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Climate crisis: यूरोप-अमेरिका तक कैसे पहुंची हीट वेव, क्यों गर्म हो रहे ठंडे देश? वैज्ञानिकों ने बताया कारण

Fri, 29 Jul 2022 12:36 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Fri, 29 Jul 2022 12:36 PM IST
सार

स्टडी में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के साथ दुनिया के अगल-अगल हिस्सों में हीट वेव की श्रृंखला शुरू हुई। जुलाई के मध्य में ब्रिटेन में अत्यधिक गर्मी महसूस की गई और अब अमेरिका में गर्मी चिंता का विषय बन रही है।

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Climate crisis in world: Why cold regions Europe and America heating up, Scientists told the reason
यूरोप में भीषण गर्मी - फोटो : Social media

विस्तार

भारत में 40 डिग्री पारा अब सामान्य बात हो चुकी है, लेकिन यूरोप में यह असामान्य और गंभीर चिंता का विषय है। पिछले कुछ दिनों से यहां का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसको लेकर मौसम वैज्ञानिक चिंतित हैं। अब वर्ल्ड वेदर एट्रिव्यूशन नेटवर्क की एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने पूरे विश्व के लिए चेतावनी जारी की है। कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न को प्रभावित कर रहा है, जिससे दुनिया भर भीषण गर्मी की चपेट में है। 

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डब्ल्यूडब्ल्यूए, 'यूके हीट वेव स्पेल' पर शुक्रवार को अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया है। कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी में 10 गुना का इजाफा होने की संभावना है। विश्लेषण किए गए मॉडल बताते हैं कि पूर्व-औद्योगिक समय आज की तुलना में लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस ठंडा था, लेकिन अब इसमें करीब दो डिग्री का इजाफा हो चुका है। 
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भारत-पाकिस्तान से शुरू हुई हीट वेव 
स्टडी में कहा गया है कि औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि वायुमंडलीय और वैश्विक परिसंचरण पैटर्न को बदल रही है। इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के साथ दुनिया के अगल-अगल हिस्सों में हीट वेव की श्रृंखला शुरू हुई। जुलाई के मध्य में ब्रिटेन में अत्यधिक गर्मी महसूस की गई और अब अमेरिका में गर्मी चिंता का विषय बन रही है। 
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भारत-पाक में 30 गुना अधिक गर्मी 
डब्ल्यूडब्ल्यूए की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च व अप्रैल के महीने में भारत और पाकिस्तान में भीषण गर्मी पड़ी। यह मानव जनित जलवायु परिवर्तन के कारण 30 गुना अधिक थी। इसके बाद 18 और 19 जुलाई को, हीट वेव ने ब्रिटेन के बड़े हिस्से को प्रभावित किया। यहां पहली बार 40 डिग्री सेल्सियस तापमान मापा गया। 

यूरोप में 1911 के बाद सबसे शुष्क मानसून 
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तरह ब्रिटेन में भी प्री-मानसून सीजन बेहद शुष्क था और यह लंबे समय तक ऐसा ही रहा। जुलाई 1911, बाद से इस साल ब्रिटेन में सबसे शुष्क मानसून था। रिपोर्ट के अनुसार हाल के महीनों में पूरे महाद्वीपीय यूरोप में सूखे की स्थिति भी व्यापक है।


भीषण गर्मी से बढ़ रहा मौत का आंकड़ा 
यूरोप में भीषण गर्मी ने लोगों के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। स्पेन-पुर्तगाल में बीते सात महीनों में 1000 लोगों की जान चली गई है। ब्रिटेन में बीते दिनों तापमान 41 डिग्री को पार कर गया था। 

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