रक्षा साझेदारी: चीन पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति में भारत बन रहा अहम ताकत, US सेना का बड़ा बयान
चीन की बढ़ती चुनौती के बीच अमेरिका भारत को इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम साझेदार मान रहा है। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो ने कहा कि भारत के साथ रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, रक्षा सौदे, समुद्री सुरक्षा सहयोग और क्वाड के जरिए तालमेल बढ़ा है।
विस्तार
चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके विस्तारवादी रुख के बीच भारत अब अमेरिका की रणनीति का एक अहम स्तंभ बनकर उभर रहा है। अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने साफ कहा है कि नई दिल्ली के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग वॉशिंगटन की प्राथमिकताओं में शामिल है और दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं।
भारत के साथ जुड़ाव अमेरिका की प्राथमिकता में शामिल
अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो ने अमेरिकी सांसदों से कहा कि भारत के साथ जुड़ाव उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और यह अमेरिका की सबसे सक्रिय सैन्य साझेदारियों में से एक है। पापारो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सुरक्षा, खुफिया साझेदारी और अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ा है।
MQ-9B ड्रोन खरीद योजना का जिक्र
पापारो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सुरक्षा, खुफिया साझेदारी और अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ा है।उन्होंने भारत द्वारा MQ-9B ड्रोन खरीद योजना का भी जिक्र किया। यह ड्रोन लंबी दूरी की निगरानी, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति को लेकर क्या कहा?
उन्होंने भारत को दक्षिण एशिया में स्थिरता का स्रोत बताया। पापारो के अनुसार, भारत न केवल अपने क्षेत्र में संतुलन बनाए हुए है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भी अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत कर रहा है। पापारो ने श्रीलंका में भारत के निवेश और मॉरीशस के साथ हुए समझौतों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि इन कदमों का मकसद समुद्री सहयोग बढ़ाना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को प्रतिकूल शक्तियों के प्रभाव से मुक्त रखना है।
क्वाड में भारत की भूमिका अहम
अमेरिकी कमांडर ने क्वाड में भारत की भूमिका को भी अहम बताया। इस समूह में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह मंच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और संतुलित व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मालाबार सैन्य अभ्यास जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास चारों देशों के बीच तालमेल बढ़ाने, तकनीकी क्षमता साझा करने और संयुक्त सैन्य तैयारी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
चीन-रूस और उत्तर कोरिया को लेकर दी चेतावनी
पापारो ने चेतावनी दी कि चीन की सैन्य गतिविधियां, साथ ही रूस और उत्तर कोरिया के साथ उसके गहरे होते संबंध, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जटिल चुनौती पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए उसके सहयोगी देश और साझेदार ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ लगातार तनाव का सामना करना पड़ता है, जहां हाल के सैन्य तनाव पारंपरिक विवादित क्षेत्रों से आगे तक पहुंचे हैं। इसके बावजूद भारत का मुख्य ध्यान क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत प्रतिरोधक क्षमता और विश्वसनीय सैन्य तैयारी बनाए रखने पर है।
सुनवाई के दौरान अमेरिकी सांसद एडम स्मिथ ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भरोसा बनाए रखने के लिए साझेदार देशों के साथ मजबूत रिश्ते बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने सहयोगियों को यह भरोसा दिलाना होगा कि जरूरत पड़ने पर वह उनके साथ खड़ा रहेगा।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.