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एशियाई विरोधी बयान पर अमेरिका में बवाल: भारतीयों-चीनी समुदाय पर टिप्पणी से घिरे ट्रंप, US संसद में विरोध तेज

Sat, 23 May 2026 02:24 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Pavan Updated Sat, 23 May 2026 02:24 AM IST
सार

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय और चीनी मूल के लोगों पर विवादित बयान को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने संसद में निंदा प्रस्ताव पेश किया। नेताओं ने ट्रंप पर नस्लवादी भाषा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। भारत ने भी बयान को 'अनुचित और खराब स्वाद वाला' बताया।

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Democrat lawmakers move House resolution condemning Trump’s remarks targeting Asians
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के एशियाई समुदाय पर दिए गए विवादित बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है। अमेरिकी संसद (हाउस) में डेमोक्रेट नेताओं ने एक प्रस्ताव लाकर ट्रंप के बयानों की कड़ी निंदा की है। वॉशिंगटन में डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति, टेड लियू और प्रमिला जयपाल ने यह प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में कहा गया कि ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक ऐसे पोस्ट को शेयर किया, जिसमें भारतीय और चीनी मूल के लोगों के खिलाफ 'नस्लवादी और अपमानजनक' भाषा का इस्तेमाल किया गया था।
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भारत-चीन के लोगों को लेकर की थी आपत्तिजनक शब्द
दरअसल, ट्रंप ने रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के शो के एक हिस्से को साझा किया था, जिसमें जन्म से नागरिकता पर टिप्पणी करते हुए भारत और चीन के लोगों को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहे गए थे। इस बयान में यह तक कहा गया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर अपने पूरे परिवार को भारत या चीन जैसे देशों से बुला लेता है। भारत ने भी इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'अज्ञानता से भरा, अनुचित और खराब स्वाद वाला' बताया।
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डेमोक्रेट सांसदों के इस प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि सभी पृष्ठभूमि के प्रवासी (इमिग्रेंट) अमेरिका की ताकत हैं और देश के भविष्य में उनका अहम योगदान है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि इस तरह की भाषा एशियाई समुदाय के खिलाफ पहले से बढ़ रही नफरत और हिंसा को और बढ़ा सकती है।


प्रस्ताव पेश करने वाले डेमोक्रेट्स ने क्या कहा?
सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि जब राष्ट्रपति खुद इस तरह के नस्लवादी बयान को बढ़ावा देते हैं, तो यह बेहद खतरनाक संदेश देता है, खासकर उस समय जब एशियाई समुदाय पहले ही भेदभाव का सामना कर रहा है। वहीं टेड लियू ने कहा कि अमेरिका के इतिहास में एशियाई मूल के लोगों को अक्सर 'बाहरी' समझा गया है, चाहे वे कितने भी समय से वहां रह रहे हों या कितना योगदान दे रहे हों। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच आज भी खत्म नहीं हुई है। प्रमिला जयपाल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा इस तरह के 'घृणित और नफरत फैलाने वाले' बयान को बढ़ावा देना बेहद चिंताजनक है और इससे समाज में पहले से मौजूद नफरत और भड़क सकती है। 

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प्रस्ताव को मिला नागरिक अधिकार संगठनों का समर्थन
नागरिक अधिकार संगठनों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इस तरह की भाषा केवल शब्द नहीं होती, बल्कि इससे समाज में पूर्वाग्रह, भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा मिलता है। कुल मिलाकर, यह मामला अब अमेरिका की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां एक तरफ ट्रंप के बयान पर तीखी आलोचना हो रही है, वहीं डेमोक्रेट नेता इसे नस्लवाद और सामाजिक विभाजन से जोड़कर देख रहे हैं।
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