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Hindi News ›   World ›   Developed economies will be able to get back on track only by 2024 developing countries' economies will be left behind by five percent Latest News Update

Davos: गोपीनाथ बोलीं- विकसित अर्थव्यवस्थाएं 2024 तक ही पटरी पर लौट सकेंगी, जानें रूस से तेल लेने पर क्या बोले पीयूष गोयल

Thu, 26 May 2022 01:29 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दावोस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दावोस Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 26 May 2022 01:29 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रथम उप-प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ ने बुधवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक सुधार को बड़ा झटका लगा है। इस कारण हमारे सामने वैश्विक वृद्धि दर में गंभीर गिरावट का संकट खड़ा हो गया है। 

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Developed economies will be able to get back on track only by 2024 developing countries' economies will be left behind by five percent Latest News Update
गीता गोपीनाथ और पीयूष गोयल - फोटो : Twitter

विस्तार

महामारी से बुरी तरह प्रभावित दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं धीरे-धीरे सुधार की ओर लौट रही हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाएं 2024 तक उस स्तर पर लौट जाएंगी, जहां उन्हें महामारी नहीं होने की स्थिति में पहुंचना था। हालांकि, सुधार की दौड़ में विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं 5 फीसदी पीछे रह जाएंगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रथम उप-प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ ने बुधवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक सुधार को बड़ा झटका लगा है। इस कारण हमारे सामने वैश्विक वृद्धि दर में गंभीर गिरावट का संकट खड़ा हो गया है। 

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विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक में उन्होंने कहा कि विभिन्न हालातों की वजह से दुनिया को लगातार विपरीत हालात से जूझना पड़ रहा है। दुनियाभर में ईंधन और भोजन समेत कमोडिटी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।
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महंगाई पर काबू पाने का प्रयास 
गोपीनाथ ने कहा कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक उच्च महंगाई पर काबू करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी करनी पड़ रही है। इससे वैश्विक वित्त और कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर भी प्रभावित होगी क्योंकि दुनियाभर में सुधार विविध प्रकार से हो रहा है। 
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रूस से तेल लेने पर बोले पीयूष गोयल
दावोस में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से जब पूछा गया कि क्या भारत रूसी आयात के लिए रूबल में भुगतान करेगा या नहीं तो उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश को अपने राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना होता है। हमारे हित या जरूरत यूरोपीय देशों से अलग नहीं हैं।

आगे उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं के लिए विविध स्रोतों को देखा। वर्तमान स्थिति में, जब मुद्रास्फीति सर्वकालिक उच्च स्तर पर है, जिससे दुनिया भर के लोगों को तनाव हो रहा है, यूरोपीय संघ और यूरोपीय देश भारत की तुलना में बड़ी मात्रा में खरीदना जारी रखे हैं।

दावोस में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हम कभी भी रूस से पेट्रोलियम उत्पादों के बहुत बड़े आयातक नहीं रहे हैं। कोई भी सुझाव कि भारत रूस से आयात बढ़ा रहा है या इस स्थिति में योगदान दे रहा है, जांच के लायक नहीं है। 

गेहूं निर्यात पर पाबंदी से वैश्विक बाजार पर असर नहीं
भारत के गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध से वैश्विक बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत का गेहूं निर्यात विश्व व्यापार के मुकाबले एक फीसदी से भी कम है और खाद्यान्न के निर्यात को विनियमित करने के सरकार के फैसले का वैश्विक बाजारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

हालांकि, भारत कमजोर देशों और अपने पड़ोसियों को निर्यात की अनुमति देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय गेहूं बाजार में ‘कभी भी’ एक पारंपरिक भागीदार नहीं था। दो साल पहले तक भारत ने गेहूं का निर्यात भी नहीं किया था। उन्होंने आगे कहा, इस साल उत्पादन करीब 7-8 फीसदी बढ़ने का अनुमान था, लेकिन उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी के कारण गेहूं की कटाई जल्दी करनी पड़ी। इससे गेहूं के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। 

तेल के आयात के लिए रुपया-रूबल भुगतान प्रणाली तलाश रही भारत सरकार: सूत्र
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनजर, भारत सरकार मास्को से तेल के आयात के लिए एक भुगतान प्रणाली तलाश रही है। रूस पर लागू प्रतिबंधों के साथ ही स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की गुंजाइश व्यापार को जारी रखने के एक माध्यम से आगे बढ़कर द्विपक्षीय व्यापार को विस्तार देने तक पहुंच गया है।

सूत्रों ने कहा, ‘‘हमने यूरोप द्वारा रूबल में भुगतान के बारे में सुना है। अतीत में भारत के पास रुपया-रूबल भुगतान प्रणाली थी। मुझे नहीं लगता कि हम अब तक किसी नतीजे पर पहुंचे हैं। कुछ चर्चाएं चल रही हैं।’’


भारत में सामान्य हो गया है जीवन
आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला का कहना है कि महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इनमें से कुछ चिंताओं को अन्य स्रोत देशों में संभावनाएं तलाश कर दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में जीवन अब सामान्य हो गया है। मेरा मानना है कि हमें वैश्वीकरण से अलग हटकर कुछ नहीं सोचना चाहिए क्योंकि पूरी तरह स्थानीयकरण संभव नहीं है। खासतौर पर इसकी उपभोक्ताओं पर लागत को देखते हुए ऐसा करना मुमकिन नहीं है।

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