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जर्मनी-फिलीपींस: दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच रक्षा समझौता, दोनों देशों के मंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

Mon, 05 Aug 2024 07:07 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 05 Aug 2024 07:07 AM IST
सार

फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा सचिव गिल्बर्टो टेओडोरो ने कहा, संघर्ष का केवल एक ही कारण है दक्षिण चीन सागर। यह चीन का अवैध और एकतरफा प्रयास है कि वह दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर ले। फिलीपींस चीन को उकसा नहीं रहा है। हम युद्ध नहीं चाहते हैं।

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Defense pact signed between Germany and Philippines amid rising tension in South China Sea
जर्मनी और फिलीपींस ने रक्षा समझौता किया - फोटो : ANI/ X@dndphl

विस्तार

दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा सचिव गिल्बर्टो टेओडोरो और जर्मन संघीय रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने रक्षा समझौता पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान दोनों ने अपने-अपने रक्षा बलों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने दावा किया कि वह दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी दावों का विरोध करते हैं। 

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टेओडोरो और पिस्टोरियस दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए मनीला में आयोजित बैठक में शामिल हुए। इस दौरान प्रतिनिधियों ने अपने सशस्त्र बलों के बीच दीर्घकालिक संबंध स्थापित करने में रुचि दिखाई। साथ ही रक्षा प्रशिक्षण, द्विपक्षीय आदान-प्रदान और संयुक्त परियोजनाओं में शामिल होने का भी आह्वान किया। 
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मनीला और बर्लिन द्वारा यह कदम अमेरिका द्वारा फिलीपीन सेना आधुनिकीकरण के लिए 500 मिलियन डॉलर के सैन्य वित्तपोषण की घोषणा के कुछ ही दिनों के भीतर उठाया गया है। वहीं, दावा किया गया है कि पिस्टोरियस की फिलीपींस यात्रा किसी जर्मन रक्षा मंत्री द्वारा आयोजित पहली यात्रा थी। 
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बैठक के बाद एक प्रेस मीटिंग के दौरान टेओडोरो ने कहा, संघर्ष का केवल एक ही कारण है दक्षिण चीन सागर। यह चीन का अवैध और एकतरफा प्रयास है कि वह दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर ले। फिलीपींस चीन को उकसा नहीं रहा है। हम युद्ध नहीं चाहते हैं, फिर भी हम न केवल अपने संविधान द्वारा बल्कि अपने देशवासियों के प्रति दायित्व के रूप में भी उन सभी क्षेत्रों की रक्षा करने के लिए बाध्य हैं। 

इसके अलावा, पिस्टोरियस  ने कहा कि यह निर्णय बिना किसी अपवाद के वैध है। समुद्री व्यवस्था को मजबूत करना हमारा दायित्व है। हमारी प्रतिबद्धताएं और जुड़ाव किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि हम नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने, नौवहन की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने और व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, देशों को चीन सहित संचार के सभी चैनल खुले रखकर तनाव कम करने के प्रयासों में योगदान देना चाहिए। 


बता दें कि हाल ही में दक्षिण चीन सागर में बीजिंग और मनीला के बीच तनाव बढ़ गया है। चीन वर्तमान में दक्षिण चीन सागर के अधिकांश क्षेत्र पर अपना अधिकार होने का दावा करता है, लेकिन चीन के इस दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने 2016 में एक निर्णय दिया था, जिसमें स्पष्ट किया था कि इस क्षेत्र पर चीन के दावों का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) पर आधारित था। हालांकि, चीन ने इसे अस्वीकार कर दिया। 

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