शताब्दी वर्ष में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने छेड़ा है आत्म-प्रशंसा का अभियान
आलोचकों का कहना है कि सीपीसी ने एक तानाशाही व्यवस्था कायम कर रखी है। इसी के तहत वह लोगों को समझाने में जुटी है कि उसके बिना नए चीन का वजूद नहीं बचेगा...
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने फिर दावा किया है कि उसकी नीतियों की वजह से चीन को एक आधुनिक और समृद्ध देश बनने का सपना साकार हुआ है। गौरतलब है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) अपनी स्थापना की 100वीं सालगिरह मनाने की तैयारियों में जुटी है। इस वर्ष एक जुलाई को वह अपनी शताब्दी मनाएगी। इस मौके पर कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ लगातार कई दस्तावेज जारी किए जा रहे हैं। साथ ही स्कूलों में लेख प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ है। कुछ फिल्में भी बनाई गई हैं। पूरे देश में जगह-जगह बैनर लगाए जा रहे हैं। चीनी मीडिया में कम्युनिस्ट पार्टी के योगदान की चर्चा लगातार की जा रही है।
सीपीसी की स्थापना जुलाई 1921 में हुई थी। उस समय चीन अंदरूनी विभाजन और गरीबी का शिकार था। सीपीसी ने उसके खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। आखिरकार 1949 में हुई क्रांति के बाद वह सत्ता में आ गई। सीपीसी का दावा है कि उसके बाद वह देश को आधुनिकता की राह पर ले गई है। अब वह महाशक्ति बनने की राह पर है। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। विश्लेषकों का कहना है कि शताब्दी के मौके पर सीपीसी इन सारी उपलब्धियों पर अपना दावा जमा रही है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि सीपीसी ने एक तानाशाही व्यवस्था कायम कर रखी है। इसी के तहत वह लोगों को समझाने में जुटी है कि उसके बिना नए चीन का वजूद नहीं बचेगा। ऑस्ट्रेलियन स्ट्रटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलॉ पीटर मैटिस ने अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘सीपीसी ने शताब्दी समारोहों को यह बताने का मौका बनाया है कि उसने चीन की प्राचीन सभ्यता के साथ निरंतरता बनाए रखी है। खास कर 2017 में हुई पार्टी की 19वीं कांग्रेस (अधिवेशन) के बाद से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मानवता की समस्याओं के लिए चीनी समाधान मुहैया कराने की बात करते रहे हैं। शताब्दी के मौके पर अब यह बताया जा रहा है कि ये सारी उपलब्धि कम्युनिस्ट पार्टी ने हासिल की है।’
शी जिनपिंग 2012 में पार्टी प्रमुख बने। जानकारों के मुताबिक तब से ही उन्होंने पार्टी के शताब्दी वर्ष के लिए लक्ष्यों की चर्चा शुरू कर दी। तब उन्होंने कहा था कि उनका लक्ष्य 2021 तक चीन को मध्यम रूप से समृद्ध देश बनाना है। चीन का अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाना, देश को इंटरनेट महाशक्ति बनाना और गरीबी को खत्म करना उनके घोषित लक्ष्यों में शामिल था। उन्होंने इसे ‘चीन का सपना’ (चाइनीज ड्रीम) कहा था। इस साल फरवरी में चीन ने एलान किया कि देश में चरम गरीबी को खत्म कर दिया गया है। इसी महीने उसने नया अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के एक अहम हिस्से को पूरा किया। साथ ही उसका यान मंगल ग्रह पर उतरा। इंटरनेट के क्षेत्र में उसकी कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो चुकी हैँ।
लेकिन इस बीच शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के कथित दमन का मसला अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में छाया हुआ है। इससे पश्चिमी देशों में चीन की छवि धूमिल हुई है। इसके अलावा चीन का प्रति व्यक्ति जीडीपी अभी भी वैश्विक औसत 11 हजार डॉलर प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति की तुलना में बहुत कम है। देश में अभी भी बहुत से लोग बेहतर क्वॉलिटी के हेल्थ केयर और शिक्षा से वंचित हैं। आलोचकों का कहना है कि सीपीसी इन मसलों पर चर्चा नहीं होने दे रही है। वह सिर्फ अपनी उपलब्धियों का बखान कर रही है।