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64 दिन में जीती वायरस से जिंदगी की जंग, लेकिन गवां दीं अंगुलियां, दिल दहलाने वाली आपबीती

Sat, 08 Aug 2020 10:14 AM IST
संदीप भट्ट अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन
अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन Published by: संदीप भट्ट Updated Sat, 08 Aug 2020 10:14 AM IST
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सार
  • आपबीती : अचानक तबीयत बिगड़ी तो पता चला कोरोना है
  • 31 दिन तक अस्पताल में वेंटिलेटर पर भी रहे ग्रेग गारफील्ड
  • कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान से काली पड़ी अंगुलियां
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COVID-19 survivor Gregg Garfield loses fingers after complications from disease
ग्रेग गारफील्ड - फोटो : social media

विस्तार

कोरोना से शरीर के भीतरी अंगों को ही नहीं बाहरी अंगों को भी बड़ा नुकसान हो सकता है। मैं ग्रेग गारफील्ड (54) कैलिफोर्निया के स्टूडियो सिटी में रहता हूं। फरवरी में स्कीइंग के लिए इटली गया था। रास्ते में ही तबीयत बिगड़ गई और वापस लौटा और बरबैंक के जोसेफ अस्पताल पहुंचा तो कोरोना की पुष्टि हुई। इसके बाद 31 दिन तक वायरस से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ता रहा। कुल 64 दिन अस्पताल में रहा। अब ठीक हो चुका हूं, लेकिन मेरी हाथों की अंगुलिया कोरोना वायरस ने निगल ली हैं। बाएं हाथ की अंगुलिया बीच से कट चुकी हैं और अंगूठे का केवल पांच फीसदी हिस्सा है। दाहिने हाथ की भी अंगुलिया काटी गई हैं, बस अंगूठे का कुछ हिस्सा बच गया है।

कोरोना से अंगुलियों को नुकसान कैसे

ग्रेग की यह आपबीती दिल को दहलाने वाली है। ग्रेग का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि वायरस फेफड़ों, किडनी, हृदय के साथ हाथ-पैरों को भी खराब कर सकता है। ग्रेग के मामले भी ऐसा ही हुआ, जो हैरान करने वाला है। वायरस से ग्रेग के हाथ की कोशिकाओं और ऊतकों को अधिक नुकसान हुआ, जिस कारण वो काली पड़ गई। शरीर कि किसी हिस्से में अमूमन कालापन तब पड़ता है, जब उसके आसपास की कोशिकाएं पूरी तरह मर जाती हैं।

अंगुलियों तक नहीं पहुंच पा रहा था खून

ग्रेग के मुताबिक, मैं वेंटिलेटर पर था। हाथों की अंगुलियों तक खून नहीं पहुंच पा रहा है। इस कारण अंगुलियां काली पड़ रही हैं। डॉक्टरों ने एक्मो सपोर्ट पर रखा, जिससे अंगुलियों तक खून पहुंच सके और फेफड़ों के साथ हृदय को आराम मिल सके लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वायरस ने अंगुलियों तक जाने वाले खून के रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसे कोई ठीक नहीं कर सकता था।

किसी के भी साथ हो सकता है

ग्रेग कहते हैं, वायरस को मजाक में मत लें। उन्हें भी शुरुआत में कोई लक्षण नहीं था। वे कुछ समय पहले फिट थे, पहाड़ की चोटियां चढ़ते थे, बाइक चलाते, गोल्फ खेलते थे, कार रेसिंग करते लेकिन अब सब कुछ गुजरे जमाने की बात हो गई है। वे कहते हैं, ऐसा किसी के साथ हो सकता है। इसलिए सावधान रहें और मास्क पहनकर रखें। इलाज करने वाले डॉक्टर कहते हैं, वे बच गए ये किसी जादू से कम नहीं है, सबके साथ ऐसा नहीं होता है।

 

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