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महामारी से मौतें सिर्फ संख्या नहीं... हमने अजीजों को खोया, जिनसे हम प्यार करते थे

Wed, 30 Sep 2020 06:22 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Wed, 30 Sep 2020 06:22 AM IST
सार

  • महामारी से मातम... हिंद महासागर में भूकंप और सुनामी से हुई मौतों से चार गुना अधिक
  • दुनियाभर में हुई मौतों में से पांच में से एक नागरिक अमेरिकी है

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Coronavirus News In Hindi : Pandemic, Over 10 Lakh Deaths Are Not Just Numbers, We Lost The Loved Ones
कोरोना वायरस - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना महामारी से दुनियाभर में दस लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर के लाखों घरों में मातम पसरा है। भारत में दुनियाभर की तुलना में संक्रमण की दर सबसे तेज है। अब तक 96,318 जानें जा चुकी हैं।

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अमेरिका की बात करें तो संक्रमण से दो लाख पांच हजार मरीज जान गंवा चुके हैं। इस हिसाब से दुनियाभर में हुई मौतों में से पांच में से एक नागरिक अमेरिकी है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के मेडिकल हिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. होवार्ड मार्कल का कहना है कि मैंने अपनी 84 वर्षीय मां को संक्रमण के कारण खोया है। दस लाख का आंकड़ा 'ये सिर्फ संख्या नहीं है, ये इंसान हैं, ये वो लोग हैं जिनसे हम प्यार करते हैं।'
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ये हमारे भाई-बहन हैं जिन्हें हम जानते हैं
मार्कल कहते हैं कि संक्रमण से मरने वाले हमारे भाई-बहन हैं। ये वो लोग हैं जिन्हें हम जानते हैं। अगर आपके पास और आपके चेहरे पर इसके लिए मानवीय पहलू नहीं है तो इसे अमूर्त बनाना बेहद आसान है। दस लाख लोगों की मौत जेरूशलम, ऑस्टिन और टेक्सास की जनसंख्या से अधिक है। ये मौतें हिंद महासागर में वर्ष 2004 में आए भूकंप और सुनामी से चार गुना अधिक हैं। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 
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कई मौतों का तो पता ही नहीं चला
द पैनेडेमिक सेंचुरी वर्ल्ड हंड्रेड इयर्स ऑफ पैनिक के लेखक मार्क होनिग्सबॉम कहते हैं कई लोगों की मौतें तो जांच नहीं होने और सही रिपोर्टिंग न होने के कारण पता ही नहीं चलीं। मुझे पता है क्यों आंकड़े हतप्रभ या हैरान करने की शक्ति को खो रहे हैं, लोगों को समझना होगा कि आंकड़े कितने बड़े हैं।

मेरा बेटा गांव का पहला डॉक्टर होता
मैं राजेंद्र चौधरी आधे एकड़ भूमि पर खेती किसानी पर बेटे जोगिंदर चौधरी (27) को डॉक्टरी पढ़ा रहा था। वह गांव का पहला डॉक्टर होता लेकिन कोरोना से उसकी मौत हो गई। जुलाई में बेटे की मौत के बाद उसकी मां प्रेमलता चौधरी भी टूट गई और वायरस ने उनकी भी जान ले ली। महामारी से मेरा सबकुछ बर्बाद हो गया है। मेरे सपने और आकांक्षाएं खत्म हो गई हैं। 

मैंने साथियों को मरते हुए देखा है
मैं ऑस्कर ऑरटिज मेक्सिको की तेल कंपनी में काम करता था। महामारी के कारण मैं क्वारंटीन रहा। मैं पूरी तरह असहाय हो गया था क्योंकि मैंने अपने 14 साथियों को वायरस से मरते देखा था, तीन की मौत तो एक सप्ताह में हो गई थी। ये बहुत दर्दनाक था क्योंकि सबकुछ देखते हुए भी मैं कुछ कर नहीं पा रहा था। 

वायरस आजादी से संक्रमण फैला रहा
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी का कहना है कि भारत में वायरस से निपटने के लिए सख्त लॉकडाउन हुआ। लेकिन पाबंदियों के खत्म करने से वायरस फिर से आजाद हो गया और वो अब आसानी से संक्रमण फैला रहा है।


आने वाला समय और दर्दभरा
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ लॉ के प्रो. लॉरेंस गॉस्टिन का कहना है कि आने वाला समय और दर्दभरा होगा। जहां हर तरफ सिर्फ शोक होगा। महामारी के कारण और दूसरी बीमारियों के कारण बिना इलाज जो मौतें हुई हैं वो अधिक भयावह हैं।

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