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जबरन धर्मांतरण ‘गैर इस्लामी व संविधान विरुद्ध': सीआईआई

Fri, 10 Jan 2020 03:48 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 10 Jan 2020 03:48 AM IST
सार

  • धर्मांतरण करने वालों के लिए एक प्रोफार्मा बनाने का दिया प्रस्ताव
  • जुलाई में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जबरन धर्मांतरण की प्रथा को गैर-इस्लामी कहा था

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CII says, Religion conversion by forcely is non Islamic and against the Constitution
डॉ किबला अयाज, अध्यक्ष, सीआईआई - फोटो : facebook

विस्तार

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की जबरन धर्मांतरण की बढ़ती खबरों को सांविधानिक निकाय काउसिंल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (सीआईआई)ने इस प्रथा को ‘गैर इस्लामी और संविधान के विरुद्ध’ बताया है। सांविधानिक निकाय से इस्लाम संबंधी मुद्दों पर संसद को कानूनी सलाह देने की मांग की गई थी।

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दी न्यूज में सूत्रों के हवाले से छपी खबर के मुताबिक  सीआईआई ने अपने दो दिवसीय सत्र में जबरन धर्मांतरण मुद्दे पर चर्चा करने के साथ ही परामर्श प्रक्रिया में अल्पसंख्यक नेताओं को शामिल करने का फैसला लिया। वहीं सीआईआई की प्रेस कांफ्रेंस के बाद पाकिस्तान के विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री फवाद चौधरी ने परिषद पर ही सवाल उठा दिये।
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छपी खबर में कहा गया है कि सीआईआई का विचार है कि इस्लाम जबरन धर्मांतरण की मंजूरी नहीं देता है। इसके साथ ही धार्मिक मामलों के मंत्रालय को प्रस्ताव दिया गया है कि वह ऐसे लोगों के लिए एक प्रोफार्मा बनाए जो धर्मांतरण करना चाहते हैं या इस्लाम स्वीकारना चाहते हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जुलाई में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जबरन धर्मांतरण की प्रथा को गैर-इस्लामी करार देेत हुए कहा था कि इस्लाम के इतिहास में जबरन धर्मांतरण का कोई उदाहरण नहीं है।

हम कैसे किसी गैर मुसलमान को शादी करके या बंदूक के दम पर धर्मांतरण करा सकते हैं। उसी महीने सिंध विधानसभा में जबरन धर्मांतरण, हिंदू लड़कियों के अपहरण रोकने और ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग वाला प्रस्ताव एकमत से पास हुआ था।


पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर उनका जबरन धर्मांतरण कर, निकाह कराने की भारत ने बार-बार निंदा की है।

सीआईआई के अध्यक्ष डॉ किबला अयाज ने कहा कि जबरन धर्मांतरण इस्लामी शिक्षा का उल्लंघन है साथ ही यह संविधान का भी उल्लंघन है।

विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि आज तक देश के विभिन्न धार्मिक वर्गों को वैचारिक काउंसिल के  दिशा-निर्देश की जरूरत नहीं पड़ी। पता नहीं क्यों ऐसे संस्थानों पर सरकारी पैसा खर्च किया जाता है।

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