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युवाओं में आत्महत्या के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता, जागरूकता बढ़ाना जरूरी
Fri, 11 Oct 2019 04:02 AM IST
गौरव पाण्डेय
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 11 Oct 2019 04:02 AM IST
सार
- सात नवंबर को बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर विश्व सम्मेलन
- 15 से 29 साल की उम्र के युवाओं में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है आत्महत्या
- विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आत्महत्याएं रोकने को जागरूकता बढ़ाने पर जोर
- विकासशील देशों में मानसिक स्वास्थ्य व आत्महत्याओं के बीच देखा गया सीधा संबध
- चंद देशों ने ही आत्महत्या रोकथाम को अपनी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
दुनिया भर में करीब आठ लाख लोग हर साल आत्महत्याओं की वजह से मौत के मुंह में चले जाते हैं। हर चालीस सेकंड में एक व्यक्ति की मौत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 15 से 29 साल की उम्र के युवाओं में मौत का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है। गुरुवार 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आत्महत्याओं को रोकने के प्रयासों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ही जोर दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य बहुत लंबे समय तक अनदेखी का शिकार रहा है। इस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है, ये एक ऐसा विषय है जिसका संबंध सब से है।
महासचिव का कहना था, 'हमें सेवाओं में और निवेश करना होगा। ऐसे कारणों को रद्द करना होगा जिनके चलते लोग जरूरत पड़ने पर चिकित्सा मदद लेने से कतराते हैं। मैं अपने मन की बात कह रहा हूँ क्योंकि मुझे इसकी चिंता है।' उन्होंने कहा, 'मानसिक स्वास्थ्य के बिना कोई स्वास्थ्य नहीं है।'
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने साल 2019 के अंतरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस को समर्थन दिया है। संगठन का कहना है कि हर वर्ष दुनिया भर में जितनी मौतें युद्ध और मानव हत्याओं की वजह से होती हैं, उनकी कुल संख्या से भी ज्यादा मौतें आत्महत्याओं के कारण होती हैं।
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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य बहुत लंबे समय तक अनदेखी का शिकार रहा है। इस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है, ये एक ऐसा विषय है जिसका संबंध सब से है।
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महासचिव का कहना था, 'हमें सेवाओं में और निवेश करना होगा। ऐसे कारणों को रद्द करना होगा जिनके चलते लोग जरूरत पड़ने पर चिकित्सा मदद लेने से कतराते हैं। मैं अपने मन की बात कह रहा हूँ क्योंकि मुझे इसकी चिंता है।' उन्होंने कहा, 'मानसिक स्वास्थ्य के बिना कोई स्वास्थ्य नहीं है।'
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने साल 2019 के अंतरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस को समर्थन दिया है। संगठन का कहना है कि हर वर्ष दुनिया भर में जितनी मौतें युद्ध और मानव हत्याओं की वजह से होती हैं, उनकी कुल संख्या से भी ज्यादा मौतें आत्महत्याओं के कारण होती हैं।
गिने-चुने देशों ने ही आत्महत्याओं की रोकथाम को अपनी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया
डब्ल्यूएचओ के सितंबर 2019 में प्रकाशित आंकड़ों में कहा गया है कि विकासशील देशों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्याओं के बीच सीधा संबध देखा गया है। साथ ही किसी मुसीबत की हालत में होने वाले सदमे, हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना भी आत्मघाती बर्ताव से बहुत गहराई से जुड़ा देखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन अब से पहले भी मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिलाते रहे हैं। इनमें बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, कामकाज के स्थानों पर मानसिक स्वास्थ्य, विभिन्न मुद्दों या विषयों पर दोषारोपण और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा जैसे विषय हैं। ये भी शामिल है कि पीड़ित को किस तरह से समर्थन व सहायता दी जाए।
इस साल भी डब्ल्यूएचओ और साझीदार संगठनों ने सितंबर में मनाए जाने वाले विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का ही संदेश दोहराया है। इस मौके पर 40 सेकंड की एक एक्शन कैंपेन चलाई गई है जिसका मकसद दुनिया भर में आत्महत्या और उसकी रोकथाम के तरीकों और उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी तक सिर्फ गिने-चुने देशों ने ही आत्महत्याओं की रोकथाम को अपनी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सिर्फ 38 देशों ने राष्ट्रीय स्तर पर रोकथाम रणनीति बनाई है। आत्महत्याओं को रोका जा सकता है, फिर भी अंधविश्वास और दोषारोपण के चलते इस मुद्दे को सही तरह से नहीं समझा गया है।
संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन अब से पहले भी मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिलाते रहे हैं। इनमें बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, कामकाज के स्थानों पर मानसिक स्वास्थ्य, विभिन्न मुद्दों या विषयों पर दोषारोपण और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा जैसे विषय हैं। ये भी शामिल है कि पीड़ित को किस तरह से समर्थन व सहायता दी जाए।
इस साल भी डब्ल्यूएचओ और साझीदार संगठनों ने सितंबर में मनाए जाने वाले विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का ही संदेश दोहराया है। इस मौके पर 40 सेकंड की एक एक्शन कैंपेन चलाई गई है जिसका मकसद दुनिया भर में आत्महत्या और उसकी रोकथाम के तरीकों और उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी तक सिर्फ गिने-चुने देशों ने ही आत्महत्याओं की रोकथाम को अपनी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सिर्फ 38 देशों ने राष्ट्रीय स्तर पर रोकथाम रणनीति बनाई है। आत्महत्याओं को रोका जा सकता है, फिर भी अंधविश्वास और दोषारोपण के चलते इस मुद्दे को सही तरह से नहीं समझा गया है।
ये कदम उठाने हैं जरूरी
- इस विषय पर जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग
- स्कूल में ही स्थिति को समझा जाए
- मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और मादक पदार्थों के सेवन करने वाले लोगों में लक्षणों की शुरूआती स्तर ही निशानदेही और इलाज
- आत्मघाती व्यवहार की निशानदेही करने और उसको समझने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों का विशेष प्रशिक्षण
- आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों को मुहैया कराई जा रही चिकित्सा सेवा की निगरानी, साथ ही सामुदायिक सहायता का इंतेजाम
संयुक्त राष्ट्र ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वस्थ कामकाजी माहौल मुहैया कराने के लिए 2018 में एक फ्रेमवर्क लागू किया था। इसके तहत संगठन के हजारों कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित संसाधन मुहैया कराए गए हैं।
डब्ल्यूएचओ ने 2008 में मानसिक स्वास्थ्य अंतर कार्रवाई कार्यक्रम (एमएच-गैप) शुरू किया था। संगठन के 2013-2020 की कार्रवाई योजना में विश्व स्तर पर आत्महत्याओं की दर में 2020 तक 10 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। ये संगठन के टिकाऊ विकास लक्ष्यों से मेल खाता है जिनमें खुदकुशी दर में 2030 तक एक तिहाई की कमी लाने की लक्ष्य रखा गया है।
सात नवंबर को होगा विश्व सम्मेलन
इस मामले में युवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के साथ हाथ मिलाया है। इन प्रयासों के तहत सात नवंबर को बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर एक विश्व सम्मेलन बुलाया गया है।इटली के फ्लोरेंस में तीन दिन के इस सम्मेलन में दुनिया भर के विशेषज्ञ और युवा पैरोकार शिरकत करेंगे। इसमें बच्चों और युवाओं के लिए उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खाई पर विचार किया जाएगा।