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Chinese Spy Balloon: अमेरिका ही नहीं इन देशों की भी जासूसी कर गया चीनी गुब्बारा! दुनिया को नहीं लगने दी भनक

Sun, 05 Feb 2023 07:57 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 05 Feb 2023 07:57 PM IST
सार

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि चीनी जासूसी गुब्बारा कुछ दिन पहले चीन से अलास्का के पास अलेउतियन आईलैंड आया था। यहां से उत्तर-पश्चिम कनाडा होते हुए यह मोंटाना शहर पहुंचा था। रक्षा मामलों और देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी से जुड़े रहे रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं जिस तरीके से अमेरिका ने चीन के जासूसी गुब्बारे पर रिएक्शन देते हुए उसको मार गिराया वह किसी भी देश के लिए स्वाभाविक प्रक्रिया है।

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Chinese Spy Balloon: Not only America Chinese balloon spied on these countries too news in hindi
अमेरिका के प्रहार के बाद चीनी जासूसी गुब्बारा समुद्र में गिरा - फोटो : Social Media

विस्तार

अमेरिका ने जिस चीनी जासूसी गुब्बारे को मार गिराया दरअसल वह अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया के कई मुल्कों की भी जासूसी कर गया। इसने कनाडा समेत यूरोप के उत्तरी इलाके के कई देशों की न सिर्फ खुफिया जानकारियां समेटी बल्कि दुनिया के कई बड़े समुद्री मार्गों पर होने वाली गतिविधियों को भी ऐसी खुफिया जानकारियां चीन को भेज दीं। हालांकि चीन में इस गुब्बारे को महज मौसम की जानकारी लेने वाला एयरशिप करार देते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज किया है। विदेशी मामलों के जानकार बताते हैं कि चीन इससे पहले भी ऐसे कई एयरशिप प्रोग्राम को ना सिर्फ लांच कर चुका है बल्कि उसकी लॉन्चिंग से लेकर लैंडिंग तक पर चीनी सेना के बड़े अधिकारियों ने गर्मजोशी से उसका स्वागत भी किया है। फिलहाल अमेरिका के एयर स्पेस में उड़ रहे इस गुब्बारे को तबाह किए जाने के बाद चीन और अमेरिका में तनाव बढ़ गया है।  

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विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि चीनी जासूसी गुब्बारा कुछ दिन पहले चीन से अलास्का के पास अलेउतियन आईलैंड आया था। यहां से उत्तर-पश्चिम कनाडा होते हुए यह मोंटाना शहर पहुंचा था। रक्षा मामलों और देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी से जुड़े रहे रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं जिस तरीके से अमेरिका ने चीन के जासूसी गुब्बारे पर रिएक्शन देते हुए उसको मार गिराया वह किसी भी देश के लिए स्वाभाविक प्रक्रिया है। उनका कहना है कि अमेरिका के ऊपर उड़ रहे इस जासूसी गुब्बारे ने सिर्फ अमेरिका की ही सूचनाएं प्राप्त की बल्कि वह जिन दूसरे और मुल्कों से उड़ते हुए आया है उसकी भी सूचनाएं उस पूरे गुब्बारे में थीं। उनका कहना है कि यह हमारा चीन के उत्तरी इलाके से होता हुआ एशिया और यूरोप के देशों की सीमा के ऊपर से गुजरते हुए कनाडा के उत्तर से अमेरिका के एयर स्पेस में पहुंचा। वह कहते हैं कि अमेरिका ने इस गुब्बारे पर जासूसी का आरोप लगाया। जाहिर सी बात है जो गुब्बारा दुनिया के अलग-अलग देशों और समुद्री सीमाओं से गुजरते हुए अमेरिका पहुंचा वह कैसे उन देशों की भी जासूसी नहीं करके आया होगा जिनकी सीमाओं से वह गुजरा था। 
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विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि जासूसी के लिहाज से एयर शिप या सपाई बलून का पहले भी इस्तेमाल होता रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर और चीनी मामलों के जानकार डॉक्टर अभिषेक सिंह कहते हैं कि चीन ने ऐसा पहली बार बिल्कुल नहीं किया। वह कहते हैं कि चीन हमेशा से अपने सिविलियन प्रोजेक्ट के माध्यम से इस तरीके की जासूसी पहले भी करता रहा है। कुछ साल पहले भी चीन ने ऐसा ही एयर शिप लांच किया था। जो कि बाद में अपने सफर को तय करने के बाद तिब्बत के एक इलाके में लैंड किया गया। अभिषेक कहते हैं कि जब यह एयरशिप तिब्बत की जमीन पर लैंड किया तो चीनी सेना के बड़े अधिकारियों ने लैंडिंग प्लेस पर पहुंचकर इसका स्वागत किया था। अभिषेक सवाल उठाते हुए कहते हैं कि कोई प्रोजेक्ट सिविलियान एक्टिविटी के लिए लांच किया जाता है तो उसमें सेना का रोल तो होना ही नहीं चाहिए। लेकिन तिब्बत में इस एयरशिप की लैंडिंग वक्त चीनी सेना के अधिकारियों की मौजूदगी बताती है कि सिविलियन एक्टिविटी के माध्यम से किस तरीके से वह मॉनिटरिंग और सर्विलांस करते हैं।
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दरअसल चीन सिर्फ एयर स्पेस के माध्यम से ही नहीं बल्कि समुद्री मार्गों के माध्यम से भी जासूसी करता आया है। कुछ समय पहले ही चीन ने भारत की समुद्री सीमा से गुजरते हुए अपने एक जहाज युआन वांग 5 को श्रीलंका के हंबनटोटा की ओर रवाना किया था। अभिषेक कहते हैं जब यह जहाज हंबनटोटा की ओर रवाना हुआ तभी से चीनी मंशा पर सवाल उठाए जाते रहे कि उनका यह जहां जासूसी करने के लिए ही निकला है। इसी तरह आकाश मार्ग से भी चीन ने अपने एयरशिप स्पाई बैलून को दुनिया के एक बड़े हिस्से की जासूसी करने के लिए रवाना किया। क्योंकि अमेरिका को न सिर्फ इस पर एतराज था बल्कि अमेरिकी एयर स्पेस नियमों का वायलेशन भी था। डॉक्टर अभिषेक कहते हैं कि इस स्पाई बैलून ने जो रूट लिया था उससे एशिया के कई देशों समेत यूरोप और अमेरिकी महाद्वीप के देश शामिल थे। रक्षा मामलों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि स्पाई बैलून के माध्यम से खुफिया जानकारियां इकट्ठा करना किसी भी सेटेलाइट की तुलना में ज्यादा स्पष्ट होता है। यही वजह रही कि चीन के इस स्पाई बैलून को अमेरिका ने मौका देखते ही समुद्री इलाके में मार गिराया। 

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