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खतरा: कोरोना है बेहद खतरनाक, मरीजों के मस्तिष्क को पहुंचाता है भारी नुकसान
Mon, 13 Jul 2020 06:19 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 13 Jul 2020 06:19 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के मरीजों को सांस की ही नहीं मस्तिष्क संबंधी तकलीफ भी हो सकती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन की रिपोर्ट के अनुसार इन मरीजों में बड़बड़ाने, स्ट्रोक और नसों के क्षतिग्रस्त होने की तकलीफ अनुमान से अधिक है।
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ब्रेन जर्नल में प्रकाशित शोध में यूसीएल के न्यूरोलॉजिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता डॉ. माइकल जैंडी का कहना है कि हमने देखा है कि महामारी में मस्तिष्क में सूजन वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है जो आमतौर पर वायरल इंफेक्शन में देखने को मिलती है।
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शोधकर्ताओं ने नेशनल हॉस्पिटल फॉर न्यूरोलॉजी एंड न्यूरोसर्जरी इन लंदन में इलाज कराने आए संक्रमित और संदिग्ध 43 मरीजों पर अध्ययन किया है जिनकी उम्र 16 से 85 वर्ष के बीच थी। शोधकर्ताओं के अनुसार इन मरीजों में सांस संबंधी कोई तकलीफ नहीं दिखी जो कोरोना से जुड़ी है।
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दस मरीजों में बड़बड़ाने की आदत...
टीम ने दस मरीजों के मस्तिष्क में अस्थायी तकलीफ दिखी जिन्हें बड़बड़ाने की आदत थी। आठ को स्ट्रोक तो आठ की नसें क्षतिग्रस्त हुई थीं। बारह अन्य मरीजों के मस्तिष्क में सूजन थी। इसमें नौ मरीजों में एक्यूट डिससेमिनेटेड इन्सेफ्लोमाइलाइटिस (एडीईएम) की तकलीफ थी। वैज्ञानिकों के अनुसार आम दिनों में इस तरह के मामले एक महीने में एक मिलते हैं लेकिन महामारी के बीच हर सप्ताह एक रोगी मिल रहा है।
मस्तिष्क और स्पाइनल फ्लुइड में वायरस नहीं...
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि मरीजों में कोविड-19 वायरस मस्तिष्क और स्पाइनल फ्लुइड में नहीं मिला है। इसका मतलब ये है कि वायरस से सीधे मस्तिष्क संबंधी लक्षण नहीं आते हैं। शरीर की इम्युनिटी को प्रभावित कर वायरस मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। वैज्ञानिक अब ये पता करने में लगे हैं कि वायरस से कुछ चुनिंदा लोगों में ही मस्तिष्क संबंधी तकलीफ क्यों होती है।
ठीक होने वालों की स्क्रीनिंग जरूरी
शोध में शामिल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रैचेल ब्राउन बताती हैं कि ये स्पष्ट हो चुका है कि वायरस मस्तिष्क को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। ऐसे में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों के इलाज के दौरान उनकी मस्तिष्क संबंधी जांच जरूरी है ताकि भविष्य में वे किसी रोग की चपेट में आने से बचें। इलाज में सावधानी बरतने से उन्हें मस्तिष्क संबंधी तकलीफों से बचाया जा सकता है।