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आपबीती: डॉक्टरों की बात मानी, तीन हफ्ते तक घर में रही... अब पूरी तरह ठीक हूं

Tue, 14 Apr 2020 02:45 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, लंदन। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 14 Apr 2020 02:45 AM IST
सार

  • ब्रिटेन की 59 वर्षीय न्यूज एंकर फियोना फिलिप्स की आपबीती 
  • जो दर्द मैंने सहा मैं नहीं चाहती आप और आपका परिवार उसे सहे

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Coronavirus Case News In Hindi : 59 year old british news anchor Fiona Phillips, said Obeyed the doctors Now i am fine
फियोना फिलिप्स

विस्तार

मैं ब्रिटेन के कैंटरबरी में रहती हूं। बतौर न्यूज एंकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लोगों को जागरूक करने के अभियान में जुटी थी। 20 मार्च को मुझे बीमारी के लक्षण दिखे तो मैं ऑफिस नहीं गई। हालांकि, मुझे तब एहसास नहीं था कि अब मेरी जिंदगी बदलने वाली है।

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अगले दिन मैं बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थी। अब शुरू हुई मेरी बीमारी और इसके डर से जद्दोजहद। अब मैं पूरी तरह ठीक हूं, पर जो दर्द मैंने सहा मैं नहीं चाहती आप और आपका परिवार उसे सहे। इसलिए अपनी कहानी आपसे साझा कर रही हूं।
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23 मार्च तक मेरी स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। हमने सरकारी हेल्पलाइन पर संपर्क किया। उन्होंने कोरोना संक्रमित बताते हुए मुझे आइसोलेट रहने और जरूरी दवा लेने को कहा। मुझे नई जिंदगी मिली है। - फियोना फिलिप्स 
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मैंने कभी खुद को इतना लाचार महसूस नहीं किया, धीरे-धीरे बढ़ती गई तकलीफ
समय के साथ मेरी तकलीफ बढ़ती चली गई। शरीर दर्द से टूट रहा था। श्वास और आहार नलिका में होने वाले दर्द को बयां नहीं कर सकती। कफ भी बढ़ रहा था। ऐसा लग रहा था कि पूरा गला छिल गया हो। मैं सिर्फ सोना चाहती थी। इससे पहले मैंने कभी किसी बीमारी के वक्त खुद को इतना लाचार महसूस नहीं किया था। बुखार, सिर दर्द और शरीर में हो रहे दर्द के लिए तो कभी दवा तक नहीं ली थी। तब मुझे लगता था कि मेरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बीमारी को मात देने के लिए पर्याप्त है।


...मौत मेरे बिस्तर पर मौजूद थी
वायरस मेरी कोशिकाओं को जकड़ रहा था मानों बिना बताए आई मौत मेरे बिस्तर पर मौजूद हो। मैं दुनियाभर में हो रही मौतों को टीवी पर देख बहुत डर गई थी। इसके कुछ समय बाद ही मेरी सांस फूलने लगी। तब मैंने पूरी हिम्मत से वायरस से लड़ने की ठानी। तीन हफ्ते बिस्तर पर रही। दवाएं लेती रहीं। आज मैं ठीक हूं, लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैंने सकारात्मक विचार रखे। डॉक्टरों की बात मानी और घर में रही। मुझे नई जिंदगी देने में मेरे पति की अहम भूमिका रही जिन्होंने मेरा पूरा ख्याल रखा।

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