फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Chinese Economy facing biggest downfall in last 17 years, Industrial production growth went down

ट्रेड वॉर ने खराब की चीनी अर्थव्यवस्था की हालत, 17 साल का सबसे बड़ा झटका

Mon, 16 Sep 2019 09:01 PM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 16 Sep 2019 09:01 PM IST
सार

  • आंकड़ों में चीन की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर रही 4.4 फीसदी
  • 17 साल के निचले स्तर पर आ गया है चीन में औद्योगिक उत्पादन 
  • चीन की खुदरा बिक्री और निवेश की हालत भी खराब हालात में
  • तीन साल में पहली बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है चीन

विज्ञापन
Chinese Economy facing biggest downfall in last 17 years, Industrial production growth went down
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के चलते दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन को बड़ा झटका लगा है।  चीन में औद्योगिक उत्पादन 17 साल के निचले स्तर पर आ गया है। चीन में अगस्त माह तक औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर भी पिछले साढ़े 17 साल के निचले स्तर पर आ गई है। चीन और उसकी अर्थव्यवस्था से जुड़े देशों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय हो सकता है।

विज्ञापन


आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीन के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 4.4 फीसदी रही है, जो फरवरी 2002 के बाद का सबसे निचला स्तर है। सोमवार को जारी आंकड़े बताते हैं कि चीन की खुदरा बिक्री और निवेश की हालत भी खराब हो चुकी है। इस तेज गिरावट को रोकने के लिए चीन तीन साल में पहली बार मंगलवार तक कुछ अहम ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। 
विज्ञापन


चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण पिछले साल चीन द्वारा देश की वृद्धि दर बढ़ाने के लिए किए गए उपाय काम नहीं आए। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तेज मंदी को दूर करने के लिए चीन को और प्रोत्साहन की जरूरत होगी। प्रीमियर ली केकियांग ने भी सोमवार को आंकड़ों की पुष्टि की और कहा कि अर्थव्यवस्था में छह फीसदी की वृद्धि के लिए यह मुश्किल दौर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

चीन की मंदी से बढ़ेंगी दुनिया भर की चिंताएं

बीती शताब्दी के अंत तक दुनिया की आर्थिक गतिविधियों में चीन की करीब सात फीसदी हिस्सेदारी थी इसलिए चीन में छाने वाली मंदी से पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ सकती हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि चीन का उद्योग पूरे विश्व में आपूर्ति श्रंखला से बेहद करीब से जुड़ा हुआ है। इस साल यह आंकड़ा 19 फीसदी रहने की उम्मीद है।

चीन की मंदी साबित हो सकती है खतरनाक

चूंकि चीन की अर्थव्यस्था से ही दुनिया में कई उत्पादों की कीमतें तय होती हैं। इसलिए यह मंदी बेहद खतरनाक हो सकती है। दुनिया में उत्पादित होने वाला करीब आधा स्टील, तांबा, कोयला और सीमेंट चीन चला जाता है। ऐसे में यदि चीन इन चीजों की खरीददारी बंद कर दे तो पूरी दुनिया में इनकी कीमतें लुढ़कनी तय हैं।

भारत पर नहीं पड़ेगा खास असर, होगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के आयात में चीन की बड़ी हिस्सेदारी 16 फीसदी से ज्यादा है। चीन भारत के लिए निर्यात का 4.39 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चौथा सबसे बड़ा बाजार भी है। इसलिए चीन में आई गिरावट का भारत पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। दूसरी तरफ भारत के लिए अच्छी बात यह है कि वो चीन की कंपनियों के लिए शानदार ठिकाना बन सकता है। यानी चीन की जो कंपनियां अपने उत्पाद भारत में बेचती हैं, वह भारत में ही अपना उत्पादन शुरू कर सकती हैं। भारत को ढांचागत सुविधाओं के मामले में भी चीन की कंपनियों से मदद मिलेगी। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed