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पांच दशक बाद भारत से वापस अपने देश लौटकर भावुक हुआ चीनी सैनिक

Sun, 12 Feb 2017 08:45 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Feb 2017 08:45 AM IST
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chinese soldier wang qi takes off from delhi to home after 54 years
फाइल फोटोः वांग की - फोटो : Social Media
पांच दशकों तक अपने देश पहुंचने की लगातार कोशिशों के बाद 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के समय भारत में आ गए चीनी सैनिक आखिरकार अपने देश पहुंचने में सफल हो गए। अपने चीनी परिवार के साथ जुड़े भावुक संबंधों के कारण वे अपने भारतीय परिवार के साथ शनिवार को चीन पहुंचे।
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77 वर्षीय वांग की का भारतीय दूतावास और चीनी विदेश मंत्रालय के साथ उनके चीनी संबंधियों ने उस समय जोरदार स्वागत किया जब वह दिल्ली-बीजिंग विमान से अपने बेटे-बहू और पोती के साथ वहां पहुंचे। वहां मौजूद एक एयरपोर्ट अधिकारी ने बताया कि भारतीय सीमा में चले जाने के पांच दशकों के बाद पहली बार अपने संबंधियों से गले लगते हुए वांग भावुक हो गए। यह एक बेहद ही भावुक मिलन था। 
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वांग के साथ उनके 35 वर्षीय बेटे विष्णु वांग, बहू नेहा और पोती खनक वांग भी चीन गए जबकि उनकी भारतीय पत्नी सुशीला यहीं पर रुक गई हैं। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वांग और उनका परिवार इसके बाद शांक्सी प्रांत की राजधानी शियान जाएंगे, जहां से वे अपने पैतृक गांव श्यू झाई नन कुन जाएंगे।
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भारत और चीन के सहयोग से वांग के वापस चीन लौटने में सहूलियत हुई। अब वांग और उनका परिवार एक साथ चीन यात्रा कर सकते हैं और अपनी इच्छा अनुसार वापस भी लौट सकते हैं। दरअसल वांग को 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सीमा में घुसने के कारण पकड़ लिया गया था। 1969 में जेल से छुटने के बाद वे मध्य प्रदेश के वालाघाट जिले के तिरोड़ी गांव में बस गए थे। 

युद्ध के दौरान रास्ता भटक कर आ गए थे भारत

chinese soldier wang qi takes off from delhi to home after 54 years
हालांकि भारतीय मीडिया ने उनकी कहानी को कई बार छापा मगर हाल ही में बीबीसी टीवी पर उनकी दुखद कहानी दिखाए जाने पर चीनी मीडिया ने इसे हाथों हाथ लिया। चीनी सोशल मीडिया ने बीबीसी के उस टीवी फीचर को व्यापक तौर पर प्रसारित करने के साथ ही उनकी वापसी के लिए चीनी सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की। इसके बाद चीनी सरकार ने भारत के साथ मिलकर उनको चीन आने के लिए वीजा उपलब्ध करवाया, जबकि भारत सरकार ने वांग को वापस आने के लिए वीजा दिया जिससे अगर वे चाहें तो वापस भारत आ सकते हैं।

भारत और चीन के बीच चीन-पाक आर्थिक गलियारा, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के प्रवेश को चीन द्वारा रोकने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को आतंकी सूची में डालने से चीन द्वारा रोकने जैसे विवादों के बीच भारतीय अधिकारियों द्वारा वांग और उनके परिवार को चीन जाने की सुविधा देने को दोनों तरफ से एक सकारात्मक कदम के रुप में देखा जा रहा है।

युद्ध के दौरान रास्ता भटक कर आ गए थे भारत
वर्ष 1960 में वांग चीनी सेना में भर्ती हुए थे और एक रात को अंधेरे में रास्ता भटक जाने के बाद वह पूर्वी फंट्रियर के रास्ते भारत में दाखिल हो गए थे। रास्ता भटककर असम पहुंचे वांग को भारतीय रेड क्रॉस दल ने एक जनवरी 1963 को भारतीय सेना को सौंप दिया था। उन पर जासूसी के भी आरोप लगे थे और उन्हें विभिन्न जेलों में छह से सात साल रखा गया। जेल से छूटने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोड़ी में छोड़ दिया गया था।
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