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ईरान की ट्रंप को चेतावनी: जवाबी कार्रवाई हम तय करेंगे; ब्रिटेन की नौसेना-वायुसेना को घोषित किया आतंकवादी संगठन
Sun, 01 Nov 2026 06:29 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, तेहरान।
एएनआई, तेहरान।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 01 Nov 2026 06:29 PM IST
सार
ईरान ने अमेरिका को धमकी दी है कि उस पर हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई का समय और दायरा वह खुद तय करेगा। साथ ही, उसने ब्रिटेन की नौसेना और वायुसेना को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। आखिर ईरान ने ये कदम क्यों उठाए और क्या इससे तनाव और बढ़ेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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ईरानी रक्षा मंत्री मेहरदाद अखलाघी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/ईरानी दूतावास, भारत
विस्तार
ईरान के रक्षा मंत्री मेहरदाद अखलाघी ने रविवार को अमेरिका को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तेहरान पर कोई भी हमला हुआ तो ईरान उसका उचित, निर्णायक और प्रभावी जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो यह लंबे समय तक चल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी मर्जी से इस युद्ध को खत्म नहीं कर पाएंगे। अल जजीरा की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
अखलाघी ने कहा, बाहरी हमलावर यह तय नहीं कर सकते कि ईरान किस तरह जवाब देगा। वे ईरान की जवाबी कार्रवाई की दिशा भी तय नहीं कर सकते। रिपोर्ट में ईरान के रक्षा मंत्री के हवाले से कहा गया, जो लोग धमकियां देते हैं, वे ईरान की रक्षात्मक प्रतिक्रिया का दायरा, समय या उसके नतीजे तय नहीं करेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने फिर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो यह पिछले सैन्य संघर्षों से कहीं ज्यादा लंबा चल सकता है। उन्होंने साफ किया कि जंग कब खत्म होगी, यह फैसला ट्रंप नहीं करेंगे।
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यह चेतावनी इस साल हुए सैन्य संघर्ष के बाद आई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद करीब 40 दिनों तक दोनों पक्षों के बीच भीषण सैन्य संघर्ष चला। अप्रैल तक भारी लड़ाई धीरे-धीरे कम हो गई। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच रुक-रुककर जवाबी हमले होते रहे।
ईरान ने आईएमओ को क्या सबूत सौंपे?
इस बीच, ईरान ने अमेरिका और इस्राइल के कथित हमलों से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) को सौंपे हैं। अल जजीरा के मुताबिक, ईरान ने इन सबूतों को एक रिपोर्ट के साथ भेजा है।
इन सबूतों को आईएमओ के सदस्य देशों के बीच औपचारिक रूप से भेजा गया है। इन पर विचार किया जाएगा। इन्हें एजेंडा आइटम 11 के तहत रखा गया है। इसका शीर्षक 'अहम समुद्री मार्गों की सुरक्षा' है। इन सबूतों की समीक्षा लंदन में होने वाली परिषद की बैठक में होगी। यह बैठक 2 से 6 नवंबर तक चलेगी।
ईरान ने कहा कि समुद्री ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए गंभीर खतरा हैं। इनसे नाविकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि समुद्री यातायात नियंत्रण नेटवर्क पर हमलों से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। वहीं, आपातकालीन बचाव केंद्रों को नष्ट करने से आपदा के समय मदद पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। इसका असर अहम जलमार्गों पर पड़ता है।
ब्रिटिश नौसेना और वायुसेना को आतंकवादी संगठन घोषित किया
इससे पहले रविवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक और बड़ा एलान किया। उसने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया। मंत्रालय ने ब्रिटेन की गोपनीय खुफिया सेवा (एमआई6) को 'शत्रु समूह' भी घोषित किया। ईरान ने इसके लिए तेहरान के खिलाफ ब्रिटेन की कथित शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों का हवाला दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने आज एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि ये फैसले देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर लिए गए हैं। ये कदम पिछले एक साल में ब्रिटेन की कार्रवाइयों के जवाब में उठाए गए हैं।
मंत्रालय ने ब्रिटिश सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियां और कार्रवाइयां संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। इनमें राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान का सिद्धांत भी शामिल है। साथ ही, दूसरे देशों के खिलाफ गैरकानूनी कदम उठाने पर रोक का सिद्धांत भी शामिल है।
