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श्रीलंका आर्थिक संकट: कोलंबो में चीनी राजदूत ने जताई नाराजगी, कहा- ऋण पुनर्गठन का भविष्य के द्विपक्षीय ऋणों पर पड़ेगा प्रभाव
Mon, 25 Apr 2022 08:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 25 Apr 2022 08:57 PM IST
सार
इन दिनों श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। कोलंबो में चीनी राजदूत क्यूई जेनहोंग ने ऋण पुनर्गठन के लिए सरकार के आईएमएफ के पास जाने को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि ऋण पुनर्गठन का भविष्य के द्विपक्षीय ऋणों पर प्रभाव पड़ेगा।
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चीन-श्रीलंका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोलंबो में चीनी राजदूत क्यूई जेनहोंग ने मदद और चेतावनी के लिए आईएमएफ से संपर्क करने के सरकार के कदम पर नाराजगी व्यक्त की है। कोलंबो में चीनी राजदूत क्यूई जेनहोंग ने सोमवार को कहा कि चीन ने श्रीलंका को डिफॉल्ट न करने में मदद करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन दुख की बात है कि वे आईएमएफ के पास गए और डिफॉल्ट करने का फैसला किया।। उन्होंने कहा कि ऋण पुनर्गठन का निश्चित रूप से भविष्य के द्विपक्षीय ऋणों पर प्रभाव पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि चीन अभी भी श्रीलंका के अनुरोध पर 1.5 बिलियन अमरीकी डालर के खरीदार के ऋण और एक और 1 बिलियन अमरीकी डालर के ऋण पर विचार कर रहा था। चीनी राजदूत ने कहा कि हम आईएमएफ की चर्चा पर करीब से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के पूर्व औपनिवेशिक आकाओं पर देश की मदद करने के लिए अधिक दायित्व हैं। क्यूई ने कहा हालांकि, चीन सहमति के अनुसार पुराने ऋणों का वितरण जारी रखेगा।
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गौरतलब है कि आईएमएफ में जाने से पहले श्रीलंका ने 12 अप्रैल को देश के स्वतंत्र इतिहास में अपनी पहली ऋण डिफाल्ट की घोषणा की। इन दिनों कर्ज में डूबा श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से अपनी स्वतंत्रता के बाद से एक अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। श्री लंका का ये संकट विदेशी मुद्रा की कमी के कारण है।
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गोटाबाया राजपक्षे सरकार ने इससे पहले काफी समय तक ऋण पुनर्गठन समर्थन के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से संपर्क करने से इनकार किया, लेकिन पिछले हफ्ते ही राष्ट्रपति ने इसे गलती कहते हुए स्वीकार किया कि वाशिंगटन स्थित अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता के पास नहीं जाना एक गलती थी। उनकी टिप्पणी आईएमएफ द्वारा मौजूदा आर्थिक संकट को कम करने के प्रयासों में श्रीलंका को समर्थन का आश्वासन देने के कुछ दिनों बाद आई है।