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सेंधमारी: चीनी हैकरों पर मेकांग नदी का डाटा चुराने का आरोप

Fri, 23 Jul 2021 12:41 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नॉम पेन/हनोई।
एजेंसी, नॉम पेन/हनोई। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 23 Jul 2021 12:41 AM IST
सार

इस मामले में करीब से जुड़े दो सूत्रों ने बताया है कि इस हैकिंग का लक्ष्य कंबोडिया का विदेश मंत्रालय था और उसकी चीन के साथ मेकांग नदी के इस्तेमाल को लेकर चर्चा भी की गई।

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Chinese hackers stole mekong river data from Cambodian ministry
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : Social media

विस्तार

इस साल की शुरुआत में एक अमेरिकी अभियोग में चीन पर वैश्विक साइबर जासूसी अभियान का आरोप लगाते हुए चीनी हैकरों पर कंबोडिया को लेकर लक्ष्य साधा गया। इसमें मेकांग नदी का डाटा भी शामिल है, जिस पर चीन द्वारा डाटा चोरी करने का आरोप है। दक्षिण सागर की तरह मेकांग नदी भी अब डाटा चोरी को लेकर चीन-अमेरिकी प्रतिद्वंद्विता का मोर्चा बन गई है।

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करीब 30 पेज के अमेरिकी अदालत में लगाए गए इस अभियोग को चीन ने राजनीति से प्रेरित बताया है। उधर, कंबोडिया भी एशियाई सहयोगियों में बीजिंग का सबसे वफादार साथी है। ऐसे में दोनों से जब इस अभियोग को लेकर बात करने की कोशिश की गई तो किसी ने भी जवाब नहीं दिया।
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अभियोग के मुताबिक हैकरों ने यह डाटा 2018 में चुराया। अभियोग में कहा गया है कि जिस दिन कंबोडिया ने चीन समर्थित नेताओं के शिखर सम्मेलन की नाम पेन में मेजबानी की गई उसी दिन 10 जनवरी 2018 को चीन, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम के व्यापार और मालिकाना हाइड्रोकॉस्टिक डाटा चुराया गया।
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यह है विवाद की जड़
मेकांग नदी 4,350 किलोमीटर (2,700 मील) लंबी है और कंबोडिया तथा वियतनाम से होती हुई म्यांमार, लाओस और थाईलैंड की सीमाओं के साथ चीन में बहती है। इस नदी पर कई सहस्त्राब्दियों से खेती और मछली पकड़ने वाले बड़े समुदाय का व्यापार जुड़ा हुआ है।


इस कारोबार पर चीन की निगाह लगी है। ऐसे में वह दूसरे देशों का हिस्सा मारकर नदी पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। इसीलिए मेकांग नदी को लेकर एकत्रित डाटा चुराकर वह क्षेत्र और पानी के नीचे तक निगरानी रखना चाहता है। जबकि अमेरिका मुक्त और खुले मेकांग क्षेत्र का समर्थन करता है।

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