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शोध में दावा, खुशी और पीड़ा के बीच संतुलन बनाता है मस्तिष्क में मौजूद सर्किट

Thu, 02 Jan 2020 04:11 AM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Thu, 02 Jan 2020 04:11 AM IST
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Circuit in the brain creates a balance between happiness and suffering says in US research
सांकेतिक तस्वीर

मस्तिष्क में एक सर्किट होती है जो खुशी और पीड़ा के बीच संतुलन बनाकर रखती है। शरीर के किसी अंग में दर्द होने पर यही सर्किट उस दर्द को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। ये सब जब मस्तिष्क के नियंत्रण से बाहर हो जाता है तब व्यक्ति मानसिक रोग जैसे अवसाद और चिंता से ग्रस्त हो जाता है। मस्तिष्क में इस तरह की सर्किट का खुलासा अमेरिका के कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैबोरेटरी के शोध में हुआ है जो हाल ही न्यूरॉन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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शोध के अनुसार मस्तिष्क के भीतर अलग-अलग तरह की तंत्रिकातंत्र होते हैं। इनका काम सकारात्मक व नकारात्मक विचारों को नियंत्रण करने के साथ मस्तिष्क को सूचना पहुंचाना होता है। शोधकर्ता बो ली का कहना है कि तंत्रिका तंत्र ही तय करते हैं कि  व्यक्ति खुशी को महसूस करे जिससे उसे पीड़ा का अहसास न हो या कम हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसिक रोग से ग्रसित लोगों में तंत्रिकातंत्र सही से काम नहीं करती है। इसी कारण अवसाद से ग्रसित व्यक्ति ऐसा कुछ नहीं करता है जिससे उसे खुशी महसूस हो। वहीं जो घबराहट या चिंता से जूझते हैं वे डर और खतरे को लेकर किसी भी हद तक जा सकते हैं क्योंकि इनमें तंत्रिका तंत्र सही से काम नहीं करती है।

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चूहों पर किया गया अध्ययन

वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन किया। इसमें चूहे को पानी पीने और हवा की आवाज को पहचाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद तकनीक के जरिए चूहे के मस्तिष्क के वेंट्रल पैलिडम की निगरानी की गई। इसमें पता चला कि  तंत्रिका तंत्र जो गाबा नाम के संदेशवाहक  केमिकल छोड़ती है। इसी से चूहे के दिमाग के भीतर पानी पीने की उत्सुकता और खुशी देखी गई। इसी आधार पर बो ली का दावा है कि तनाव और अवसाद से ग्रसित लोगों के स्वभाग में बदलाव का कारण इस सर्किट में बदलाव होना होता है।

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दिमाग का ये हिस्सा होता है अहम

वैज्ञानिकों का कहना है कि सम्मान और सजा को लेकर व्यक्ति जब चीजों को समझता है और उसका जवाब देता है तो इसमें दिमाग के वेंट्रल पैलिडम की अहम भूमिका होती है। इसी तरह पशु को कुछ चाहिए जैसे पानी या खाना या वे किसी तरह की सजा से बचना चाहता है तो उसके दिमाग का ये हिस्सा (वेंट्रल पैलिडम) सक्रिय हो जाता है।

मस्तिष्क के कोशिकाओं की निगरानी

वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की इस क्रिया को समझने के लिए विशेष प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जिससे एक-एक कोशिका का अध्ययन किया और उनकी पहचान की गई कि मस्तिष्क की दूसरी कोशिकाओं से वे कैसे भिन्न हैं।

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