फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Dinosaurs did not end because of Deccan Valley volcanic eruptionsm, they died due to meteorites

दक्कन घाटी के ज्वालामुखी विस्फोट से नहीं, उल्कापिंडों के चलते खत्म हुए डायनासोर

Sat, 18 Jan 2020 02:54 AM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Sat, 18 Jan 2020 02:54 AM IST
विज्ञापन
Dinosaurs did not end because of Deccan Valley volcanic eruptionsm, they died due to meteorites
प्रतीकात्मक तस्वीर

अब तक यह माना जाता है कि दक्कन की घाटी में ज्वालामुखियों के चलते डायनासोर खत्म हुए, लेकिन एक नए अध्ययन में बताया गया है कि उल्कापिंडों के चलते ऐसा हुआ। अध्ययन के मुताबिक डायनासोर के विलुप्त होने में ज्वालामुखियों की कोई भूमिका नहीं थी।

विज्ञापन


वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्वालामुखियों से कई तरह की गैसें निकलती हैं और इन्हीं गैसों के कारण डायनासोर पूरी तरह खत्म हो गए, लेकिन साइंस जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन में कहा गया है कि ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं डायनासोर के खत्म होने से काफी पहले हुईं।
विज्ञापन


लावा के विस्फोट का किया अध्ययन
अध्ययन के प्रमुख लेखक और येल यूनिवर्सिटी के पिन्सेली हल ने बताया कि ज्वालामुखी से कार्बन डाईऑक्साइड और सल्फर डाईऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं जो वातावरण को अम्लीय बना देते हैं। इससे प्रजातियों के सामूहिक खात्मे की आशंका होती है, लेकिन इस अध्ययन में हमने गैसों के निकलने से ज्यादा लावा के विस्फोट पर ध्यान केंद्रित किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अध्ययन के अनुसार दक्कन की घाटी में ज्वालमुखी हलचलों से से वातावरण पर जो प्रभाव पड़ा, वह प्रजातियों के सामूहिक खात्मे से पहले की घटना है। करीब 6 करोड़ 60 लाख साल पहले क्त्रिस्टेशियस-पेलोजेन की धटना हुई थी जिसमें पृथ्वी पर मौजूद पौधों और जानवरों की करीब तीन-चौथाई प्रजातियां खत्म हो गई थीं। ज्वालामुखी विस्फोट इससे पहले हुए थे और डायनासोर के जीवन पर इसका कोई असर नहीं था।

वैश्विक तापमान में बदलाव का विश्लेषण
इस तथ्य का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने वैश्विक तापमान में बदलाव और उस समय के जलीय जीवाश्मों में कार्बन के स्तर का आकलन कर ज्वालामुखी से निकली गैसों की टाइमिंग का पता लगाया।  फिर, मौजूदा वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड के असर से इसकी तुलना की और बताया कि गैसों के निकलने की घटना उल्कापिंडों से काफी पहले हुई थी। 

अध्ययन के सह लेखक माइकल हेनेहन ने कहा , ज्वालामुखियों के प्रभाव से वैश्विक तापमान में करीब 2 डिग्री का इजाफा हुआ, लेकिन इससे प्रजातियां खत्म नहीं हुईं। कई प्रजातियां उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव की ओर चली गईं लेकिन उल्कापिंडों की घटना से पहले लौट आई थीं।


अध्ययनकर्ताओं ने यह भी बताया कि डायनातोर के खत्म होने के बाद ज्वालामुखी विस्फोटों से दक्कन घाटी में पारिस्थितिकी तंत्र बदल गया जिससे नई प्रजातियों का जीवन आसान हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed