कोरोना: डब्ल्यूएचओ-आईएमएफ ने फिर जताई चिंता, कहा- आजीविका बचाने को जीवन बचाना जरूरी है
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच आजीविका बचाने के लिए जरूरी है कि पहले मानव जीवन को बचाया जाए। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रॉस गेब्रेयेसुस और आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टालीना जॉर्जिवा ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को फिर शुरू करने के लिए पहले कोविड-19 पर काबू पाना जरूरी है।
हालांकि, गेब्रेयेसुस और जॉर्जिवा ने माना कि सही संतुलन बैठाना आसान नहीं होगा। दोनों ने इस महामारी को मानवता के लिए एक घना अंधेरा बताया। कोरोना वायरस की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी इस समय किसी न किसी तरह के लॉकडाउन के चलते घर से ही काम कर रही है।
ब्रिटेन के समाचार पत्र ‘द डेली टेलीग्राफ’ में एक संयुक्त लेख में टेड्रॉस और जॉर्जिवा ने लिखा है कि दुनिया कोविड-19 पर काबू पाने के लिए कदम उठा रही है। विभिन्न देशों ने इस वायरस का प्रसार रोकने के लिए अपने समाज व अर्थव्यवस्था को ‘रोक’ दिया है। दोनों ने कहा, यह कहना सही नहीं होगा कि या तो जीवन बचाओ या आजीविका। पहली चीज वायरस पर नियंत्रण पाना है, और इसे पाना ही होगा। क्योंकि आजीविका बचाने के लिए यह सबसे पहली जरूरत है।
आईएमएफ की रिकवरी में आएंगी मुश्किलें
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालीना जॉर्जिवा ने कोरोना से हो रहे आर्थिक नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने डब्ल्यूएचओ के सम्मेलन में कहा कि हम मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। यह स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्र दोनों पर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा, मौजूदा हालातों में दिवालिया होने वालों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में आईएमएफ की रिकवरी मुश्किल होगी।
मौजूदा बाजार में 90 अरब डॉलर की कमी
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के मुताबिक, मौजूदा संकट से निपटने के लिए आईएमएफ 10 खरब डॉलर (करीब 76 लाख करोड़ रुपए) लगा रहा है। जबकि मौजूदा बाजार में 90 अरब डॉलर (करीब 9000 करोड़ रु.) की कमी हो गई है, यह 2008 की वैश्विक मंदी में हुई कमी से भी ज्यादा है। आईएमएफ मंदी से प्रभावित विकासशील देशों और उभरते बाजारों के लिए आपात फंडिंग जुटा रहा है।