अध्ययन में खुलासा: हृदय रोगी नहीं तो भी संक्रमित मरीजों के दिल पर बुरा असर
- ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अध्ययन में किया गया खुलासा
- 1261 मरीजों पर अध्ययन 901 मरीजों में हृदय की गंभीर तकलीफ
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कोरोना को फेफड़ों का रोग समझा जा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि ये सीधे हृदय पर हमला करने लगा है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन (बीएचएफ) ने 69 देशों के 1261 मरीजों पर अध्ययन के बाद ये खुलासा किया है। हैरानी की बात ये है, 901 लोग ऐसे शामिल थे, जिन्हें हृदय संबंधी तकलीफ कभी नहीं थी, लेकिन संक्रमण के बाद उनके हृदय पर बुरा असर देखने को मिला है।
इनमें से 46 फीसदी के हृदय की रिपोर्ट असामान्य थी जबकि 13 फीसदी को हृदय संबंधी गंभीर समस्या थी। शोध में शामिल 1261 मरीजों में से 55 फीसदी में हृदय द्वारा खून पंप करने में तकलीफ देखी गई जबकि सात में से एक व्यक्ति के हृदय के काम करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित दिखी।
हम ये समझ रहे कि ऐसा क्यों हो रहा है..
बीएचएफ की मेडिकल डायरेक्टर और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सोन्या बाबू नारायण का कहना है कि कोरोना पीड़ित गंभीर मरीजों के हृदय और वाहिकातंत्र को नुकसान होता है। हम अब ये समझ रहे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है।
यूरोपियन हार्ट जर्नल में कार्डियो वैस्कुलर इमेजिंग शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि हृदय के दाहिने और बाएं चैंबर में तकलीफ देखने को मिली है। मरीजों की स्कैनिंग रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि तीन फीसदी मरीजों को हाल ही में हार्ट अटैक भी आया था।
हृदय की जांच के साथ इलाज का तरीका बदला
शोध में मरीजों की जब स्कैनिंग की गई तो हृदय संबंधी तकलीफ देखने के बाद इलाज का तरीका बदल दिया गया। ऐसे मरीजों को हार्ट फेल में दी जाने वाली दवाएं देने के साथ फ्लूड पर भी नियंत्रण किया गया जिससे उनका हृदय सामान्य तरह से काम करना शुरू करे। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है, बिना जांच रिपोर्ट के अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वायरस के कारण मरीज का हृदय प्रभावित हुआ है।
कोरोना फेफड़ा नहीं कई अंगों की बीमारी
प्रमुख शोधकर्ता प्रो. मार्क ड्वेक के मुताबिक, कोविड-19 से सिर्फ फेफड़े ही नहीं, दूसरे अंगों के साथ हृदय भी प्रभावित होता है। गंभीर फ्लू में हृदय को नुकसान होता है लेकिन शोध में अधिकतर मरीजों के हृदय को नुकसान हुआ है। हृदय के काम करने की क्षमता प्रभावित हुई है। अब समझना है कि क्या ये स्वत: ठीक हो सकता है और हृदय पर वायरस का लंबे समय तक क्या असर पड़ेगा।