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महामारी ने बदला चीन के लोगों का नजरिया, पश्चिम से मोहभंग का दौर
Mon, 17 May 2021 03:32 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 17 May 2021 03:32 PM IST
सार
चीन की वुहान यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर छिन चियानहोंग ने कहा कि 2020 में चीन में जिस तेजी से कोरोना महामारी पर काबू पाया गया, उससे अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था के प्रति बहुत से लोगों की राय सकारात्मक हुई है...
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चीन
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
चाओ मू चीन के उदारवादी बुद्धिजीवी हैं। वे चीन की कम्युनिस्ट व्यवस्था के आलोचक रहे हैं। उन्हें अमेरिकी जीवन शैली लुभाती रही है। लेकिन अब उनकी राय बदल रही है। बीते मार्च में उन्होंने एक ब्लॉग में लिखा- ‘चीनी समाज में पिछले दशकों के दौरान बुनियादी बदलाव आए हैं। यहां गरीबी और अन्याय अभी भी है। लेकिन अगर आप प्रयास करें, तो अपनी जिंदगी बदल सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन अमेरिकी समाज में वर्ग व्यवस्था जड़ हो गई है। इसका कारण शिक्षा और समान अवसरों की कमी है।’ हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट मुताबिक चाओ उन पढ़े-लिखे नौजवानों की एक मिसाल हैं, जिनका हाल के वर्षों में अमेरिका से मोहभंग हुआ है।
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बीते अप्रैल में ग्लोबल टाइम्स रिसर्च सेंटर ने चीन के 1200 नौजवानों के बीच पश्चिमी देशों की उनकी राय के बारे में एक सर्वे किया। ये रिसर्च सेंटर चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स से संबंधित है। इस सेंटर ने एक ऐसा सर्वे 2016 में भी कराया था। 2016 में जितने नौजवानों से पश्चिमी देशों को चीन से ऊपर माना था, उससे 30 फीसदी कम नौजवानों ने इस साल पश्चिम को बेहतर बताया। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ओंटारियो में समाजशास्त्र के प्रोफेसर केरी वू ने अप्रैल 2020 में 20 हजार लोगों के बीच एक ऑनलाइन सर्वे कराया था। उसका निष्कर्ष रहा कि चीन के लोगों में अपनी सरकार के प्रति भरोसा बढ़ कर 98 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
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बीते पांच मई को अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में केरी मू ने लिखा- ‘चीन में स्थानीय सरकारों के प्रति भी 2018 की तुलना में लोगों का भरोसा बढ़ा है। तब ये 91 फीसदी था। पिछले साल यह ग्रामीण इलाकों में 93 फीसदी, शहरी स्तर पर 94 फीसदी और प्रांतीय स्तर पर 95 फीसदी हो गया।’ ये आंकड़े एक दशक पहले सर्वेक्षणों में उभरने वाली तस्वीर से बिल्कुल उलट हैं। तब आम लोगों की राय में चीन सरकार को भ्रष्टाचार में फंसी हुई माना जाता था। साथ ही चीन के ज्यादातर लोग गरीबों और अमीरों के बीच बढ़ रही खाई और प्रशासनिक अकुशलता से असंतुष्ट थे।
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चीन की वुहान यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर छिन चियानहोंग ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि 2020 में चीन में जिस तेजी से कोरोना महामारी पर काबू पाया गया, उससे अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था के प्रति बहुत से लोगों की राय सकारात्मक हुई है। उन्होंने कहा- ‘लोगों ने ये देखा कि यहां महामारी के फैलाव पर कितने प्रभावी ढंग से काबू पाया गया। जिस समय पश्चिमी देशों में लोग भारी नुकसान झेल रहे हैं, चीन के लोग- जिनमें मैं भी शामिल हूं- चीनी व्यवस्था और उसके शासन के तौर-तरीकों के समर्थक हो गए हैं।’
कोरोना वायरस महामारी सबसे पहले वुहान में ही दिसंबर 2019 में सामने आई थी। लेकिन आज वहां संक्रमण के गिने-चुने मामले ही सामने आते हैं। जबकि बहुत से दूसरे देशों में महामारी आज भी विकराल रूप धारण किए हुए है। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक और राजनीति-शास्त्री स्टीव त्सांग के मुताबिक चीन और दूसरे देशों के बीच शक्ति संतुलन में हुआ बदलाव एक और कारण है, जिससे चीनी जनता का नजरिया बदला है। उन्होंने कहा- ‘जिस समय डोनाल्ड ट्रंप और बोरिस जॉनसन जैसे नेताओं और महामारी संभालने में कमजोरी के कारण पश्चिमी लोकतंत्र कमजोर हो गए हैं, उस समय चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का राष्ट्रवादी कथानक चीन के लोगों को आकर्षक लगने लगा है।’
अमेरिका के कैलिफॉर्निया स्थित क्लेयरमॉन्ट मैकेना कॉलेज में राजनीति-शास्त्री पेइ मिक्सिन के मुताबिक पश्चिमी देशों ने अब चीन विरोधी नजरिया अपना लिया है, जिसकी प्रतिक्रिया में चीन के लोगों में नाराजगी पैदा हुई है। इस कारण जो चीनी उदारवादी नजरिया रखते हैं, वे भी राष्ट्रवादी और अमेरिका विरोधी दृष्टिकोण रखने लगे हैँ। विश्लेषकों का कहना है कि साल 2020 की चीन के लोगों का नजरिया बदलने में अहम भूमिका रही। इस दौरान पश्चिम से उनका मोह टूटा और अपने देश में उनका भरोसा बढ़ा है।