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Hindi News ›   World ›   Coronvirus News In Hindi : Silent hypoxia, life of infected people with pneumonia without symptoms

साइलेंट हाइपोक्सिया: बिना लक्षण के निमोनिया ले रहा संक्रमितों की जान

Wed, 29 Apr 2020 02:48 AM IST
योगेश साहू न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 29 Apr 2020 02:48 AM IST
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Coronvirus News In Hindi : Silent hypoxia, life of infected people with pneumonia without symptoms
चीन में मास्क पहने लोग। - फोटो : PTI

अमेरिका में 30 साल से इमरजेंसी सेवा से जुड़े डॉ. रिचर्ड लेविटन ने मौत की बड़ी वजह बताई है, उन्होंने कहा कि मैं तीस वर्षों से आपातकालीन चिकित्सा पर काम कर रहा हूं। 1994 में मैंने इंट्यूबेशन पर एक इमेजिंग सिस्टम भी ईजाद किया था।

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मरीज में श्वसन नलिका डालने वाली इस प्रक्रिया पर काफी गहन अध्ययन हुआ। हाल में, जब न्यूयॉर्क के अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ देखी, तो मैं बेलेव्यू स्थित अस्पताल में स्वेच्छा से काम करने लगा। इस दौरान महसूस हुआ कि हम कोरोना वायरस से होने वाले निमोनिया का जल्दी पता नहीं लगा पा रहे और मरीजों को जिंदा रखने के लिए तेजी से काम करना होगा।
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हम यह जानकर चौंक गए कि बिना लक्षण के निमोनिया संक्रमितों की जान ले रहा है। जिंदगी में पहली बार आपातकालीन कक्ष में एक ही तरह की बीमारी वाले लोगों की इतनी बड़ी तादाद देखी। सभी को कोविड-19 जनित निमोनिया था।
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पहले दिन, पहले घंटे ही मुझे दो मरीजों को श्वसन नलिका लगानी पड़ी। सांस में दिक्कत के अलावा कंधे से लेकर सिर में चोट खाए मरीजों के सीटी स्कैन में भी निमोनिया पाया गया। कई संक्रमित बुजुर्ग अज्ञात कारणों से मर गए। 

  • संक्रमितों में ऑक्सीजन सैचुरेशन मिला 50 फीसदी
  • सामान्य तौर पर यह 94 से 100 फीसदी होता है

क्या है साइलेंट हाइपोक्सिया
अधिकतर मरीजों में से किसी ने भी सांस में तकलीफ की शिकायत नहीं की थी। हालांकि, इनके फेफड़ों के एक्स-रे में उनमें ऑक्सीजन का स्तर कम पाया गया था। बाद में पता चला, वायरस जनित निमोनिया पहले मरीज में ऑक्सीजन का स्तर कम कर रहा है। साइलेंट इसलिए कहा गया, आमतौर पर निमोनिया में छाती में असहज महसूस होता है, लेकिन कोरोना मामलों में ऐसा नहीं होता।

ऑक्सीजन की कमी, फेफड़े करते हैं काम

गंभीर निमोनिया में भी मरीज तेजी से सांस ले रहे थे और कई मरीज मोबाइल चला रहे थे। इस विचित्र स्थिति को समझने की कोशिश में मोटे तौर पर पता चला कि संक्रमण के बाद ऑक्सीजन का स्तर तो कम होता है लेकिन फेफड़े क्रियाशील रहते हैं।

फेफड़ों में नुकसान से मर रहे लोग
साइलेंट हाइपोक्सिया के कारण मरीजों के मरने का कारण सांस की कमी नहीं बल्कि फेफड़ों की क्षति होता है। काफी मरीज गंभीर निमोनिया की स्थिति में ही आपातकालीन कक्ष में पहुंचे। कई को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है और मशीनों के अभाव में जानें जाती हैं। 

पल्स ऑक्सीमीटर बचा सकता है जान

  • कम वेंटिलेटरों का इस्तेमाल स्वास्थ्य तंत्र और मरीज, दोनों की जीत है। साइलेंट हाइपोक्सिया का पता पल्स ऑक्सीमीटर से लगा सकते हैं। इसे चलाना थर्मामीटर जितना ही आसान है। इसके डिस्प्ले पर दो अंक दिखाई देंगे। एक ऑक्सीजन सैचुरेशन का, दूसरा पल्स रेट का। 
  • हाइपोक्सिया का पता लगने, समय पर उपचार और सही निगरानी के कारण ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ठीक हो पाए। 
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