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वांग यी की नेपाल यात्रा: देउबा सरकार किस हद तक आश्वस्त कर पाएगी चीन को?

Thu, 24 Mar 2022 04:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 24 Mar 2022 04:03 PM IST
सार

अक्तूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेपाल आए थे। इस बीच हाल में ये धारणा बनी है कि देउबा सरकार की नीति अमेरिका के पक्ष में झुक रही है। अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से आर्थिक मदद लेने के करार का संसदीय अनुमोदन कराने के लिए देउबा सरकार ने एड़ी-चोटी का जैसा जोर लगाया, उससे ये धारणा बनी...

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Chinese Foreign Minister Wang Yi will visit Nepal from March 25 to 27
चीन के विदेश मंत्री वांग यी का नेपाल दौरा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में सारा ध्यान यह देखने पर टिक गया है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी की तीन दिन की यात्रा का क्या नतीजा रहता है। वांग 25 से 27 मार्च तक नेपाल की यात्रा करेंगे। नेपाली अखबारों में इस तरफ खास ध्यान खींचा गया है कि पिछले साल शेर बहादुर देउबा के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह सबसे महत्त्वपूर्ण विदेशी अधिकारी की नेपाल यात्रा होगी।

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यहां ये आम राय है कि पिछले दो साल में नेपाल और चीन के रिश्तों में कुछ ठहराव आ गया है। अक्तूबर 2019 के बाद दोनों देशों के किसी बड़े नेता ने दूसरे देश की यात्रा नहीं की। अक्तूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेपाल आए थे। इस बीच हाल में ये धारणा बनी है कि देउबा सरकार की नीति अमेरिका के पक्ष में झुक रही है। अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से आर्थिक मदद लेने के करार का संसदीय अनुमोदन कराने के लिए देउबा सरकार ने एड़ी-चोटी का जैसा जोर लगाया, उससे ये धारणा बनी। उसके बाद यूक्रेन युद्ध के मामले में नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी रुख के मुताबिक मतदान किया।

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चीन के खिलाफ नहीं नेपाल

नेपाली विश्लेषकों के मुताबिक वांग की यात्रा के दौरान नेपाली नेताओं की कोशिश ध्यान चीन को यह आश्वासन देने की होगी कि नेपाल किसी रूप में चीन के हितों को चोट नहीं पहुंचाएगा। सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘नेपाल चीनी पक्ष को आश्वस्त करने की कोशिश करेगा कि मौजूदा सरकार चीन के किसी वैध हित के खिलाफ काम नहीं करेगी। लेकिन वह नेपाल के हित में और नेपाल की विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी ताकतों और पड़ोसी देशों के साथ भागीदारी बनाना जारी रखेगी।’

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नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता प्रकाश महत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा- ‘चीन के विदेश मंत्री की क्या राय है, इसे हम सुनेंगे। लेकिन हम महाशक्तियों और पड़ोसी देशों के साथ समानता और राष्ट्रीय हित के आधार पर संबंध बढ़ाना जारी रखेंगे।’ महत ही 2017 में विदेश मंत्री थे, जब नेपाल ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में शामिल होने के समझौते पर दस्तखत किए। खबरों के मुताबिक अब चीन ने बीआरआई परियोजना अमल के लिए नेपाल के सामने एक प्रस्ताव रखा है। मकसद इस मामले में नेपाल की अंतिम सहमति हासिल करना है। पर्यवेक्षकों की नजर इस पर है कि क्या वांग की यात्रा के दौरान इस अमल संबंधी प्रस्ताव पर दस्तखत होते हैं।

26 मार्च को द्विपक्षीय वार्ता

देउबा मंत्रिमंडल ने बीते रविवार को अपनी एक विशेष बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा की थी, जिन पर चीनी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान बातचीत होगी। इनमें तकनीकी और आर्थिक सहयोग के तहत अतिरिक्त चीनी सहायता प्राप्त करने के लिए संभावित करार भी है। सोमवार को वित्त और विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों ने इस सहायता से संबंधित बारीकियों को तय किया था। चीन इस बारे में समझौते का एक ड्राफ्ट नेपाल को पहले ही भेज चुका है।



वांग और नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का के बीच 26 मार्च को द्विपक्षीय वार्ता होगी। बताया जाता है कि वांग की यात्रा के दौरान सबसे अहम कार्यक्रम यही है।

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