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वैश्विक आर्थिक आतंकवादी से परेशानी: अमेरिका-चीन संबंधों में कड़वाहट घोल रहा है जॉर्ज सोरोस को लेकर उठा विवाद

Fri, 10 Sep 2021 04:16 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 10 Sep 2021 04:16 PM IST
सार

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी टिप्पणी की शीर्षक दिया- यह वैश्विक आर्थिक आतंकवादी चीन को घूर रहा है। जानकारों का कहना है कि चीन सोरोस से इसलिए भी नाराज है कि सोरोस अमेरिकी एनजीओ ह्यूमन राइट्स वॉच को भारी चंदा देते रहे हैं, जो हांगकांग और शिनजियांग में मानव अधिकारों के कथित दमन का मुद्दा लगातार उठा रहा है...

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Controversy over George Soros is stirring up bitterness in US-China relations
यूएस और चीन का झंडा - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने पिछले दिनों हंगरी में जन्मे अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस को ‘वैश्विक आर्थिक आतंकवादी’ कहा। उसके बाद सोरोस ने कहा कि उन्होंने चीन में अमेरिकी निवेश एक बड़ी गलती रही है। यहां पर्यवेक्षकों का कहना है कि ग्लोबल टाइम्स में छपी टिप्पणियां अकसर चीन सरकार की राय होती हैं। इसलिए अंदेशा है कि ताजा विवाद से अमेरिका-चीन संबंधों में कड़वाहट और बढ़ सकती है।

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चार सितंबर को ग्लोबल टाइम्स में छपी टिप्पणी में जॉर्ज सोरोस के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। लेकिन इसमें आरोप लगाया गया कि सोरोस ने हांगकांग से प्रकाशित चीन विरोधी अखबार के मालिक जिमी लाई को आर्थिक मदद दी थी। अखबार ने कहा कि ये मदद 2019 में हांगकांग में चीन विरोधी आंदोलन भड़काने के लिए दी गई। जिमी लाई इस समय जेल में बंद हैं।
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ग्लोबल टाइम्स की इस टिप्पणी के बाद जॉर्ज सोरोस ने अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक लेख लिखा। उसमें उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क स्थित कंपनी ब्लैकरॉक ने चीन में एक अरब डॉलर का निवेश म्युचुअल फंड में किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक ‘दुखद गलती’ थी। उन्होंने आशंका जताई कि ये रकम अब पानी में डूब जाएगी। सोरोस ने लिखा कि ब्लैकरॉक के निवेश के मामले से अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए खतरा पैदा हो गया है।

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इसके पहले जॉर्ज सोरोस ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में बीते 30 अगस्त को एक लेख लिखा था। उसमें उन्होंने कहा था कि निजी कंपनियों के खिलाफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई से चीनी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। वह ध्वस्त भी हो सकती है।” वॉल स्ट्रीट जर्नल में उन्होंने लिखा कि ब्रैकरॉक ने अमेरिकी निवेशकों के पैसे चीनी कंपनियों में लगाए। जबकि उन कंपनियों का संचालन वैश्विक प्रतिमानों पर खरा नहीं उतरता है। उन सबकी जवाबदेही सिर्फ एक व्यक्ति यानी शी जिनपिंग के प्रति है। वे किसी अंतरराष्ट्रीय प्राधिकार के प्रति उत्तरदायी नहीं हैँ।

सोरोस 91 साल के हैं। उनकी कुल संपत्ति 86 अरब डॉलर की बताई जाती है। सोरोस दुनिया के बहुत से गैर-सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता देते हैं। इस कारण उनकी ऊंची प्रतिष्ठा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस कारण सोरोस के प्रति चीन का नजरिया अमेरिका सरकार को पसंद नहीं आएगा।

बताया जाता है कि चीन के साथ उनके संबंध शुरू से ही उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 2001 में उन्होंने पहली बार चीन की यात्रा की थी। तब उनकी वहां के सर्वोच्च नेताओं से बातचीत हुई थी। 2008 के वित्तीय संकट के समय उन्होंने चीन को नई विश्व आर्थिक व्यवस्था का नेता बताते हुए उसकी तारीफ की थी। लेकिन 2016 के बाद से उनके कुछ बयानों को लेकर चीन में नाराजगी बढ़ने लगी। 2019 में उन्होंने शी जिनपिंग को को ‘आजाद समाजों के लिए सबसे खतरनाक दुश्मन’ बता दिया था। अब दोनों का विवाद ऐसे वक्त पर चरमसीमा पर पहुंचता दिख रहा है, जब अमेरिका और चीन के संबंध भी बेहद खराब हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी टिप्पणी की शीर्षक दिया- यह वैश्विक आर्थिक आतंकवादी चीन को घूर रहा है। जानकारों का कहना है कि चीन सोरोस से इसलिए भी नाराज है कि सोरोस अमेरिकी एनजीओ ह्यूमन राइट्स वॉच को भारी चंदा देते रहे हैं, जो हांगकांग और शिनजियांग में मानव अधिकारों के कथित दमन का मुद्दा लगातार उठा रहा है।  

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