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जयशंकर बोले: हिंद-प्रशांत में सहयोग भारत-वियतनाम के हित में; बहुध्रुवीय व्यवस्था को बढ़ावा देने की तैयारी

Mon, 16 Oct 2023 05:25 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हनोई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हनोई Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 16 Oct 2023 05:25 PM IST
सार

विदेश मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा की कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग करना हमारे साझा हितों में क्यों है। कैसे भारत और वियतनाम अपनी आजाद मानसिकता के साथ बहुध्रुवीय और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं। 

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Cooperation in Indo-Pacific is in interests of India and Vietnam: S Jaishankar
विदेश मंत्री एस.जयशंकर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को आसियान की केंद्रीयता के महत्व और क्वाड समूह के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग भारत और वियतनाम के साझा हितों में है। चार दिवसीय यात्रा पर हनोई पहुंचे जयशंकर ने यह टिप्पणी वियतनाम की राजनयिक अकादमी में अपने संबोधन के दौरान यह टिप्पणी की। 

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उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर कहा, इस बात पर चर्चा की कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग करना हमारे साझा हितों में क्यों है। आसियान की केंद्रीयता के महत्व को रेखांकित किया और क्वाड के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत और वियतनाम अपनी आजाद मानसिकता के साथ बहुध्रुवीय और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं। 

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क्वाड समूह में चार देश अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। ये देश क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रभाव के बीच रक्षा और उर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। हिंद-प्रशांत एक जैव-भौगोलिक क्षेत्र है, जिसमें हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर सहित पश्चिमी और मध्य प्रशांत महासागर शामिल हैं।

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अमेरिका, भारत और कई अन्य विश्व शक्तियां इस संसाधन संपन्न क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की पृष्ठभूमि में एक स्वतंत्र, खुले और संपन्न हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा कर रही हैं। 

चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है। हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम सभी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों और सैन्य प्रतिष्ठानों का निर्माण किया है। पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ भी चीन का विवाद है।

दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) को क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है और भारत, अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देश इसके संवाद साझेदार हैं। आसियान के 10 सदस्य देश इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया हैं।
 

भारत और आसियान के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण रूप से मजबूत हुए हैं, जिसमें व्यापार और निवेश के साथ-साथ सुरक्षा व रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर फोकस किया गया है।

इससे पहले दिन में जयशंकर ने अपने वियतनामी समकक्ष बुई थान सोन से मुलाकात की और व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की। जयशंकर ने सोमवार को हनोई में 18वें भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग की बैठक में भी हिस्सा लिया। वियतनाम से जयशंकर 19 से 20 अक्तूबर तक सिंगापुर की यात्रा करेंगे।

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