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अमेरिका में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण की वजह क्या है, अबतक 33 लाख मरीज

Tue, 14 Jul 2020 08:09 PM IST
Jeet Kumar बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 14 Jul 2020 08:09 PM IST
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corona patients is increasing in america more than three millions people are infacted
अमेरिका का झंडा - फोटो : Social media

जिस तरह अमेरिका में कोविड 19 के मरीज बढ़ रहे हैं, वो पूरी दुनिया को ही हैरानी में डाल रहा है। जिस देश की जनसंख्या 35 करोड़ भी नहीं है, वहाँ अब तक 33 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं।

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जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक अब तक अमेरिका में 1 लाख 37 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। 7 जुलाई को तो अमेरिका ने एक दिन में रिकॉर्ड नए केस दर्ज किए। 60 हजार से ज्यादा।
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जमीन पर हालात बिगड़ रहे हैं। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अस्पतालों पर बोझ बढ़ गया है। आईसीयू भी अपनी क्षमता तक पहुँच गए हैं। एक बार फिर से हेल्थ केयर वर्कर्स को मास्क, ग्लव्स और पीपीई की कमी हो रही है।
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यूएसए टुडे के मुताबिक अमरीका में तो अब चीन से भी ज्यादा मामले हैं, वो चीन जहाँ सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण के मामले मिले थे। अगर ये भी मान लिया जाए कि चीन अपने आँकड़ें कम करके बता रहा है तो भी चीन की 140 करोड़ की जनसंख्या में प्रति व्यक्ति संक्रमण दर हुआ- 16000 में एक व्यक्ति। वहीं अमेरिका में 110 लोगों में एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित है।

इतना ही नहीं, अमेरिका में हर साल जितनी मौतें दूसरी बीमारियों से होती हैं, उनसे ज्यादा अब कोरोना से होने लगी हैं। जैसे कॉमन फ्लू से हर साल अमेरिका  में 55000 मौतें होती हैं और अल्जाइमर से 1 लाख 21 हजार। कोरोना से पिछले 4 महीने में ही इनसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं।

खास बात ये है कि सरकार कुछ और कहती है और विशेषज्ञ कुछ और। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना संक्रमण को लेकर जब भी बोला, वे अपने शब्दों में इस खतरे की गंभीरता को बयां नहीं कर पाए।

अब भी जो हालात हैं उसके बावजूद सरकार स्कूल खोलने की भी बात कर रही है। राष्ट्रपति ट्रंप अब भी कह रहे हैं कि अमेरिका महामारी को देखते हुए अच्छी स्थिति में है। अमेरिका सरकार इस बात से संतुष्टि है कि अमेरिका में कोरोना से मृत्यु दर कम है और स्थिर भी। अमेरिका सरकार के लोग बार-बार जनता को इसी तरह आश्वासन दे रहे हैं।

क्या सरकार एक्सपर्ट की राय नहीं सुन रही

अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फॉउची कोरोनावायरस पर व्हाइट हाउस के सलाहकार भी हैं। वो तो ये कह रहे हैं कि कम मृत्यु दर की बात पर जोर देना एक गलत नैरेटिव है।

उन्होंने आगाह किया है कि अभी तो अमेरिका में ये कोरोना की पहली लहर ही है और उसमें भी अमेरिका पूरी तरह धंसा हुआ है। लोगों ने एहतियात नहीं बरती तो हर दिन 1 लाख केस भी हो सकते हैं।

मार्च में ही फाउची ने अनुमान लगाया था कि अमेरिका में 1 लाख से 2 लाख के बीच मौतें हो सकती हैं। फिलहाल जो आँकड़ें हैं, वो उनके अनुमान को साबित कर चुके हैं।

अमरीका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी सीडीसी संस्था के डायरेक्टर डॉक्टर रॉबर्ट रेडफील्ड ने कहा था कि केस एक रिपोर्ट हो रही है और असल में 10 और लोग संक्रमित हैं। उनके मुताबिक देश में 5 से 8 फीसदी जनसंख्या संक्रमित हो चुकी है।

पिछले महीने सीडीसी की डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर ऐन शुकट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका... न्यूजीलैंड, सिंगापुर या दक्षिण कोरिया जैसी स्थिति में नहीं है, वहाँ नए केस जल्द से जल्द पता कर लिए जाते हैं और कांटेक्ट ट्रैसिंग कर लोगों को आइसोलेट किया जाता है। लेकिन अमेरिका में फिलहाल बहुत ज्यादा वायरस फैला हुआ है।

मृत्यु दर कम होने पर सरकार का जोर

तो जो बार-बार मृत्यु दर के कम होने की बात पर जोर दिया जा रहा है और कई देशों की सरकारें ऐसा कर रही हैं, उसको लेकर एक्सपर्ट्स आगाह करते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कोरोना से संक्रमित बुजुर्ग मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाने की नौबत ज्यादा आती है और बुज़ुर्ग ही इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

सीडीसी के आँकड़ों के मुताबिक हर 10 में से आठ मौतों में मरीज की उम्र 65 साल से ज्यादा थी। लेकिन अब तो बहुत युवा मरीज भी कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं और उनमें मौत होने के चांस बेहद कम हैं।

जैसे अमेरिका के एरिजोना राज्य में आधे मामलों में तो मरीजों की उम्र 20 से 44 साल है। टैक्सस में आधे से ज्यादा मामले 50 साल से कम उम्र के हैं। तो जब मृत्यु दर निकाली जाती है तो वो कम ही निकलती है। दूसरी बात ये कि कोविड 19 संक्रमण का नतीजा सिर्फ मौत ही नहीं होता। लोगों में ठीक होने के बाद भी शारीरिक और मानसिक समस्याएँ रहती हैं।

अमेरिका में केस बढ़ क्यों रहे हैं
इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, पहली तो ये कि शुरुआत में ही सरकार ने तेजी नहीं दिखाई। सरकार ने गंभीरता नहीं समझी। टेस्ट कम किए, वायरस संक्रमण को काबू करने के लिए कदम नहीं उठाए।अमेरिका के अलावा और भी ऐसे देश हैं जिन्होंने तुरंत कदम नहीं उठाए और वहाँ संक्रमित मामलों की भरमार हो गई, जैसे इटली, स्पेन और ब्रिटेन।

कुछ और भी दिक्कतें हुईं जैसे राज्य और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को अपने टेस्ट किट बनाने की इजाजत नहीं थी और इसलिए सभी सैंपल्स को अटलांटा में सीडीसी में भेजा जाता था। उसके बाद सीडीसी ने ही राज्यों को खराब टैस्ट किट भेजे जिससे और देरी हुई।

अब गर्मियां आ गई हैं और लोग अपनी सामान्य गतिविधियों की ओर लौट रहे हैं। कहा जा रहा है कि अमेरिका में युवाओं में ये सोच बन गई है कि उन्हें ज्यादा खतरा नहीं है। ऐसी खबरें आईं कि जब राज्यों ने लॉकडाउन में ढील दी तो युवा लोग घूमते फिरते नजर आए। बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करते हुए यानी खतरे को कम आँकते हुए।

तो अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमितों की संख्या का मामला अगर खँगालें तो ऐसा लगता है कि सरकार अलग बात कह रही है, विशेषज्ञ अलग बात कह रहे हैं और आम लोगों में भी इसकी गंभीरता का संदेश नहीं पहुँच पा रहा है।
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