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एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए खतरा हैं चीनी मिसाइलें
Wed, 21 Aug 2019 02:14 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 21 Aug 2019 02:14 AM IST
सार
- एशिया में अमेरिका के सैन्य ठिकाने गुआम, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में हैं
- पीएलए भी इस तरह की प्रक्रिया में किसी भी अमेरिकी सैन्य भागीदारी को शामिल होने से रोकना चाहती है
- क्रूज मिसाइल चीन के ‘काउंटर इंटरवेंशन’ प्रयासों का केंद्र बिंदु है
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चीनी मिसाइल
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विस्तार
चीन के पास अब एशिया के आसपास अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तबाह करने की क्षमता है। चीन अपनी शक्तिशाली पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (पीएलएआरएफ) के शस्त्रागार के भीतर मौजूद पारंपरिक मिसाइलों के माध्यम से ऐसा कर सकता है। एशिया में अमेरिका के सैन्य ठिकाने गुआम, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में हैं।
इस बात का खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है। चीन की रणनीति अब किसी भी तरीके से दोबारा ताइवान को हासिल करने की है, चाहे फिर इसके लिए उसे बल का इस्तेमाल करना पड़े या फिर किसी और तरीके का। पीएलए भी इस तरह की प्रक्रिया में किसी भी अमेरिकी सैन्य भागीदारी को शामिल होने से रोकना चाहती है।
सिडनी यूनिवर्सिटी में अमेरिका के अध्ययन केंद्र द्वारा इस महीने में प्रकाशित ‘एवरटिंग क्राइसिस’ नाम की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रणनीति, सैन्य खर्च और भारत-प्रशांत में सामूहिक रक्षा’ शीर्षक से यह चेतावनी दी गई कि पारंपरिक सशस्त्र बैलिस्टिक में चीन का भारी निवेश है और क्रूज मिसाइल चीन के ‘काउंटर इंटरवेंशन’ प्रयासों का केंद्र बिंदु है।
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रिपोर्ट ये भी कहा गया है कि पिछले 15 वर्षों में पीएलए ने मिसाइलों और लांचरों की अपनी सूची की रेंज को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया, उन्नत और विस्तारित किया है, जिसे अमेरिका की सरकार ने दुनिया में सबसे सक्रिय व विविध बैलिस्टिक मिसाइल विकास कार्यक्रम कहा है।
इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपनी सेना को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इतना ही नहीं, वह सैन्य उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जासूसों का इस्तेमाल करके आधुनिक तकनीक की चोरी कर रहा है।
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इस बात का खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है। चीन की रणनीति अब किसी भी तरीके से दोबारा ताइवान को हासिल करने की है, चाहे फिर इसके लिए उसे बल का इस्तेमाल करना पड़े या फिर किसी और तरीके का। पीएलए भी इस तरह की प्रक्रिया में किसी भी अमेरिकी सैन्य भागीदारी को शामिल होने से रोकना चाहती है।
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सिडनी यूनिवर्सिटी में अमेरिका के अध्ययन केंद्र द्वारा इस महीने में प्रकाशित ‘एवरटिंग क्राइसिस’ नाम की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रणनीति, सैन्य खर्च और भारत-प्रशांत में सामूहिक रक्षा’ शीर्षक से यह चेतावनी दी गई कि पारंपरिक सशस्त्र बैलिस्टिक में चीन का भारी निवेश है और क्रूज मिसाइल चीन के ‘काउंटर इंटरवेंशन’ प्रयासों का केंद्र बिंदु है।
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रिपोर्ट ये भी कहा गया है कि पिछले 15 वर्षों में पीएलए ने मिसाइलों और लांचरों की अपनी सूची की रेंज को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया, उन्नत और विस्तारित किया है, जिसे अमेरिका की सरकार ने दुनिया में सबसे सक्रिय व विविध बैलिस्टिक मिसाइल विकास कार्यक्रम कहा है।
इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपनी सेना को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इतना ही नहीं, वह सैन्य उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जासूसों का इस्तेमाल करके आधुनिक तकनीक की चोरी कर रहा है।