{"_id":"6ab3499feb71e6d2240aab10","slug":"81st-unga-highlights-nepal-pm-balen-shah-first-attendance-guterres-macron-trump-india-and-others-who-said-what-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"81वां यूएनजीए सत्र: नेपाल के बालेन शाह पहली बार शामिल होंगे, गुटेरेस से मैक्रों तक के वक्तव्य; किसने क्या कहा?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
81वां यूएनजीए सत्र: नेपाल के बालेन शाह पहली बार शामिल होंगे, गुटेरेस से मैक्रों तक के वक्तव्य; किसने क्या कहा?
Wed, 23 Sep 2026 09:08 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 23 Sep 2026 09:08 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक के दौरान गाजा संकट पर कई देशों के नेताओं ने चिंता जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अलावा फ्रांसिसी समकक्ष मैक्रों, यूएन महासचिव गुटेरेस ने भी दुनियाभर में हो रही हिंसा और टकराव को लेकर चिंता जताई। इस खबर में यूएनजीए में भाषणों की झलकियां
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र महासभा (फाइल)
- फोटो : यूएन टीवी
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 81वीं बैठक में कई अहम मुद्दों पर भाषण दिए जा रहे हैं। पहले दिन भारत ने यूरोपीय संघ समेत छह देशों के साथ मिलकर मोर्चा बनाने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शांति खतरे में होने के कारण बहुध्रुवीय व्यवस्था बड़ी जरूरत है। दूसरे दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की तरफ से ईरान को खुली दमकी देने के बाद वार्ता की बात कहते हुए सबको चौंका दिया।
विज्ञापन
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह यूएन में उठाएंगे जलवायु संकट का मुद्दा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में भाग लेने के लिए 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका रवाना हो गए हैं। वह 24 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे और 26 सितंबर को स्वदेश लौटेंगे। यह पद संभालने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में एक दल रविवार को पहले ही न्यूयॉर्क पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री शाह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष नेपाल के प्राथमिकता वाले मुद्दे उठाएंगे। उनके संबोधन में नेपाल के बढ़ते जलवायु संकट, जलवायु न्याय और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया जाएगा। सरकार इस मंच से नेपाल की जलवायु और विकास संबंधी चिंताओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करेगी। 26 अगस्त को रासुवा जिले में आई बाढ़ से 1,400 से अधिक लोग मारे गए और 6,000 से अधिक लापता हैं।
विज्ञापन
यूएन के मंच पर अमेरिका का रुख क्या?
ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में मुलाकात की। हालांकि, ईरान ने इसका खंडन किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के तुरंत बाद ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर लगभग सात महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ तो वह इस्लामी गणराज्य को "नष्ट" कर देंगे। ट्रंप ने पत्रकारों को बैठक के बारे में बताया, लेकिन बातचीत के बिंदुओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
विज्ञापन
ट्रंप बोले- ईरान के हमले चिंताजनक, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का किया समर्थन
सभा में संबोधन के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के पड़ोसी देशों में व्यापारिक जहाजों पर आतंकवादी हमलों से साफ हो चुका है कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना को ईरानी चौकियों से दूर रखना जरूरी है। इसलिए उनका प्रशासन इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEEEC) और तेल निकालने के अन्य तरीकों, जैसे पाइपलाइन, का दृढ़ता से समर्थन करता है। ट्रंप ने कहा कि वे दशकों से इस क्षेत्र को परेशान करने वाली चुनौतियों को दूर करने के कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरान समझौते पर मध्यस्थों से मुलाकात की। ट्रंप ने शील्ड ऑफ द अमेरिकाज की दूसरी बैठक में शामिल होने पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने इसे पश्चिमी गोलार्ध में आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा और शक्तिशाली गठबंधन बताया।
ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र से बाहर निकला
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेहरान के खिलाफ सैन्य हमलों पर बोलने के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र महासभा से बाहर निकल गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में अमेरिकी सैन्य अभियानों का विषय उठाया। तेहरान का प्रतिनिधित्व कर रहे राजनयिक अचानक महासभा हॉल से बाहर निकल गए। रिपोर्ट में बताया गया कि उनके पीछे केवल एक निचले स्तर का कर्मचारी बचा था। अल जजीरा ने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी न्यूयॉर्क में हैं। वे उच्च-स्तरीय वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के भाषण के दौरान दोनों नेता ईरान के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ नहीं बैठे थे।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों क्या बोले?