कोरोना: दवा की खोज युद्ध स्तर पर, अस्थमा की दवाई भी हो सकती है कारगर, जल्द होगा ट्रायल
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कुछ वैज्ञानिक पहले से मौजूद मलेरिया, कैंसर, टीबी, एचआईवी एड्स जैसी बीमारियों की दवा से ही संक्रमण के इलाज की कोशिश में लगे हैं। अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी में अस्थमा की दवा ‘इबुडीलास्ट’ का क्लीनिकल ट्रायल शुरू होने वाला है। जापान और दक्षिण कोरिया में इस दवा से अस्थमा के इलाज की अनुमति है।
यूनिवर्सिटी के न्यू हेवन अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि दवा से फेफड़ों में सूजन कम हो सकती है। गंभीर मरीजों में होने वाले अन्य नुकसानों में भी कमी आएगी। येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रो. जियोफ च्युप का कहना है कि जानवरों पर बेहतर परिणाम हुए हैं। उम्मीद है कि गंभीर मरीजों के लिए ये दवा अधिक फायदेमंद होगी। सामान्य मरीज वेंटिलेटर पर जाने से बचेंगे तो कुछ जल्दी ठीक होंगे। शोधकर्ताओं ने अमेरिकी संस्था फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ट्रायल की अनुमति मांगी है।
कैंसर की दवाओं पर विश्वास ज्यादा
वायरस का इम्यूनिटी पर असर पड़ता है। कैंसर में भी ऐसा ही होता है। इसी कारण कैंसर की दवाओं से इलाज की कोशिश हो रही है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर वायरस को मात दी जा सकती है।
वायरस को फेफड़ों में जाने से रोकेगी
यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा में अध्ययन से पता चला है कि कैंसर की दवा बेमसेंटीनिब की गोली प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ वायरस फैलने के लिए जिम्मेदार एएक्सएल रिसेप्टर को निष्क्रिय करेगी। स्कॉटलैंड ने पांच और दवाएं छांटी हैं।
नेजल स्प्रे से एंटीवायरल दवा पर शोध
स्कॉटलैंड के सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि एंटीवायरल दवा न्यूमिफिल को नेजल स्प्रे के जरिये लेने से वायरस को फेफड़ों और श्वास नलिका तक पहुंचने से रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे वायरस का प्रसार मनुष्य के शरीर में रुक सकता है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड इस दवा को लेकर काम कर रहा है।