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ब्रिटेन के उपभोक्ता अनजाने में बने पर्यावरण विनाश के दोषी, ब्राजील के जंगलों में लगी आग के लिए हैं जिम्मेदार!

Fri, 27 Nov 2020 03:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 27 Nov 2020 03:39 PM IST
सार

  • ब्राजील के जंगलों में भीषण आग की वजह ब्रिटेन में बढ़ती चिकेन की खपत
  • चिकेन को खिलाने वाले सोया उगाने के लिए काटे गए ब्राजील के हजारों पेड़  

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Consumers of Britain became guilty of unintentional environmental destruction, responsible for Brazilian fires
Brazil Jungle Fire - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

ब्रिटिश सुपरमार्केट्स में ऐसे चिकेन की बिक्री हो रही है, जिन्हें खिलाने के लिए ब्राजील से सोया मंगवाया गया था। ये सोया उगाने के लिए हजारों पेड़ काटे गए। हाल में ब्राजील के जंगलों में जो भयंकर आग लगी थी, उसका एक कारण पेड़ों की इस कटाई को भी माना गया है। ब्रिटेन और ब्राजील में हुई एक मीडिया जांच से इस बात का खुलासा हुआ है।

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सामने आई जानकारी के मुताबिक टेस्को, लिडल, एस्डा, मैकडॉनल्ड, नैंडो आदि जैसे बड़े ब्रांड से जुड़े रिटेलर ऐसा चिकेन बेचे रहे हैं, जो पर्यावरण रक्षा प्रतिमानों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने इस बार में ग्राहकों को कोई जानकारी भी नहीं दी है। पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं ने इसे ब्रिटेन के उपभोक्ता मानकों के खिलाफ बताया है।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक इस सोया की सप्लाई अमेरिकी कंपनी कारगिल ने की। कारगिल खेती से संबंधित कारोबार करती है और वह अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनी है। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भ्रामक लेबलिंग सिस्टम के कारण इस बारे में सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। यह इल्जाम भी लगाया गया है कि इस बिक्री में शामिल होकर ब्रिटेन स्थित बड़े ब्राडों से जुड़े रिटेलर ब्राजील में जंगल के विनाश में भागीदार बने। इस रूप में वहां लगी भयंकर आग की जिम्मेदारी भी उन पर आती है।   
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मीडियाकर्मी क्रिस पैकम ने अखबार द गार्जियन से कहा इस जांच से ये साफ हुआ है कि उपभोक्ताओं को उस खाद्य के बारे में अधिक सूचना मिलनी चाहिए, जो उन्हें बेचा जाता है। उन्होंने कहा- अगर यह मालूम हो कि जो चिकेन वे खरीद रहे हैं, वह हाल के समय में जंगल में लगी सबसे भयंकर आग के लिए जिम्मेदार हैं, तो बहुत से उपभोक्ता उससे बचना चाहेंगे। हमें इस बारे में अब जागरूक होना होगा कि ब्रिटेन के सुपरमार्केट्स में हो जो चीजें खरीदते हैं, संभव है कि कहीं दूर उनकी वजह से भारी विनाश हो  रहा हो। यह मामला इसी बात का एक उदाहरण है।

ब्रिटेन में हर साल अरबों की तादात में मुर्गे-मुर्गियों को खाने के मकसद से मारा जाता है। एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में औसतन हर व्यक्ति रोज 15 पक्षियों की जान ली जाती है। इन पक्षियों को पालना एक बहुत बड़ा उद्योग है। जहां ये कारोबार होता है, वहां पक्षियों को खिलाने के लिए सोया का आयात किया जाता है। कारगिल कंपनी ही इस सोया की यहां सप्लाई करती है। कारगिल कंपनी उस सोया की खरीदारी सेराडो नामक इलाके से करती है। बताया जाता है कि ये इलाका भौगोलिक रूप से उतना बड़ा है, जिसमें ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन समा सकते हैं।

आयात आंकड़ों के मुताबिक गुजरे छह साल में (अगस्त 2020 तक) 15 लाख टन सोया का ब्रिटेन में ब्राजील से कारगिल कंपनी के जरिए आयात हुआ। कारोबार की निगरानी करने वाली संस्था ट्रेस के मुताबिक उनमें से आधे सोये का आयात सेराडो इलाके से हुआ।

ब्रिटेन में हर साल सात लाख टन सोया का आयात होता है। इसका एक बड़ा हिस्सा सेराडो इलाके से आता है। ब्रिटेन प्रोसेस्ड सोया का भी आयात करता है, जिसका तीन चौथाई हिस्सा अर्जेंटीना से आता है। जानकारों का कहना है कि ब्रिटेन के आयात का कहां पर्यावरण पर कितना बुरा असर होता है, इसका अनुमान अलग-अलग देशों के मामले में अलग-अलग है।

इस खुलासे से जो कंपनियां घेरे में आई हैं, अब उन्होंने कहा है कि वे इस मामले में ज्यादा सावधानी बरतेंगी। मैकडॉनल्ड ने कहा है कि वह 2030 तक यह व्यवस्था कर लेगी कि उसकी खरीद की वजह से कहीं जंगल ना काटना पड़े। नैंडो ने ऐसी कोई समयसीमा तो नहीं बताई है, लेकिन कहा है कि वह सोया के वैकल्पिक फसलों की खरीद के बारे में विचार कर रही है।


लेकिन पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। बल्कि यह सरकार का काम है कि वह इन कंपनियों की जवाबदेही तय करे। इन कार्यकर्ताओं ने ध्यान दिलाया है कि जंगलों की कटाई से नुकसान सिर्फ ब्राजील का नहीं हुआ है, क्योंकि उसका असर पूरे जलवायु पर पड़ेगा, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी।

 

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