बांग्लादेश: निर्वाचन आयोग के गठन पर पर विवाद जारी, विपक्ष को मिल गया है गोलबंदी का मुद्दा
बीएनपी के नेताओं की बैठक के बाद पार्टी महासचिव जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने एक बयान में कहा- ‘बैठक में निर्वाचन आयोग के गठन के बारे में राजनीतिक दलों के साथ और राष्ट्रपति से वार्ता के मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें फैसला हुआ कि राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।’
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बांग्लादेश में निर्वाचन आयोग के गठन पर चल रहा विवाद अब विपक्षी गोलबंदी का मुद्दा बनता दिख रहा है। बांग्लादेश में पहले भी इस मसले पर टकराव होता रहा है कि आम चुनाव की देखरेख किस संस्था के तहत हो। 2008 में जब शेख हसीना वाजेद के नेतृत्व वाली आवामी लीग सत्ता में आई थी, तब चुनाव कराने के लिए तटस्थ सरकार का गठन किया गया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद शेख हसीना सरकार ने तटस्थ सरकार की परंपरा खत्म कर दी। इसलिए अब सारा ध्यान निर्वाचन आयोग पर टिक गया है।
प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इस मसले पर कई दलों के साथ एक बैठक बुलाने का फैसला किया है। निर्वाचन आयोग के गठन पर चर्चा के लिए बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने अलग-अलग दलों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू की थी। बीएनपी और कई दलों ने इस वार्ता का बहिष्कार कर दिया है। बीएनपी ने कहा है कि राजनीतिक दलों की प्रस्तावित बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक हालत पर भी चर्चा होगी।
राजनीतिक दलों के साथ होगा विचार-विमर्श
बीएनपी के नेताओं की बैठक के बाद पार्टी महासचिव जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने एक बयान में कहा- ‘बैठक में निर्वाचन आयोग के गठन के बारे में राजनीतिक दलों के साथ और राष्ट्रपति से वार्ता के मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें फैसला हुआ कि राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।’ पार्टी ने यह नहीं बताया है कि इस बैठक में किन दलों को बुलाया जाएगा और ये बातचीत कब होगी। बीएनपी ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हमीद के आमंत्रण को बीते हफ्ते ठुकरा दिया था। उसने कहा था कि राष्ट्रपति के साथ बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलेगा।
केएम नुरुल हुडा के नेतृत्व वाले वर्तमान निर्वाचन आयोग का कार्यकाल अगले 14 फरवरी को पूरा हो जाएगा। बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक निर्वतमान आयोग का कार्यकाल खत्म होने से पहले नए आयोग का गठन हो जाना चाहिए। लेकिन बीएनपी और कई दूसरे विपक्षी दलों ने आयोग के गठन के मौजूदा तरीके का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि आयोग के गठन की शर्तों और संबंधित नियमों को तय करने के लिए एक विशेष कानून पारित कराया जाना चाहिए।
खालिदा जिया के समर्थन में रैलियां
इस बीच बीएनपी ने अपनी नेता पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को विदेश जाने की इजाजत दिलाने के लिए आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। इसके तहत अगले 12 जनवरी को देश भर में रैलियां की जाएंगी। दिसंबर में भी पार्टी ने 32 जिलों में इसी मांग पर जोर डालने के लिए रैलियां आयोजित की थीँ। बेगम जिया की सेहत खराब है। बीएनपी का दावा है कि देश के अंदर उनका सही इलाज नहीं हो सकता। जबकि सरकार का कहना है कि बेगम जिया आपराधिक मामले में सजायाफ्ता हैं, इसलिए उन्हें देश के अंदर ही इलाज कराना होगा।
बीएनपी ने देश के विशेष बल रैपिड एक्शन बटालियन की हालिया कार्रवाइयों पर सवाल उठाए हैँ। आरोप है कि बटालियन ने चिटगांव जिलों में दो लोगों को मार डाला। इस बल पर मानव अधिकार हनन के आरोप पहले भी लगे हैं। इसी इल्जाम में पिछले दिनों अमेरिका ने इसके कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे।