फैनी से 12 लाख लोगों को बचाने में मिली कामयाबी, संयुक्त राष्ट्र ने की भारत की तारीफ
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फैनी तूफान से पहले तैयारियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारत सरकार की तारीफ की है। आपदा के खतरों से जुड़ी यूएन की एजेंसी (ओडीआरआर) के प्रवक्ता डेनिस मैक्लीन ने कहा कि सरकार की जीरो कैजुएलिटी पॉलिसी और भारतीय मौसम विभाग की सटीक भविष्यवाणी की बदौलत समय रहते 11 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया और तूफान से मौतों की संख्या कम रही। भारत ने 2013 में आए तूफान के बाद पॉलिसी पर काम शुरू किया था।
भारत में पिछले 20 साल में आए इस सबसे भयंकर तूफान ने ओडिशा में कम से कम आठ लोगों की जान ले ली। तीर्थस्थल पुरी में समुद्र तट के पास स्थित इलाके और अन्य स्थान भारी बारिश के बाद जलमग्न हो गए जिससे राज्य के करीब 11 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
भारतीय मौसम विभाग ने फैनी को 'अत्यंत भयावह चक्रवाती तूफान' की श्रेणी में रखा है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां फैनी की गति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में रह रहे परिवारों को बचाने के इंतजाम कर रही हैं। यह तूफान पश्चिम बंगाल में दस्तक देने के बाद बांग्लादेश पहुंचेगा जिसे अलर्ट पर रखा गया है।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि मामी मिजुतोरी ने कहा, 'अत्यंत प्रतिकूल स्थितियों के प्रबंधन में भारत का हताहतों की संख्या बेहद कम रखने का दृष्टिकोण, रूपरेखा के क्रियान्वयन में और ऐसी घटनाओं में अधिक जिंदगियां बचाने में बड़ा योगदान है।'
45 हजार कर्मचारियों ने संभाले हालात
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बताया कि पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 1.2 मिलियन लोगों को निकाला गया। जिसमें से 3.2 लाख गंजम से 1.3 लाख पुरी से और करीब 7000 रसोईघरों और 9000 शेल्टर का इंतजाम किया गया। उन्होंने बताया कि इस काम में 45,000 से ज्यादा वॉलंटियर लगे हुए थे।
ओडिशा और केंद्र सरकार के तमाम संबंधित विभाग फैनी से निपटने के लिए तैयार थे। करीब 10 लाख लोगों पर इसका असर होता। आपदा प्रबंधन के 1 हजार प्रशिक्षित कर्मचारी खतरे की आशंका वाली जगहों पर भेजे गए। 300 हाईपावर बोट हर पल तैनात रहीं। टीवी, कोस्टल साइरन और पुलिस के अलावा हर उस साधन का उपयोग किया गया जो आमजन की सुरक्षा के लिए जरूरी था। इसके लिए उड़िया भाषा का ही इस्तेमाल किया गया। संदेश साफ था- तूफान आ रहा है, शिविरों में शरण लें।
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