ईरान ने फैसले के पीछे क्या वजह बताई?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इस्राइल के साथ युद्ध में ब्रिटेन की कथित भूमिका का जिक्र किया। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने अपने अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में सैन्य और रसद से जुड़ी सुविधाएं और ठिकाने उपलब्ध कराए थे। बयान में ब्रिटिश सरकार के 13 जुलाई 2026 के फैसले का भी जिक्र किया गया। उस दिन ब्रिटेन ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026 के तहत रखा था।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, ये फैसले अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबी कार्रवाई के सिद्धांत के अनुसार लिए गए हैं। मंत्रालय ने कहा, यह स्पष्ट है कि ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और जवाबी कार्रवाई के सिद्धांत के दायरे में उठाए गए हैं। इनके नतीजों की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की होगी।
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अखलाघी ने कहा, बाहरी हमलावर यह तय नहीं कर सकते कि ईरान किस तरह जवाब देगा। वे ईरान की जवाबी कार्रवाई की दिशा भी तय नहीं कर सकते। रिपोर्ट में ईरान के रक्षा मंत्री के हवाले से कहा गया, जो लोग धमकियां देते हैं, वे ईरान की रक्षात्मक प्रतिक्रिया का दायरा, समय या उसके नतीजे तय नहीं करेंगे।
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रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने फिर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो यह पिछले सैन्य संघर्षों से कहीं ज्यादा लंबा चल सकता है। उन्होंने साफ किया कि जंग कब खत्म होगी, यह फैसला ट्रंप नहीं करेंगे।
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यह चेतावनी इस साल हुए सैन्य संघर्ष के बाद आई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद करीब 40 दिनों तक दोनों पक्षों के बीच भीषण सैन्य संघर्ष चला। अप्रैल तक भारी लड़ाई धीरे-धीरे कम हो गई। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच रुक-रुककर जवाबी हमले होते रहे।
ईरान ने आईएमओ को क्या सबूत सौंपे?
इस बीच, ईरान ने अमेरिका और इस्राइल के कथित हमलों से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) को सौंपे हैं। अल जजीरा के मुताबिक, ईरान ने इन सबूतों को एक रिपोर्ट के साथ भेजा है।
इन सबूतों को आईएमओ के सदस्य देशों के बीच औपचारिक रूप से भेजा गया है। इन पर विचार किया जाएगा। इन्हें एजेंडा आइटम 11 के तहत रखा गया है। इसका शीर्षक 'अहम समुद्री मार्गों की सुरक्षा' है। इन सबूतों की समीक्षा लंदन में होने वाली परिषद की बैठक में होगी। यह बैठक 2 से 6 नवंबर तक चलेगी।
ईरान ने कहा कि समुद्री ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए गंभीर खतरा हैं। इनसे नाविकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि समुद्री यातायात नियंत्रण नेटवर्क पर हमलों से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। वहीं, आपातकालीन बचाव केंद्रों को नष्ट करने से आपदा के समय मदद पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। इसका असर अहम जलमार्गों पर पड़ता है।
ब्रिटिश नौसेना और वायुसेना को आतंकवादी संगठन घोषित किया
इससे पहले रविवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक और बड़ा एलान किया। उसने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया। मंत्रालय ने ब्रिटेन की गोपनीय खुफिया सेवा (एमआई6) को 'शत्रु समूह' भी घोषित किया। ईरान ने इसके लिए तेहरान के खिलाफ ब्रिटेन की कथित शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों का हवाला दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने आज एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि ये फैसले देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर लिए गए हैं। ये कदम पिछले एक साल में ब्रिटेन की कार्रवाइयों के जवाब में उठाए गए हैं।
मंत्रालय ने ब्रिटिश सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियां और कार्रवाइयां संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। इनमें राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान का सिद्धांत भी शामिल है। साथ ही, दूसरे देशों के खिलाफ गैरकानूनी कदम उठाने पर रोक का सिद्धांत भी शामिल है।
ईरान ने फैसले के पीछे क्या वजह बताई?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इस्राइल के साथ युद्ध में ब्रिटेन की कथित भूमिका का जिक्र किया। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने अपने अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में सैन्य और रसद से जुड़ी सुविधाएं और ठिकाने उपलब्ध कराए थे। बयान में ब्रिटिश सरकार के 13 जुलाई 2026 के फैसले का भी जिक्र किया गया। उस दिन ब्रिटेन ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026 के तहत रखा था।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, ये फैसले अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबी कार्रवाई के सिद्धांत के अनुसार लिए गए हैं। मंत्रालय ने कहा, यह स्पष्ट है कि ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और जवाबी कार्रवाई के सिद्धांत के दायरे में उठाए गए हैं। इनके नतीजों की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की होगी।