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अमेरिका: कोरोना ने बदला जिंदगी का नजरिया, सेहत है तो दौलत है
Sun, 23 May 2021 07:26 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 23 May 2021 07:26 AM IST
सार
- अमेरिका जैसे समृद्ध देश में भी कोरोना महामारी के बाद उल्लेखनीय बदलाव आया है अब अधिकतर लोग रिश्ते और स्वास्थ्य को देने लगे हैं प्राथमिकता
- 60 प्रतिशत लोगों कहा, संपत्ति के प्रति बदलेंगे समझ, पैसे से सब कुछ नहीं खरीद सकते
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न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में मास्क लगाए अमेरिकी लोग
- फोटो : PTI
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विस्तार
कोरोना महामारी ने यदि मानव जीवन को खास नुकसान पहुंचाया है, तो दुनिया को परिवर्तनकारी सबक भी दिया है। हैं। इनमें सबसे बड़ा सबक धन दौलत के प्रति नजरिए में बदलाव है।
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कुछ ताजा सर्वेक्षणों के निष्कर्ष हैं, धनी लोगों को भी समझ में आ गया कि पैसे से सब कुछ खरीदने और आनंद की धारणा ज्यादा कारगर नहीं है। अमेरिका जैसे समृद्ध देश में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है कि उनके लिए रिश्ते और स्वास्थ्य से ज्यादा मायने रखने लगे। सेहत है, तो दौलत है।
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अमेरिका में निवेशकों पर हुए बोस्टन प्राइवेट के सर्वे में 60 फ़ीसदी लोगों ने माना महामारी ने संपत्ति को लेकर अपनी समझ के पुनर्मूल्यांकन का मौका दिया है। लोगों को टैक्स और आपात खतरे की चिंता तो है पर अब उनकी बड़ी प्राथमिकता सेहत है। वहीं, चार्ल्स श्वॉब कोर्प के सालाना सर्वे में मध्य आय वाले लोग महामारी के बाद देश व अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा सकारात्मक नजर आए हैं।
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दौलत का मतलब ज्यादा पूंजी नहीं
बोस्टन प्राइवेट के विभागीय प्रमुख गेराल्ड बेकर का कहना है, सर्वे में शामिल लोगों के लिए दौलत के मायने अब ज्यादा वित्तीय पूंजी नहीं है। जो वह कर रहे हैं, उसमें कामयाबी ही अब इसका पैमाना है। महामारी ने आनंद व सफलता को फिर परिभाषित करने का मौका दिया है।
इससे सहमत लोगों ने 78 फ़ीसदी मिलेनियल्स यानी 1980 से 1990 के दशक में जन्मे लोग व 73 फ़ीसदी जेनरेशन एक्स यानी 1965-1980 के बीच जन्म लेने वालों ने कहा कि कोरोना ने भविष्य में संपत्ति के इस्तेमाल की उनकी योजना बदल दी है। पर, बेबी बूमर्स यानी 1946-1964 के बीच जन्मे लोगों में से सिर्फ 26 फीसदी ने ही यह बात स्वीकार की।