Covid-19 : चीन का सबसे बड़ा झूठ उजागर, जानिए ड्रैगन ने दुनिया को कैसे किया गुमराह
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चीन से फैला कोरोना वायरस दुनिया भर में तबाही मचा रहा है। इससे दुनिया भर में अब तक 63.75 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं कोरोना वायरस 14.77 लाख से अधिक लोगों की जान ले चुका है। चीन शुरू से ही कोरोना वायरस पर झूठ बोलता रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट में कारोना वायरस को लेकर चीन के सबसे बड़े झूठ का खुलासा हुआ है। यह नई रिपोर्ट चीन की मुश्किलें बढ़ाने वाली है।
हुबेई प्रांतीय सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन से 117 पेजों के गोपनीय दस्तावेज सीएनएन के हाथ लगे हैं। इन दस्तावेजों में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने से लेकर प्रांत में महामारी फैलने तक की जानकारी है। इस दस्तावेजों से पता चलता है कि चीन ने शुरुआत में कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर को गुमराह किया।
कई कैटेगरी बनाकर मामलों की संख्या कम की
लीक दस्तावेजों के मुताबिक, चीन में इस साल 10 फरवरी तक कोरोना संक्रमण के कुल 5918 मामले थे। जबकि संक्रमण के मामलों की वास्तविक संख्या उस वक्त से चार गुना अधिक थी। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने कोरोना की परिभाषा के 7 वर्जन जारी किए ताकि कई मामलों को कोविड-19 वाली कैटेगरी में ना डाला जाए। जाहिर है चीन ने अगर वक्त रहते ये खुलासा कर दिया होता, तो दुनिया इस महामारी से कहीं बेहतर तरीके से निपट सकती थी। इतना ही नहीं चीन ने कोरोना वायरस के फैलने संबंधित जानकारी अन्य देशों को नहीं दी। वहीं अमेरिका समेत अन्य देशों के वैज्ञानिकों को कोरोना पर रिसर्च के लिए नमूने देने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं चीन ने कोरोना से संबंधित सबूत भी मिटा दिए।
चीन ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर में की पुष्टि
चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में कोरोना वायरस का पहला मामला 17 नवंबर, 2019 को सामने आया था। एक 55 वर्षीय व्यक्ति इससे संक्रमित हुआ था। चीन ने उसकी पहचान उजागर नहीं की। चीन के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर कोरोना संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि 8 दिसंबर, 2019 को की। साथ ही बताया कि यह संक्रमण वुहान के हुआनन सीफूड मार्केट से फैला है। जबकि अमेरिका ने चीन पर लैब में वायरस बनाने और इसकी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था।
वुहान में ही मिलेगा कोरोना का सोर्स: डब्ल्यूएचओ
कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्रेयस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम कोरोना के सोर्स का पता लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ आप लोगों को आश्वस्त करना चाहता है कि कोरोना के सोर्स का पता लगाने के लिए हम वुहान से ही अपने अध्ययन की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हमें इस वायरस की उत्पत्ति को जानने की आवश्यकता है क्योंकि यह भविष्य में होने वाले प्रकोपों को रोकने में हमारी मदद कर सकता है।
..जब अमेरिका ने साधा चीन पर निशाना
बता दें कि अमेरिका दुनियाभर में महामारी फैलने के बाद से ही चीन पर हमलावर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना को 'चीनी वायरस' तक कह डाला था। सबसे पहले हुबेई के वुहान में संक्रमण फैलने की खबरें आई थीं, जिसके बाद यह दुनियाभर में फैल गया। चीन ने इस आरोप का खंडन किया और बाकी देशों ने उसके ऊपर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन पर भी चीन के साथ मिलकर दुनिया को अंधेरे में रखने के आरोप लगे हैं।
चीन ने भारत पर लगाया आरोप
चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों के एक दल ने कहा कि कोरोना वायरस संभवत: भारत में वर्ष 2019 की गर्मियों में पैदा हुआ था। इस चीनी दल ने दावा किया कि कोरोना वायरस पशुओं से दूषित जल के माध्यम से इंसान में प्रवेश कर गया। इसके बाद यह वुहान पहुंच गया, जहां से कोरोना वायरस की पहली बार पहचान हुई। हालांकि, ब्रिटेन की ग्लासगो यूनिवर्सिटी के एक विशेषज्ञ डेविड राबर्ट्सन ने डेली मेल से कहा था कि चीनी शोध बहुत दोषपूर्ण है और यह कोरोना वायरस के बारे में हमारी समझ में जरा भी वृद्धि नहीं करता है।