जानकारी हो, लेकिन जो संविधान को लेकर प्रयोग ना करे।
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नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद नई व्यवस्था के तहत राम बरन यादव 2006 में पहले राष्ट्रपति बने थे। साल 2009 में उन्होंने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल को सेनाध्यक्ष रूकमांगुड कोतवाल को बर्खास्त नहीं करने दिया। उन्होंने कोतवाल को बर्खास्त करने के दहल सरकार के फैसले को पलट दिया था। इससे तब संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। इसी तरह वर्तमान राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने इस वर्ष संसद से दो बार पारित हुए नागरिकता कानून पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक नेपाल में राष्ट्रपतियों की ऐसी राजनीतिक सक्रियताओं ने इस पद में राजनयिकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के उप महासचिव चंद्रदेव भट्ट ने कहा- ‘नेपाल की राजनीति में विदेशी दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। इसलिए यह संभव है कि फिलहाल उनकी दिलचस्पी अगले राष्ट्रपति को लेकर हो, जो पांच साल तक अपने पद पर रहेंगे। जबकि इस बीच कई प्रधानमंत्री आ और जा सकते हैं।’