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अमेरिका में बढ़ रहीं ब्याज दरें!: चीन में निवेश को लेकर क्यों निवेशकों में क्यों बन गया है निगेटिव सेंटीमेंट?

Thu, 05 May 2022 03:27 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 05 May 2022 03:27 PM IST
सार

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने बीते दस अप्रैल को एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया था। इसे ‘राष्ट्रीय एकीकृत बाजार के निर्माण को प्रोत्साहन पर राय’ शीर्षक से पेश किया गया। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि इस दस्तावेज के सामने आने के बाद से चीनी बाजारों के प्रति विदेशी निवेशकों का संशय बढ़ा है...

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Chinese currency yuan decline against the US dollar recently as foreign investors pull out money
चीनी स्टॉक एक्सचेंज - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

क्या चीन को अर्थव्यवस्था में सरकारी दखल की कीमत अब चुकानी पड़ रही है? हाल में जिस बड़े पैमाने पर विदेशी निवेशकों ने चीन के बाजार से पैसा निकाला है, उसके बाद चीन में इस सवाल पर चर्चा शुरू हो गई है। विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने की वजह से हाल में अमेरिकी डॉलर की तुलना में चीनी मुद्रा युवान की कीमत में गिरावट आई है। जानकारों के मुताबिक चीन से विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने के कारणों में चीन में कोरोना महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियां धीमी होना और अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना भी है। लेकिन इसके पीछे चीनी बाजार में सरकार का बढ़ रहा दखल का भी हाथ है।

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने बीते दस अप्रैल को एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया था। इसे ‘राष्ट्रीय एकीकृत बाजार के निर्माण को प्रोत्साहन पर राय’ शीर्षक से पेश किया गया। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि इस दस्तावेज के सामने आने के बाद से चीनी बाजारों के प्रति विदेशी निवेशकों का संशय बढ़ा है। कुछ हलकों में यह अनुमान लगाया है कि ये दस्तावेज चीन में फिर से नियोजित अर्थव्यवस्था को वापस लेने का खाका हैं।

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निजी कंपनियों पर कसी जा रही लगाम

साल 2020 से चीन सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों पर लगाम कसने के कई उपाय किए हैं। पिछले महीने जारी हुए दस्तावेज को उसी सिलसिले की अगली कड़ी समझा गया। शंघाई की वेबसाइट सिक्थटोन.कॉम में छपे एक विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि चीन सरकार पिछले कई वर्षों से घरेलू बाजार में वस्तुओं के समान और निर्बाध प्रसार की कोशिश में जुटी रही है। इस दौरान कई वैसे कदम उठाए गए, जो पुराने दौर की नियंत्रित अर्थव्यवस्था से मेल खाते हैं।

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खुली अर्थव्यवस्था के पैरोकारों ने इन कदमों को संरक्षणवादी बताया है। इन विशेषज्ञों ने पिछले महीने जारी दस्तावेज के बारे में आशंका जताई है कि यह उन कदमों को सरकारी नीति का रूप देने की कोशिश है। इसके जरिए सरकार गुजरे दौर की नियोजित और नियंत्रित अर्थव्यवस्था की तरफ लौटने की तैयारी कर रही है।    

घबराए निवेशक

लेकिन सरकार समर्थक मीडिया में इसे जानबूझ कर चीन के खिलाफ फैलाए जा रहे भ्रम का हिस्सा बताया गया है। चीनी टीकाकार लु मिंग ने दावा किया है कि चीन सरकार श्रम जैसे उत्पादन के लिए जरूरी इनपुट के आवंटन में बाजार की भूमिका बढ़ाने की नीति पर चल रही है। उसने उत्पादन प्रक्रिया को सहज बनाने की कोशिश की है। लेकिन लु ने स्वीकार किया है कि सरकारी दस्तावेज से भ्रम फैला। उन्होंने सरकार से इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने और सभी हित-धारकों को भरोसे में लेने की सलाह दी है।



अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में निवेश करने को लेकर हाल में निवेशकों के बीच नकारात्मक भावना (निगेटिव सेंटीमेंट) बन गया है। इसी का नतीजा है कि मार्च के बाद से युवान का भाव गिरा है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि अमेरिका में ब्याज दर में इजाफे की घोषणा के बाद चीन सहित तमाम एशियाई बाजारों की चुनौती और बढ़ जाएगी। अमेरिका का सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व बुधवार को (भारतीय समय के अनुसार बुधवार देर रात) नई ब्याज दरों का एलान करने वाला है।

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