बिना लॉकडाउन दक्षिण कोरिया ने ऐसे पाया कोरोना संक्रमण पर काबू, भारत को सीखने की जरूरत
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कोरोना वायरस का संक्रमण चीन के बाहर अब कई देशों में फैल चुका है। भारत में इससे संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना वायरस का कहर सबसे ज्यादा इटली में देखने को मिला है। जहां अब तक नौ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 80 हजार से अधिक लोग संक्रमित हैं। दूसरी तरफ भारत में कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार ने 22 मार्च से 21 दिन के लिए देशव्यापी लॉकडाउन का एलान किया है। लेकिन बावजूद इसके दिल्ली में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर भूख से मरने के खौफ से लाखों की संख्या में आनंद विहार बस स्टॉप पर इकट्ठे हुए।
सवाल यह है कि क्या लॉकडाउन ही कोरोना से लड़ने का आखिरी विकल्प था?
कोरोना पर जीत हासिल करने के लिए हमें दक्षिण कोरिया से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। दक्षिण कोरिया में अभी तक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जो भी उपाय अपनाए गए हैं, उनमें लॉकडाउन शामिल नहीं है। बिना लॉकडाउन के ही दक्षिण कोरिया इस महामारी से लड़ने में और देशों से कहीं आगे है। आइए जानते हैं दक्षिण कोरिया ऐसा क्या कर रहा है जिससे भारत को सीख लेनी चाहिए।
- दक्षिण कोरिया में हर रोज करीब 20 हजार लोगों का परीक्षण किया जा रहा है। टेस्ट किए जाने का ये आंकड़ा बाकी दुनिया के किसी भी दूसरे देश से बहुत अधिक है। भारत में यह आंकड़ा बेहद कम है। यहां प्रति दस लाख व्यक्तियों पर महज 18 लोगों का ही टेस्ट हो पा रहा है।
- सख्त क्वारंटीन पॉलिसी बनाई गई है। वायरस से संक्रमित सभी लोगों की निगरानी की जा रही है ताकि वह किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के संपर्क में ना आएं। दक्षिण कोरिया में टेस्ट के लिए बनाए गए ये लैब्स 24x7 काम कर रहे हैं। और अन्य देशों की तुलना में जल्द से जल्द परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं इस महामारी को देखते हुए कई लैब तैयार किए गए हैं।
- दक्षिण कोरिया ने कोरोना वायरस टेस्ट के लिए 96 पब्लिक और प्राइवेट लैब का निर्माण किया है। हालांकि भारत में इससे ज्यादा लैब हैं लेकिन यहां की जनसंख्या दक्षिण कोरिया से कहीं ज्यादा है। ऐसे में गिनती के लैब इस महामारी के परीक्षण के लिए काफी नहीं हैं।
- अन्य देशों की तुलना में दक्षिण कोरिया ने टेस्ट का तरीका जल्दी खोज लिया और उन्होंने पूरे देश में प्रयोगशालाओं का एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जो महज 17 दिनों के भीतर ही सकारात्मक परिणाम लेकर आया। चूंकि दक्षिण कोरिया इससे पहले मर्स का प्रकोप झेल चुका था इसलिए बीती बातों से सबक लेते हुए दक्षिण कोरिया अन्य देशों के मुकाबले कहीं आगे नजर आया।
- दक्षिण कोरिया में डॉक्टरों की पाली काम करती है।
- हर किसी को क्वॉरन्टीन नहीं कर सकते हैं और ना ही हर किसी का इलाज कर सकते हैं। जिन लोगों में संक्रमण के बेहद मामूली लक्षण हैं उन्हें घर पर रहना चाहिए और वहीं इलाज लेना चाहिए। लेकिन दक्षिण कोरिया में हर एक व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है। भारत में ऐसा कर पाना संभव मालूम नहीं पड़ता है।
- कई शहरों में सार्वजनिक निगरानी के लिए बड़ा सिस्टम तैयार किया गया है। पांच करोड़ की आबादी वाले इस देश में हर छोटी से छोटी कोशिश को भी तवज्जो दी जा रही है।
- भारत की तरह ही दक्षिण कोरिया में भी स्कूल बंद हैं। कर्मचारी घर से काम करते हैं। लोगों से कहा गया है कि वे किसी समारोह और आयोजन का हिस्सा ना बनें लेकिन लॉकडाउन नहीं किया गया है।
- सड़कों पर ज्यादातर लोग मास्क पहने दिखाई देते हैं। हर बड़ी इमारत के बाहर थर्मल ट्रेसिंग की व्यवस्था की गई है। देश की जनता ने सरकार के फैसलों का स्वागत किया है और उनकी मदद के लिए हाथ भी बढ़ाया है।
हालांकि भारत में लॉकडाउन को बेहतर उपाय के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन देश में कोरोना के बढ़ते मामलों में कोई कमी नहीं दिख रही है। अब तक भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्या 979 से अधिक हो चुकी है। मरने वालों का आंकड़ा 25 हो चुका है। उम्मीद है देश जल्द इसपर काबू पा लेगा।