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हांगकांग: 26 साल पुराना अखबार ‘एपल डेली’ बंद, चंद घंटों में बिकीं अंतिम संस्करण की 10 लाख प्रतियां

Thu, 24 Jun 2021 04:21 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 24 Jun 2021 04:21 PM IST
सार

 अखबार की कंपनी पुलिस के उसकी 23 लाख डॉलर की संपत्ति फ्रीज करने, उसके कार्यालय की तलाशी लेने और पांच शीर्ष संपादकों और कार्यकारियों को पिछले हफ्ते गिरफ्तार करने के बाद कहा था कि वह अपना संचालन बंद करेगा।

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एप्पल डेली न्यूजपेपर - फोटो : social media

विस्तार

चीनी अधिपत्य वाले इस महानगर ने लोकतंत्र की आवाज बने एपल डेली अखबार को भावुक विदाई दी। लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की आवाज बन चुके एपल डेली का आखिरी अंक बृहस्पतिवार को छपकर निकला तो उसे खरीदकर सहेजने के लिए हजारों लोग कतारों में लगे नजर आए।

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अखबार की प्रति पाने के लिए उत्साह इतना कि 80 हजार प्रतियों की नियमित प्रसार संख्या वाले एपल डेली ने 10 लाख प्रतियां छापी, लेकिन कम पड़ गईं। 75 लाख की आबादी वाले हांगकांग के नागरिकों के लिए एपल डेली की यह आखिरी प्रति चीन द्वारा किए जा रहे लोकतंत्र के दमन के खिलाफ खड़ी आवाज का प्रतीक चिह्न थी। उन्होंने इसे ट्रॉफी की तरह सहेज लिया। 
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एपल डेली ने बताया कि पुलिस ने उसके करीब 17 करोड़ रुपये के संसाधनों को सील किया है। पांच प्रमुख संपादक गिरफ्तार हैं, कई अधिकारी हिरासत में हैं, अखबार छापना संभव नहीं रहा। 
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अखबार पर विदेशियों से मिलकर चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप लगाए गए। उसका बंद होना, स्वायत्त कहे जाने वाले हांगकांग को बीजिंग द्वारा पंजों में जकड़ने का स्पष्ट उदाहरण है। 



50 वर्ष रखना था स्वायत्त 
हांगकांग को 1997 में ब्रिटेन ने चीन के हवाले करते समय अगले 50 वर्ष स्वायत्त रखने की शर्त रखी थी। चीन लगातार कानून बदल कर यहां लोकतंत्र खत्म कर रहा है।

एपल डेली पढ़ने वाले लोगों को तो नहीं मार सकेगा चीन 
एपल के ग्राफिक डिजाइनर डिक्सन एनजी ने भावुक होकर कहा कि यही हांगकांग में लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सच्चाई है। डिप्टी चीफ एडिटर चान पुइमन ने बुधवार रात न्यूजरूम में सभी स्टाफ से सवाल करते हुए कहा, आपने शानदार काम किया। क्यों हांगकांग में एपल डेली नहीं रहेगा? चान को हाल में गिरफ्तार किया गया था, वे बेल पर हैं। 

डिकसन ने कहा, ‘‘यह हमारा आखिरी दिन और आखिरी संस्करण है, क्या यह सच्चाई दिखाता है कि हांगकांग ने अपनी प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की आजादी को खोना शुरू कर दिया है ? इसे इस तरीके से क्यों समाप्त होना पड़ा? क्यों हांगकांग में अब कोई एप्पल डेली अखबार नहीं होगा?’’

प्रधान संपादक रायन लॉ ने भी गिरफ्तारी से पहले कहा था, हमारा कुछ भी हाल हो, लेकिन चीन एपल डेली पढ़ने वाले लोगों को तो नहीं मार सकेगा। इसकी वेबसाइट व एप भी बंद कर दिए गए हैं।

स्थापना करने वाले उद्यमी को 14 माह की जेल 
एपल डेली चीनी भाषा में था। 1995 में इसकी स्थापना करने वाले उद्यमी जिमी लाई को पिछले महीने चीन 14 महीने कारावास की सजा दे चुका है। सुरक्षा कानून के तहत 100 से अधिक जाने-माने कार्यकर्ता भी जेल में हैं। 

मिट्टी में दबाया बीज, मीठे फल देने वाला पेड़ बनेगा 
- मुख्य पृष्ठ पर अखबार की इमारत के बाहर खड़े समर्थकों को देख हाथ हिला रहे स्टाफ की तस्वीर छापी गई। संदेश था, हांगकांग के लोगों ने बरसात के बीच व्यथित मन से विदाई दी, शुक्रिया। 
डिप्टी चीफ चान का पत्र छपा, लिखा था, सेब मिट्टी के नीचे जब दबाया जाता है, उसके बीज पेड़ बनकर और बड़े, मीठे व सुंदर सेब देते हैं।

चीन ने की कार्रवाई
अखबार ने, पुलिस के उसकी 23 लाख डॉलर की संपत्ति फ्रीज करने, उसके कार्यालय की तलाशी लेने और पांच शीर्ष संपादकों और कार्यकारियों को पिछले हफ्ते गिरफ्तार करने के बाद कहा था कि वह अपना संचालन बंद करेगा। पुलिस ने अखबार पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए विदेश से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की थी।

बुधवार रात को न्यूजरूम में एकत्रित कर्मियों से सहायक प्रकाशक चान पुई-मैन ने कहा, ‘‘आप सभी ने बहुत शानदार काम किया। एप्पल डेली ने अंतिम संस्करण के लिए 10 लाख प्रतियां प्रकाशित कीं जबकि आम तौर पर 80,000 प्रतियां छपती हैं। लोकतंत्र समर्थक मीडिया संगठन ऑनलाइन मौजूद हैं लेकिन यह शहर में अपनी तरह का इकलौता प्रिंट अखबार था।’’


लोकतंत्र समर्थक अखबार का ऑनलाइन संस्करण अब भी जारी रहेगा, केवल प्रिंट संस्करण बंद किया गया है। अखबार ऐसे समय में बंद हो रहा है जब प्राधिकारियों ने 2019 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद असंतुष्टों पर कार्रवाई तेज कर दी है। चीन द्वारा करीब एक साल पहले लागू किए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत पहले मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के साथ ही यह घोषणा की गई है।

गौरतलब है कि वर्ष 1997 में ब्रिटेन से हांगकांग का प्रशासन अपने हाथ में लेते वक्त चीन ने वादा किया था कि वह अगले 50 साल तक शहर के नागरिक अधिकारों की रक्षा करेगा इसके बावजूद बीजिंग पाबंदियों को बढ़ा रहा है।

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