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में गाजा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव पर विश्व नेताओं ने चिंता व्यक्त की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गाजा की स्थिति को "शर्मनाक" बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। मैक्रों ने पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को प्राथमिकता बताया। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने खाड़ी क्षेत्र को अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण "सबसे खतरनाक दौर" में बताया। उन्होंने राजनयिक समाधान पर जोर दिया। जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II ने गाजा में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इस्राइल पर युद्ध लंबा खींचने और वेस्ट बैंक में "वास्तविक विलय" का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दो-राज्य समाधान को स्थायी शांति का एकमात्र विश्वसनीय मार्ग बताया।
अमेरिका में मैक्रों-ट्रंप मुलाकात, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर चर्चा
न्यूयॉर्क पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। एबीसी न्यूज से बात करते हुए मैक्रों ने कहा, मुख्य लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए समझौता खोजना है, ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान हो सके। मैक्रों ने युद्ध शुरू करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बमबारी से शासन बदलना संभव नहीं है और यह अतीत में कई बार की गई गलती है। इसके अलावा एक्स पर एक पोस्ट में मैक्रों ने कहा कि विश्व के संकट हमारी सीमाओं पर नहीं रुकते, वे हमारी सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि फ्रांस शांति, संप्रभुता और सहयोग का पक्षधर है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने पश्चिम एशिया में हिंसा पर जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को यूएनजीए में विश्व नेताओं से अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनयिक निष्क्रियता और कमजोर युद्धविराम पश्चिम एशिया की निर्दोष आबादी की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। एक्स पर एक बयान में, यूएन प्रमुख ने हिंसा के तेजी से फैलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष फैल रहे हैं। तथाकथित युद्धविराम 'छोटे युद्धों' जैसे ही हैं, जहां नागरिक लगातार कीमत चुका रहे हैं। मानवीय जीवन पर लगातार हो रहे नुकसान पर निराशा व्यक्त करते हुए गुटेरेस ने कहा, "बहुत हो गया।" उन्होंने न्यूयॉर्क में विदेश मंत्रियों, राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय दूतों से यूएनजीए के मंच का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने नेताओं से यूएनजीए के दौरान तनाव कम करने और संवाद के लिए अधिकतम प्रयास करने की अपील की।
न्यूयॉर्क में भारत-अमेरिका गोलमेज: एआई अर्थव्यवस्था और डिजिटल अवसंरचना पर चर्चा
संयुक्त राष्ट्र महासभा सप्ताह के दौरान मंगलवार को भारत के महावाणिज्य दूतावास ने रि-न्यू और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के सहयोग से 'यूएस इंडिया पार्टनरशिप: पावरिंग द एआई इकॉनमी' पर एक गोलमेज वार्ता की। महावाणिज्य दूतावास ने बताया कि इसमें उद्योग, शिक्षा, निवेश, सरकार और नागरिक समाज के 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना में सहयोग बढ़ाना था। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी, USISPF अध्यक्ष मुकेश अघी, विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा, रि-न्यू अध्यक्ष सुमांत सिन्हा और सह-संस्थापक वैशाली निगम सिन्हा सहित कई हस्तियों ने इसमें हिस्सा लिया। वार्ता में डेटा केंद्र, एआई अवसंरचना निवेश, एआई-संचालित बिजली आपूर्ति, ऊर्जा व डिजिटल अवसंरचना हेतु पूंजी और द्विपक्षीय सहयोग के नीतिगत ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारत हेपेटाइटिस उन्मूलन को प्रतिबद्ध, दर्द निवारक के अंधाधुंध उपयोग पर चेतावनी
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने हेपेटाइटिस से निपटने में भारत के व्यापक और जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के एक कार्यक्रम में कही। श्रीवास्तव ने हेपेटाइटिस की रोकथाम, जांच, निदान, उपचार और देखभाल में भारत के प्रयासों पर बात की। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने 2030 तक हेपेटाइटिस से लड़ने के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का लक्ष्य 2030 तक हेपेटाइटिस बी और सी को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों के रूप में समाप्त करना है। भारत हेपेटाइटिस की रोकथाम, शीघ्र पहचान, निदान और उपचार के उपायों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसका उद्देश्य जन-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण से बीमारी के बोझ को कम करना है। इस बीच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनता के लिए एक सलाह जारी की है। इसमें दर्द निवारक, विशेषकर एनएसएआईडीएस, और एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी गई है। सीडीएससीओ ने क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के जोखिमों का हवाला दिया है।