फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Concerns rise among female officers in US Navy controversy over removal of names from promotion list

US Navy Women Officers: अमेरिकी नौसेना में महिला अधिकारियों की चिंता बढ़ी, प्रमोशन लिस्ट से नाम हटाने पर विवाद

Sun, 07 Jun 2026 12:29 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 07 Jun 2026 12:29 PM IST
सार

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा नौसेना की प्रमोशन सूची से महिला अधिकारियों के नाम हटाए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महिला अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इससे सेना में उनके करियर की सीमा तय होने का संदेश गया है। पेंटागन ने फैसले को योग्यता आधारित बताया, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं किए। इसी पर पूरा विवाद है। आइए, विस्तार से इसे समझते हैं...

विज्ञापन
Concerns rise among female officers in US Navy controversy over removal of names from promotion list
पीट हेगसेथ के फैसले से बढ़ा विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका की नौसेना में महिला अधिकारियों के प्रमोशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा नौसेना की प्रमोशन सूची से कई अधिकारियों के नाम हटाए जाने के बाद महिला अधिकारियों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई है। खास बात यह है कि हटाए गए अधिकारियों में सभी महिला अधिकारी भी शामिल थीं। इसके बाद कई महिला अधिकारियों ने आशंका जताई है कि अब सेना में उनके करियर की एक सीमा तय की जा रही है और आगे बढ़ने के मौके कम हो सकते हैं।
विज्ञापन

आखिर प्रमोशन सूची से क्या बदलाव किया गया?

  • अमेरिकी नौसेना ने पहले 31 अधिकारियों को कैप्टन से वन-स्टार एडमिरल रैंक पर प्रमोट करने के लिए चुना था। लेकिन बाद में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सूची से नौ अधिकारियों के नाम हटा दिए। इनमें तीन महिला अधिकारी और दो अश्वेत अधिकारी शामिल थे। इस फैसले के बाद इस साल अमेरिकी नौसेना में एक भी महिला अधिकारी को वन-स्टार एडमिरल रैंक नहीं मिल पाएगी।
  • विज्ञापन
  • साल 2024 के सैन्य आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी नौसेना के करीब एक-चौथाई अधिकारी महिलाएं हैं। इसके बावजूद शीर्ष रैंक में महिलाओं की गैरमौजूदगी ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कई महिला अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सेना में महिलाओं के भविष्य को लेकर गलत संदेश देता है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन

महिला अधिकारियों ने क्या चिंता जताई?

कई महिला अधिकारियों ने कहा कि अब उन्हें लगने लगा है कि सेना में आगे बढ़ने के मौके राजनीतिक सोच से प्रभावित हो सकते हैं। कुछ अधिकारियों ने कहा कि उन्हें महसूस हो रहा है कि उनके करियर की एक अदृश्य सीमा तय कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि अगर वरिष्ठ पदों तक पहुंचने में इस तरह हस्तक्षेप होगा तो सेना में महिलाओं का मनोबल प्रभावित होगा। कुछ अधिकारियों ने यह भी कहा कि युवा महिला सैनिकों को अब यह समझाना मुश्किल हो रहा है कि सेना में उनके लिए बराबर अवसर मौजूद हैं। कई अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा कि वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई के डर से खुलकर सामने नहीं आना चाहतीं।

क्या पेंटागन ने भेदभाव के आरोप खारिज किए?

पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि सेना में प्रमोशन केवल योग्यता के आधार पर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी सैनिक की जाति या लिंग को प्रमोशन का आधार नहीं बनाया जाएगा। हालांकि पेंटागन ने यह साफ नहीं किया कि आखिर महिलाओं और अन्य अधिकारियों के नाम सूची से क्यों हटाए गए। नौसेना में प्रमोशन की प्रक्रिया लंबे समय से तय नियमों के तहत चलती रही है। इसके तहत वरिष्ठ अधिकारियों का एक बोर्ड उम्मीदवारों की सेवा, क्षमता और रिकॉर्ड देखकर प्रमोशन तय करता है। इस बार भी बोर्ड ने सूची तैयार की थी और नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे मंजूरी दी थी।

पीट हेगसेथ पहले भी महिलाओं पर क्या बयान दे चुके हैं?

पीट हेगसेथ पहले भी सेना में महिलाओं की भूमिका को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि सेना में कई बार महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। हेगसेथ का कहना था कि सेना में प्रमोशन जाति, लिंग और प्रतीकात्मक उपलब्धियों के आधार पर नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक हेगसेथ ने पद संभालने के बाद अमेरिकी नौसेना की शीर्ष महिला अधिकारी एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी को भी पद से हटा दिया था। इसके अलावा दो अन्य वरिष्ठ महिला एडमिरलों को भी हटाया गया। इन फैसलों की वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई।

क्या इस विवाद का असर सेना के भविष्य पर पड़ेगा?

सैन्य मामलों की विशेषज्ञ कैथरीन कुजमिन्स्की का कहना है कि सेना में बढ़ती राजनीतिक दखलअंदाजी भविष्य में भर्ती और प्रमोशन दोनों को प्रभावित कर सकती है। उनका मानना है कि जब सैनिकों को लगेगा कि फैसले पेशेवर क्षमता की जगह राजनीतिक सोच से प्रभावित हो रहे हैं तो इसका असर सेना के मनोबल पर पड़ेगा। कई अधिकारियों का कहना है कि यह मुद्दा केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। पुरुष सैनिक भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सेना के रोजमर्रा के फैसलों में राजनीति का असर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में अमेरिकी सेना के भीतर यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed