ब्रिटेन : ब्रेग्जिट में जिन अप्रवासी डॉक्टरों को कोसा, अब वही बने ‘कोरोना हीरो’
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ब्रेग्जिट आंदोलन के दौरान जिन अप्रवासी डॉक्टरों को ब्रिटेन में निशाना बनाया गया वे ही अब वहां देवदूत बने हुए हैं। कोरोना महामारी में अब तक 8 अप्रवासी डॉक्टरों ने जान गंवाई है। इनमें भारत, मिस्र, नाइजीरिया, श्रीलंका, पाकिस्तान और सूडान मूल के डॉक्टर शामिल हैं।
ब्रिटेन के स्वास्थ्य तंत्र की अधिकांश जिम्मेदारी विदेशी मूल के डॉक्टरों पर है। कुछ वर्षों में इन पर स्थानीय लोगों की नौकरी छीनने के आरोपों लगे थे लेकिन इनके जज्बे ने पूरे विरोध करने वालों के मुंह बंद कर दिए।
डेढ़ साल पहले तक नौकरियां छीनने के लिए कोसे जा रहे थे
25 मार्च को पश्चिमी लंदन में जान गंवाने वाले सूडान मूल के डॉ आदिल अल-तायर के चचेरे भाई डॉ. हाशिम अल-खिदिर का कहना है कि डेढ़ साल पहले तक भी हम पर नौकरियां छीनने का आरोप लगाते थे। वहीं, आज यही अप्रवासी डॉक्टर और नर्स ब्रिटेन को कोरोना से बचाने के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं। आदिल 1990 में ब्रिटेन आए थे और यहां उन्होंने ट्रांसप्लांट सर्जन में विशेषज्ञता हासिल की थी।
हाशिम का कहना है कि अगर ब्रिटेन सरकार ने अस्पतालों में शुरुआत से ही स्क्रीनिंग शुरू करते हुए डॉक्टरों को उन्नत सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए होते तो आदिल बच जाते। वह मरीजों की देखभाल करते हुए कोरोना से संक्रमित हो गए थे और वेंटिलेटर पर हृदयाघात से उनका निधन हुआ।
इन डॉक्टरों ने गंवाई जान
भारतीय मूल के हार्ट सर्जन डॉ जितेंद्र राठौड़ (62), पाकिस्तान के हबीब जैदी (76) और सैयद हैदर (80), नाइजीरिया मूल के डॉक्टर अल्फा सआदु (68), श्रीलंका से आए डॉ. एंटन सेबेस्टिअन पिल्लई (70) और मिस्र मूल के मोहम्मद शमी शोउशा (79) समेत आठ डॉक्टरों ने जान गंवाई है।
एक तिहाई अप्रवासी डॉक्टरों ने संभाल रखा है हेल्थ सिस्टम
एक तिहाई अप्रवासी डॉक्टरों ने ब्रिटेन का हेल्थ सिस्टम संभाल रखा है। विदेशी डॉक्टरों को नियुक्ति देकर ब्रिटेन मोटे तौर पर 2.70 लाख डॉलर बचाता है, जो उसे अपने लोगों को प्रशिक्षण देने में खर्च हो सकता है। ब्रिटेन मेडिकल शिक्षा पर पर्याप्त पैसा खर्च नहीं करता। लिहाजा, उसे अप्रवासियों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है।
भारत में फंसे नागरिकों को 12 उड़ानों से एयरलिफ्ट करेगा ब्रिटेन
ब्रिटेन सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को काबू करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के बीच भारत में फंसे 3,000 से अधिक ब्रिटिश नागरिकों को 12 अतिरिक्त चार्टर उड़ानों से वापस लाने की शुक्रवार को घोषणा की। इन अतिरिक्त उड़ानों का प्रबंध पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत समेत कई हिस्सों से किया गया है। ब्रिटेन ने इसके लिए भारत के सहयोग की सराहना की है।