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मोदी-जिनपिंग बैठक से रिश्ते बनेंगे बेहतर, पाक का चीन पर निर्भर होना चिंता: ध्रुव जयशंकर

Thu, 10 Oct 2019 10:18 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 10 Oct 2019 10:18 AM IST
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Dhruva Jaishankar says Modi-Jinping informal summit is not to achieve specific deliverables
ध्रुव जयशंकर (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान मंगलवार को दो दिन के दौरे पर चीन पहुंचे जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका स्वागत किया। अब 11-12 अक्तूबर को जिनपिंग दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आने वाले हैं। यहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई मु्द्दों पर बात करेंगे। वह शुक्रवार को चेन्नई के महाबलिपुरम पहुंचेंगे। जिसके लिए तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही हैं। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि अनौपचारिक बैठक में जिनपिंग और मोदी व्यापार और सुरक्षा को लेकर बातचीत नहीं करेंगे बल्कि दोनों नेताओं की वार्ता का केंद्र बिंदु द्वीपक्षीय रिश्तों को मजबूत बनाना होगा। वाशिंगटन में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के निदेशक ध्रुव जयशंकर ने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत सरकार पहले से ही स्पष्ट है कि इस अनौपचारिक शिखर सम्मेलन का उद्देश्य विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करना नहीं बल्कि रिश्तों को बेहतर बनाना है।'
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उन्होंने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा में व्यापार संबंधों पर ठोस चर्चा होने की संभावना नहीं है। जयशंकर ने सालों से भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रतिबिंबित किए जाने वाले व्यापार घाटे पर प्रकाश डाला जिसमें बाजार पहुंच के मुद्दे भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कैसे इसने अन्य चीजों को भी प्रभावित किया है, जैसे कुछ सामानों पर भारतीय टैरिफ बढ़ाने या क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी के लिए भारत की बातचीत को जटिल बनाना। इस प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते में चीन और भारत सहित 16 देश शामिल हैं।

जयशंकर ने कहा, 'सवाल यह है कि भारत इस घाटे को कम करने के लिए चीन को क्या निर्यात कर सकता है और क्या अन्य कारक प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं? इस तरह के संरचनात्मक बदलावों को छोड़कर, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स या अन्य उत्पादों पर मामूली व्यापार रियायतें गहरे घाटे को दूर करने के लिए काफी नहीं है।'

क्षेत्र में भारत-चीन के संबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओआरएफ के निदेशक ने जोर देते हुए कहा कि एक पड़ोसी होने के नाते पाकिस्तान की कम्युनिस्ट देश चीन पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय है। जिसका भारत के लिए प्रतिकूल रणनीतिक निहितार्थ हो सकते हैं।


भारत ने बुधवार को उन रिपोर्ट्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी जिसमें कहा गया था कि इमरान खान और शी जिनपिंग ने कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की है। भारत ने कहा, 'चीन हमारी स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है। किसी भी अन्य कदेश को भारत के आंतरिक मामलों पर प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए।'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने उन रिपोर्ट्स को देखा है जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक को लेकर लिखा गया है। साथ ही जिसमें कहा गया है उन्होंने कश्मीर पर चर्चा की। खान एक साल के अंदर तीसरी बार चीन पहुंचे और उन्होंने फिर वहां कश्नीर राग को अलापा।

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