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कोरोना वक्सीन: इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने शुरू किया बूस्टर टीकाकरण अभियान
Sat, 31 Jul 2021 05:49 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, येरूशलम
एजेंसी, येरूशलम
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 31 Jul 2021 05:49 AM IST
सार
- राष्ट्रपति हेर्जोग को फाइजर-बायोएनटेक के टीके की तीसरी खुराक लगाई गई
- इस अभियान के साथ ही इस्राइल पहला देश बन गया है जहां बूस्टर डोज दी जा रही
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इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्गोज
- फोटो : ANI
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विस्तार
इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज ले ली है। इसके साथ ही यहां 60 साल से ऊपर के लोगों को तीसरी डोज (बूस्टर शॉट) देने का अभियान शुरू हो गया है। इस अभियान की मदद से तेजी से फैलने वाले डेलटा वैरिएंट के प्रसार और प्रभाव को कम करना है।
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साठ वर्षीय हेर्जोग को फाइजर-बायोएनटेक के टीके की तीसरी खुराक दी गई। उन्होंने कहा कि बूस्टर टीकाकरण अभियान की शुरुआत करते हुए मुझे गर्व हो रहा है। महामारी के इस चुनौतीपूर्ण समय में जीवन को सामान्य हालात को बहाल करने में यह महत्वपूर्ण हैं। इस अभियान के साथ ही इस्राइल पहला देश बन गया है जहां बूस्टर डोज दी जा रही है।
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बता दें किभारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रोफेसर बलराम भार्गव ने स्कूल खोलने की हिमायत करते हुए यूरोप के देशों का उदाहरण दिया था, लेकिन महामारी को देखते हुए निश्चित रूप से अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हालांकि कई राज्यों ने स्कूलों को दोबारा खोले जाने की घोषणा कर दी है।
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अभिभावकों क कोविड से चिंता का कारण
आईसीएमआर ने पिछले मंगलवार को चौथे सीरो सर्वे के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि 28,975 लोगों पर किए गए सर्वे में शामिल 67.6% लोगों में कोविड एंटीबॉडी मिल चुका है। इस सर्वे में 6 से 9 साल के 2,892 बच्चे, 10 से 17 साल के 5,799 बच्चों को शामिल किया गया था। जिनमें से आधे से ज्यादा बच्चों में एंटीबॉडी पाई गई यानी कोरोना संक्रमण से बच्चे भी प्रभावित हुए। ऐसे में अभिभावकों को डर है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच स्कूलों का खुलना कितना सुरक्षित है?
छोटे बच्चों में के मुकाबले संक्रमित होने का खतरा कम
बलराम भार्गव ने प्राइमरी स्कूल खोलने के पीछे का तर्क देते हुए कहा था कि कोरोना की लड़ाई में बच्चे वयस्कों के मुकाबले संक्रमण से ज्यादा अच्छी तरह से लड़ सकते हैं।उन्होंने कहा कि यूरोप के कई देशों ने कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच भी प्राइमरी स्कूलों को बंद नहीं किया था। इसलिए शुरूआत में प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं और उसके बाद सेकंडरी स्कूल खोले जाएं।